भारत में अन्न को देवता का दर्जा दिया गया है। शादियों, उत्सवों और त्यौहारों में होने वाली भोजन की बर्बादी से हम सब अच्छी तरह से परिचित हैं। इन अवसरों पर बहुत सारा खाना कचरे में चला जाता है। होटलों में भी काफी मात्रा में बचा हुआ भोजन (जूठन) छोड़ दिया जाता है। भारतीय संस्कृति में बचा हुआ भोजन (जूठन) छोड़ना पाप बताया गया है। दुनिया भर में हर साल जितना भोजन तैयार किया जाता है, उसका 33 प्रतिशत भोजन बर्बाद हो जाता है। विश्व भर में भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष ने एकजुट होकर एक नई योजना का आरंभ किया है।

‘भोजन की बर्बादी’ के विषय पर आधारित स्लोगन निम्नलिखित हैं।

स्लोगन.1

खाने की बर्बादी से बचें, भोजन का सदुपयोग करें।

स्लोगन.2

भोजन है जीवन, अन्न ही है परब्रह्म।

स्लोगन.3

शादियों में होती है भोजन की बर्बादी, विचार करें कितनी होती है नुकसानी।

स्लोगन.4

सब मिलकर देश में ऐसे नियम लाएँ, बचा हुआ अच्छा खाना जरूरतमंद तक पहुँचाएँ।

स्लोगन.5

शुभ कार्यों में भोजन उतना ही बनायें, कि बचने पर कभी फेकनें की नौबत ना आये।

स्लोगन.6

अन्न फेंकने के कारण, नुकसान हो जाये, जहाँ फेंके वहाँ फैले दुर्गन्ध, और स्वच्छता में बाधा आये।

स्लोगन.7

दाम नहीं मिलने पर, किसान बड़ी मात्रा में सब्जी फेंके जाए, बाँटे यदि लोगों में, तो उनकीं दुआ मिल जाए।

स्लोगन.8

खाने की बर्बादी को रोको, अर्थव्यवस्था आहात होती है इससे बात हमारी मानो।

स्लोगन.9

दुनियाँ में एक-तिहाई भोजन का होता है नुकसान, अन्न के अपव्यय की चिंता से क्यों है सब अनजान।