भीमबेटका की गुफ़ाएँ | Bhimbetka ki Gufaen in Hindi

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भीमबेटका की गुफ़ाएँ भारत के मध्यप्रदेश प्रान्त के रायसेन जिले में स्थित हैं। ये गुफ़ाएँ भोपाल से 46 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण में मौजूद हैं। ये गुफाएँ आदिमानव द्वारा बनाये गये शैलचित्रों और शैलाश्रय के लिए विख्यात हैं। इन चित्रों को पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल के दौरान का बताया जाता है। इसे यूनेस्को द्वारा जुलाई सन. 2003 में विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है। ये गुफ़ाएँ चारों तरफ़ से विंध्य पर्वतमालाओं से घिरी हुईं हैं। भीमबेटका को भीम का निवास भी कहते हैं। भीमबेटका नाम भीम और वाटिका, दो शब्दों से मिलकर बना है। हिन्दू धर्म ग्रंथ महाभारत के अनुसार पाँच पाण्डव राजकुमारों में से भीम द्वितीय थे। ऐसा माना जाता है कि भीमबेटका गुफ़ाओं का स्थान महाभारत के चरित्र भीम से संबन्धित है और इसी से इसका नाम “भीमबैटका” रखा गया। भीमबेटका का उल्लेख पहली बार भारतीय पुरातात्विक रिकॉर्ड में सन. 1888 में बुद्धिस्ट साइट के तौर पर आया है। यहाँ के शैल चित्रों के विषय मुख्यतया सामूहिक नृत्य, रेखांकित मानवाकृति, शिकार, पशु-पक्षी, युद्ध और प्राचीन मानव जीवन के दैनिक क्रियाकलापों से जुड़े हैं। चित्रों में प्रयोग किये गए खनिज रंगों में मुख्य रूप से गेरुआ, लाल और सफ़ेद हैं और कहीं-कहीं पर पीला और हरा रंग का भी प्रयोग किया गया है। भीमबेटका में पाई जाने वाली कुछ कलाकृतियाँ तो लगभग 25000 वर्ष पुरानी हैं। यहाँ की गुफाएँ हमें प्राचीन नृत्यकलाओं का उदाहरण भी देती हैं। इसकी खोज सन. 1957-58 में “डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर” द्वारा की गई थी।

पूर्व पाषाणकाल से मध्यपाषाण काल तक यह स्थान मानव गतिविधियों का केंद्र रहा। भीमबेटका गुफाओं में बनी चित्रकारियाँ यहाँ रहने वाले पाषाणकालीन मनुष्यों के जीवन को दर्शाती हैं। भीमबेटका गुफ़ाएँ प्रागैतिहासिक काल की चित्रकारियों के लिए लोकप्रिय हैं। भीमबेटका गुफ़ाएँ आदिमानव द्वारा बनाये गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध हैं। गुफ़ाओं की सबसे प्राचीन चित्रकारी को 12000 साल पुरानी माना जाता है। भीमबेटका गुफ़ाओं की विशेषता यह है कि यहाँ की चट्टानों पर हज़ारों वर्ष पहले बनी चित्रकारी आज भी उपस्थित है। भीमबेटका में 750 गुफाएं हैं, जिनमें 500 गुफाओं में शैलचित्र बने हैं। भीमबेटका गुफ़ाओं में अधिकतर तस्‍वीरें लाल और सफ़ेद रंग की हैं। कभी कभार पीले और हरे रंग के बिन्‍दुओं का भी प्रयोग किया गया है। जिनमें दैनिक जीवन की घटनाओं से ली गई विषय वस्‍तुएँ चित्रित हैं, जो हज़ारों साल पहले का जीवन दर्शाती हैं। इन चित्रों को पुरापाषाण काल से मध्यपाषाण काल के दौरान का माना जाता है। अन्य पुरावशेषों में प्राचीन क़िले की दीवार, लघुस्तूप, पाषाण निर्मित भवन, शुंग-गुप्त कालीन अभिलेख, शंख अभिलेख और परमार कालीन मंदिर के अवशेष भी यहाँ मिले हैं।

भीमबेटका गुफाओं में प्राकृतिक गेरुआ, लाल और सफ़ेद रंगों से वन्यप्राणियों के शिकार दृश्यों के अलावा घोड़े, हाथी, बाघ आदि के चित्र उकेरे गए हैं। इन चित्रों में दर्शाए गए चित्र मुख्‍यत है; सामूहिक नृत्‍य, संगीत बजाने, आखेट का दृश्य, रेखांकित मानवाकृति, शिकार करने, युद्ध, घोड़ों और हाथियों की सवारी, दैनिक क्रियाकलापों से जुड़े चित्र, पशु-पक्षियों के चित्र, शरीर पर आभूषणों को सजाने और शहद जमा करने के बारे में हैं। शेर, सिंह, जंगली सुअर, हाथियों, कुत्तों और घडियालों जैसे जानवरों को भी इन तस्‍वीरों में चित्रित किया गया है। इन आवासों की दीवारें धार्मिक संकेतों से सजी हुई है, जो पूर्व में ऐतिहासिक कलाकारों के बीच लोकप्रिय थे। सेंड स्टोन के बड़े खण्‍डों के अंदर अपेक्षाकृत घने जंगलों के ऊपर प्राकृतिक पहाड़ी के अंदर पाँच समूह हैं, जिसके अंदर मिज़ोलिथिक युग से ऐतिहासिक अवधि के बीच की तस्‍वीरें मौजूद हैं। इस स्‍थल के पास 21 गांवों के निवासियों की सांस्‍कृतिक परंपरा में इन पहाड़ी तस्‍वीरों के साथ एक सशक्‍त साम्‍यता दिखाई देती है।