भाषा की परिभाषा (Bhasha Ki Paribhasha)

भाषा क्या है? भाषा की परिभाषा और भाषा की प्रकृति

इस लेख में हम भाषा की परिभाषा और उसके प्रकार के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही उसकी आवश्यकता और किस प्रकार भाषा (Bhasha) का विकास हुआ यह भी जानेंगे। उम्मीद है इस लेख से आपको भाषा  के सम्बन्ध में काफी जानकारी मिलेगी।

भाषा: भाषा भावों-विचारों को प्रकट करने का माध्यम है, वो फिर चाहे मौखिक (Oral) हो, लिखित (Written) हो,  या सांकेतिक। भाषा (Bhasha)  का इतिहास (History) मनुष्य के जन्म के साथ ही जुड़ा है। भाषा (Bhasha)  के जरिये ही एक व्यक्ति (Person) अन्य व्यक्ति या समूह (Groups) को अपने विचारों (Idea) या अपनी बात को समझा पाता है।

डॉ. कामता प्रसाद के अनुसार, “भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार (Idea) दूसरों को भलीभांति प्रकट कर सकता है ,और दूसरों के विचार स्पष्टतया समझ सकता है।”

महर्षि पतंजलि ने पाणिनी की अष्टाध्यायी महाभाष्य में भाषा (Bhasha)  की परिभाषा बताते हुए कहा है कि – व्यक्ता वाचि वर्ण येषा त इमे व्यक्त्वाच, अर्थात जो वाणी से व्यक्त हो उसे भाषा  की संज्ञा दी जाती है।  

वहीँ प्लेटो ने विचार तथा भाषा  पर भाव व्यक्त करते हुए लिखा है कि- “विचार आत्मा की मूक बातचीत है, पर वही जब ध्वन्यात्मक होकर होठों पर प्रकट होती है उसे भाषा की संज्ञा देते हैं।”

समाज में रहते हुए हम सभी को लगातार विमर्श की जरुरत रहती है, जिसे भाषा साकार करती है| भाषा  को उसके प्रयोग के आधार पर सात भागों में विभाजित कर सकते हैं।

1-  मूक भाषा

2-  अस्पष्ट भाषा

3-  स्पष्ट भाषा

4-  स्पर्श भाषा

5-  इंगित भाषा

6-  वाचिक भाषा

7-  लिखित भाषा

1- मूक भाषा

मूक भाषा को अव्यक्त रूप भी कहा जा सकता है। इसमें संकेत, चिन्ह, भाव, आदि के माध्यम से अपने विचार रखते हैं।

2-अस्पष्ट भाषा

 जिस भाषा का अर्थ नहीं समझ आता लेकिन इतना पता चलता है कि कोई कुछ कहना चाहता है, वो अस्पष्ट भाषा की श्रेणी में आता है। जैसे चिड़ियों की चहचहाहट सबको भाती है, लेकिन उसका अर्थ निकालना या समझना मुश्किल है।

3-स्पष्ट भाषा

 जब कोई बात या विचार स्पष्ट रूप से कहा जाए और श्रोता को समझ भी आए, वो स्पष्ट भाषा कहलाएगी। जैसे दो मनुष्यों के बीच वार्ता।

4-स्पर्श भाषा

इसके अंतर्गत वक्ता अपनी बात अन्य व्यक्ति तक शरीर के स्पर्श से पहुँचाता है। इसके लिए दोनों में परस्पर सम्बन्ध निकटवर्ती होने चाहिए।

5-इंगित भाषा 

इसे सांकेतिक भाषा भी कह सकते हैं। इसमें विचार संकेतों के माध्यम से रखे जाते हैं। जैसे गाड़ी को हरी झंडी या लाल झंडी, रास्ते के निशान, इत्यादि इसमें आते हैं।

6-वाचिक भाषा

 वाचिक आर्थात मौखिक भाषा; ये ध्वनि के साथ संकेत के रूप में संवाद के लिए प्रयोग की जाती है। इसमें किसी यंत्र का भी प्रयोग लिया जाता है। जैसे आमने-सामने बैठकर या फिर टेलीफ़ोन पर बातचीत करना इसमें शामिल है।

7-लिखित भाषा

 ये माध्यम भाषा का सबसे उन्नत स्वरुप है। इसमें व्यक्ति अपनी बात अपनी भाषा और शब्दों में लिख कर प्रकट कर सकता है। जैसे पत्र लिखना, समाचार पत्र इसी श्रेणी में आते हैं।

भाषा की प्रकृति

भाषा एक सामाजिक शक्ति है जो मनुष्य या अन्य प्राणियों को उनके वातावरण के मुताबिक मिली हुई है। भाषा के अपने गुण अथवा स्वभाव को भाषा की प्रकृति कहते हैं। भाषा का विकास मनुष्य की पीढ़ियों के हिसाब से होता आ रहा है, और इसका विकास लगातार जारी है। इसी का परिणाम है कि दुनिया के अलग-अलग देशों की अपनी भाषा है। यही नहीं स्थानीय आधार पर एक ही देश में कई तरह की भाषाएँ प्रचलित हैं। भारत में ही हिंदी के साथ ही हर राज्य की अपनी क्षेत्रीय भाषा भी है।

आशा है कि, भाषा को लेकर उपरोक्त लेख में दी गयी जानकारी से आप जरुर संतुष्ट हुए होंगे।