आसल उत्ताड़ का युद्ध

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आसल उत्ताड़ का युद्ध
तिथि 8 सितम्बर 1965
स्थान आसल उत्ताड़, पंजाब, भारत
परिणाम भारतीय सेना की सफलता भरी विजय

 

आसल उत्ताड़ का युद्ध इतिहास का सबसे बड़ा भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया टैंक युद्ध था। भारत और पाकिस्तान का यह युद्ध 8 से 10 सितम्बर सन 1965 के दौरान पंजाब की सीमा पर लड़ा गया, जब पाकिस्तानी सेना ने अपने पैदल व टैंको की सेना के साथ आक्रमण करके भारत के अंतर्राष्ट्रीय देश पंजाब की सीमा के पांच किलोमीटर अन्दर तक स्थित खेमकरण पर अपना कब्जा कर लिया। तब इसके उत्तर में भारत ने भी पाकिस्तानी सेना को मूंहतोड़ जवाब दिया। आसल उत्ताड़ के हुए इस तीन दिन के युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर विवश कर दिया और खेमकरण को पाकिस्तानी सेना के शिकंजे से मुक्त करा लिया।

युद्ध

पाकिस्तानी सेना ने जब अपने बख्तरबंद डिवीज़न व 11 वीं इन्फैंट्रि डिवीज़न के साथ भारत की सीमा को पार करते हुए, पंजाब शहर में स्तिथ खेमकरण पर अपना कब्जा कर लिया, तब ऐसी विपरीत परिस्तिथि को देखते हुए, भारतीय सेना के जनरल ऑफिसर कमाण्डिंग मेजर जनरल हरबख्श सिंह ने तत्काल अपनी चौथी माऊण्टेन डिवीज़न को पीछे हटने का आदेश दिया और खेमकरण को पाकिस्तानियों से मुक्त कराने के लिए योजना बनाई। अपनी योजना को अंजाम देते हुए भारतीय सेना के जनरल ऑफिसर हरबख्श सिंह ने अपनी डिवीज़न को आसल उत्ताड़ को केन्द्र में रखते हुए प्रतिरक्षात्मक व्यूह बनाने को कहा और रात्रि के वक्त ही गन्ने के खेतों में अपना पड़ाव डाला। अब भारतीय सेना अगली सुबह पाकिस्तान की सेना पर आक्रमण करने के लिए तैयार थी। सुबह होते ही भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के प्रथम बख्तरबंद डिवीज़न में शामिल M-47और M-48 के पैटन टैंकों को अपने प्रतिरक्षात्मक व्यूह में फँसा लिया और लगातार उनपर गोला-बारी करते हुए टैंकों को ध्वस्त करने लगे। अपने ऊपर खतरे को देखते हुए पाकिस्तानी सेना ने भी अपने टैकों के साथ भारतीय सेना पर आक्रमण करने के लिए आगे कदम बढ़ाया लेकिन टैंका का अधिक वजन होने से वहाँ की दलदली जमीन पर पाकिस्तानी टैंकों की रफ़्तार धीमी होने लगी। कई टैंक तो उस दलदली जमीन में धंस कर फँस गए और दूसरी ओर भारतीय सेना ने दूरी को कायम रखते हुए लगातार अपने टैंकों के साथ आक्रमण किया और भारतीय सेना के जनरल हरबख्श सिंह ने अपने प्रतिरक्षात्मक व्यूह में फँसाए हुए सभी टैंकों का नष्ट कर दिया। भारतीय सेना ने अपने घातक आक्रमणों और कुशल रणनीति से पाकिस्तानी सेना को युद्ध भूमि पर खदेड़ दिया। जिसके कारण पाकिस्तानी सेना को उलटे पैर भागने पर विवश होना पड़ा और इसके साथ ही भारत की पाकिस्तानी सेना पर बहुत सुनहरी विजय हुई। जिसमें भारत ने पाकिस्तानी सेना के 100 टैंको (अनुमानित) को ध्वस्त किया और उन सभी टैंकों पर भारत का कब्जा हो गया, जिसमें शर्मन टैंक, शैफ टैंक और अधिकतर पैटन टैंक शामिल थे। भारतीय सेना के अनुसार उन्होंने भी इस युद्ध में अपने दस टैंक खोए।

भारत और पकिस्तान के हुए इस भीषण युद्ध में बहुत बड़ी संख्या में युद्ध भूमि पर पैटन टैंक इकट्ठा हुए थे। जिसके कारण यह भूमि “पैटन नगर” के नाम से विख्यात हो गई।

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