बाल विवाह कब बंद हुए (Baal Vivah kab band hue)

 भारत में बाल विवाह सदियों से चली आ रही एक प्रथा हैं| यहां यह प्रथा किसी धर्म विशेष से नहीं सभी धर्मों, समुदायों और वर्गों में बहुत लम्बे समय से चली आ रही है । पर वर्तमान समय में भी यह प्रथा कुछ ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलती हैं । बाल विवाह के पीछे भी कई कारण हैं जैसे गरीबी, पित्तृसत्ता और अशिक्षा| जो बाल विवाह के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं ।

बाल विवाह रोकने के लिए यूँ तो बहुत लोग सामने आए और इन लोगों में सबसे प्रमुख केवल चन्द्र सेन, राजा राम मोहन राय हैं । इन्होंने ब्रिटिश सरकार के द्वारा एक बिल पास कराया जिसका नाम Special Marriage act रखा गया । इस Act के तहत विवाह के लिए लड़के और लड़की की उम्र निर्धारित कर दी गई थी । जिसमें लड़कों की विवाह के लिए सबसे कम उम्र 18 वर्ष और इसी तरह लड़कियों की विवाह के लिए सबसे कम  उम्र 14 वर्ष रखी गई हैं । और बाल विवाह पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया थथा लेकिन जब प्रतिबंध के बाद भी सुधार नहीं आया तो Child Marriage Restraint नाम का एक और बिल पास किया गया, और इस बिल के अनुसार शादी के लिए लड़को की उम्र बढ़ाकर 21 उम्र और लड़कियों की उम्र 18 की गई। स्वतंत्र भारत के द्वारा भी बाल विवाह को रोकने के लिए कई प्रयत्न किए गए हैं ।‌ पर कई प्रयासों और कानूनों के लागू होने के बाद भी कुछ हद तक ही सुधार हो पाया है । इसके बाद सरकार ने कुछ और कानून बनाये जिसके तहत बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू किया गया जो अभी तक चल रहा हैं । यह अधिनियम के आने के बाद बाल विवाह को आंशिक रूप से सीमित करने की बजाय उस पर सख्ती से प्रतिबंध लगाए जाने लगे । इस अधिनियम के तहत जिन बच्चों की शादी कराई जा रही हैं वो बच्चे अपनी इच्छा से वयस्क होने के दो साल के अन्दर अपने बाल विवाह को अवैध घोषित कर सकते हैं । पर ये कानून मुस्लिम धर्म को छोड़कर बाकी सभी धर्मों पर लागू होता हैं ।

Baal Vivah kab band Hue

बाल विवाह होता क्या हैं –

बाल विवाह का मतलब होता है कि जब लडका और लडकी का विवाह बहुत कम उम्र में कर दिया जाए । अब वर्तमान समय में लड़कों के लिए शादी की उम्र 21 वर्ष और लड़कियों की उम्र 18 वर्ष कर दी गई हैं । और यदि कोई भी निर्धारित उम्र से कम उम्र में शादी कराता है  तो उसे बाल विवाह ही माना जाएगा । बाल विवाह मुख्यतया परिवार के द्वारा बनाई गई व्यवस्था के अधीन होता हैं । और यहां सहमति का कोई स्थान ही नहीं होता है । पर सरकार की अनुमति लेकर भी जो‌ बाल विवाह कराया जाता हैं वो भी पूरी तरह से वैध नहीं माना जाता हैं । क्योंकि अधिनियम के मुताबिक  वर्तमान समय में किसी एक व्यक्ति के द्वारा भी विवाह निरस्त कराया जा सकता है ।‌

इतिहास –

सन् 1929 में बिलास शारदा ने Central Lagislative Assembly ( सेन्ट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली ) में बाल विवाह को रोकने के लिए बिल लगाया था । शारदा का इस बिल का पहला उद्देश्य बाल विधवा को रोकना ही था । पर विधवा विवाह समाज के द्वारा अनुमत नहीं किया गया है । फिर आगे चलकर यह बिल बाल विवाह की रोकथाम अधिनियम भी कहलाया । इस अधिनियम के तहत विवाह के लिए एक न्यूनतम आयु भी तय की गई । इसमें लडकी की उम्र 14 वर्ष और लड़के की आयु 18 वर्ष रखी गई । इसके बाद इस अधिनियम में थोड़ा परिवर्तन किया गया जिसमें सन् 1978 में विवाह के लिए लड़कियों की उम्र 18 वर्ष और लड़कों की उम्र 21 वर्ष कर दी गई ।

सन् 1962 में गुजरात सरकार के द्वारा युवा लड़कियों की आत्महत्या के मामले बहुत बढ़ने से इसकी जांच करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के जांच के अनुसार कम उम्र में विवाहित लड़कियों और उनके विवाह के कारण ही ज्यादा आत्महत्या के मामले सामने आ रहे थे । इसलिए सरकार के द्वारा इस अधिनियम के तहत अपराधों को संज्ञेय बनाने के लिए बाल विवाह के अधिनियम में कुछ संशोधन किया गया हैं ।

सजा का प्रावधान क्या हैं –

इस अधिनियम के तहत यदि कोई व्यक्ति जो 18 वर्ष से अधिक हो और 21 वर्ष से कम है और वह बाल विवाह करता है तो उसे 15 दिन का कारावास और 1000 रुपए इन दोनों का सजा का प्रावधान किया गया था।

और यदि पुरुष की उम्र 21 वर्ष से अधिक है तो उसे 3 महिने की सजा और साधारण कारावास की सजा का प्रावधान रखा गया ।‌