अटल बिहारी वाजपेयी कोट्स | Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi

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“संयुक्त राष्ट्र की अद्वितीय वैधता इस सार्वभौमिक धारणा में निहित है कि वह किसी विशेष देश या देशों के समूह के हितों की तुलना में एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करता है।”
“गरीबी बहुआयामी है। यह हमारी कमाई के अलावा स्वास्थय, राजनीतिक भागीदारी, हमारी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति पर भी असर डालती है।”
“आप मित्र बदल सकते हैं पर पड़ोसी नहीं।”
“हम उम्मीद करते हैं कि विश्व प्रबुद्ध स्वार्थ की भावना से काम करेगा।”
“हम मानते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और बाकी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को हमेशा के लिए ख़त्म करने का दबाव बना सकते हैं।”
“पहले एक अन्तर्निहित दृढ़ विश्वास था कि संयुक्त राष्ट्र अपने घटक राज्यों की कुल शक्ति की तुलना में अधिक शक्तिशाली होगा।”
“जैव विविधता कन्वेंशन ने विश्व के गरीबों को कोई ठोस लाभ नहीं पहुँचाया है।”
“हमारे परमाणु हथियार विशुद्ध रूप से किसी विरोधी के परमाणु हमले को हतोत्साहित करने के लिए हैं।”
“किसी भी मुल्क को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझेदारी का हिस्सा होने का ढोंग नहीं करना चाहिए, जबकि वो आतंकवाद को बढ़ाने, उकसाने और प्रायोजित करने में लगा हुआ हो।”
“आज वैश्विक निर्भरता का अर्थ यह है कि विकासशील देशों में आई आर्थिक आपदाएं विकसित देशों में संकट ला सकती हैं।”
“शीत युद्ध के बाद आए उत्साह में एक गलत धारणा बन गई की संयुक्त राष्ट्र कहीं भी कोई भी समस्या हल कर सकता है।”
“आज वैश्विक निर्भरता का अर्थ यह है कि विकासशील देशों में आई आर्थिक आपदाएं विकसित देशों में संकट ला सकती हैं।”
“जो लोग हमसे पूछते हैं कि हम कब पाकिस्तान से वार्ता करेंगे वो शायद ये नहीं जानते कि पिछले 55 सालों में पाकिस्तान से बातचीत करने के सभी प्रयत्न भारत की तरफ से ही आये हैं।”
“जीवन के फूल को पूर्ण ताकत से खिलाएं।”
“भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वो आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता।”
“वास्तविकता ये है कि यू एन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन उतने ही कारगर हो सकते हैं, जितना कि उनके सदस्य उन्हें होने की अनुमति दें।”
“निराशा की अमावस की गहन निशा के अंधकार में हम अपना मस्तक आत्म-गौरव के साथ तनिक ऊंचा उठाकर देखें।”
“आदिवासियों की समस्याओं पर हमें सहानुभूति के साथ विचार करना होगा।”
“राज्य को, व्यक्तिगत सम्पत्ति को जब चाहे तब जब्त कर लेने का अधिकार देना एक खतरनाक चीज होगी।”
“सेवा-कार्यों की उम्मीद सरकार से नहीं की जा सकती। उसके लिए समाज-सेवी संस्थाओं को ही आगे उगना पड़ेगा।”