असहयोग आंदोलन कब हुआ था?

 

सितंबर 1920 से फरवरी 1922 के बीच गांधी जी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में इस आंदोलन को शुरू किया गया था जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक अलग ही जागृति प्रदान की । जलियांवाला बाग के घटनाक्रम के बाद से ही गांधी जी को यह लगने लगा था कि अंग्रेजों से किसी भी तरह के सहयोग की चाहत रखना गलत है इसलिए गांधी जी ने अंग्रेजों से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई । यह आंदोलन बहुत सफल भी रहा और इसका प्रोत्साहन लाखों लोगों ने किया । और इस आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार को पूरी तरह हिला कर रख दिया था ।

Ashahyog andolan kab hua tha

साइमन कमीशन –

असहयोग आंदोलन सफल रहा और इसकी वजह से ही राजनीतिक गतिविधियों में कुछ कमी भी आईं । साइमन कमीशन को ब्रिटिश सरकार  ने भारत सरकार की संरचना में सुधार करने हेतु 1927 में भारत लाया गया था ।  कमीशन के सदस्यों में कोई भी सदस्य भारतीय नहीं था । और इसलिए भारत सरकार के द्वारा स्वराज के लिए इस मांग मानने से इंकार कर दिया गया जिसकी वजह से पूरे देश में एक विद्रोह का सैलाब आया और कांग्रेस के साथ साथ मुस्लिम लोगो ने भी लाला लाजपत राय के नेतृत्व में इसका बहिष्कार किया । जिसकी वजह से सभी आंदोलनकारियों पर लाठी भी बरसाई गई । और इसकी आंदोलन में हुए लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय को बहुत चोट लगी और उनकी मृत्यु हो गई थी ।

गांधी जी का सहयोग आंदोलन –

1920 में महात्मा गांधी अंग्रेजों की बढ़ती ज्यादतियों को देखते हुए इस आंदोलन की शुरुआत की थी ।  असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर  बहुत से विद्यार्थियों ने स्कूल जाना छोड़ दिया , वकीलों ने अदालत जाना छोड़ दिया ।  तथा की कस्बों और नगरों के श्रमिक‌ हड़ताल पर चले गए थे । सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 1921 में 396 हड़तालें हुई थी । और इन सभी हड़तालो में 6 लाख श्रमिकों ने हिस्सा लिया था । और इन हड़तालों में 70 लाख कार्यविधियों का नुक़सान भी हुआ था, जिसका असर गांव देहातो से लेकर शहर तक हर जगह देखने को मिला था ।  गांधी जी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित छात्रों के लिए लाला लाजपत राय के द्वारा एक National College की शुरुआत की ।

असहयोग आंदोलन के क्या कारण –

1. Roller act –

1919 में Rowlatt act पारित किया गया था । इस अधिनियम को‌ Lord Chelmsford  वायसराय  द्वारा किया था तथा जिसका इस्तेमाल सरकार को देश में राजनीतिक गतिविधियों को दबाने के लिए किया गया था । और दो साल तक बिना किसी trail राजनीतिक कैदियों को हिरासत में रखा भी गया । जिसकी वजह से इस आंदोलन को शैतानी बताकर इसकी आलोचना भी की गई थी ।  असहयोग आंदोलन का मुख्य कारण था  Rowlatt Act और जलियांवाला बाग हत्याकांड । इसलिए गांधी जी की अध्यक्षता में 30 मार्च 1919 और 6 अप्रैल 1919 को एक देश व्यापी हड़ताल की गई । जिसकी वजह से चारों तरफ के सरकारी काम बंद पड़े गए थे

2. जलियांवाला बाग हत्याकांड

13 अप्रैल 1919 को यह हत्याकांड हुआ था,  जिसमें General dyer ने जलियांवाला बाग में मौजूद हजारों लोगों पर अचानक गोलियों से हमला करके सभी की हत्या कर दी थी । और ब्रिटिश सरकार का उद्देश्य का सभी लोगों में नैतिक प्रभाव को जगाना था ।

3. प्रथम विश्व युद्ध

यह आंदोलन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान प्रेस पर लगे प्रतिबंधों और बिना जांच किए गिरफ्तारी के वे आदेशों को सर सिडनी रोलेंट की अध्यक्षता वाली समिति के द्वारा कड़े निर्देश को जारी रखा । इसका पूरे भारत में व्यापक रूप से विरोध भी किया गया था ।। तब अंग्रेज अधिकारी इस असहयोग आंदोलन के कारण बेवस हो गए । 1920 में गांधी जी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया और क्योंकि गांधी जी ने इस आंदोलन में भाग लेने के लिए भारतीय लोगों को भी प्रेरित किया । और गांधी जी से प्रेरित होकर भारतीय लोगों ने इस आंदोलन में  बढ़ – चढ़ कर हिस्सा भी लिया ।

असहयोग आंदोलन की क्या विशेषता है

* असहयोग आंदोलन की शुरुआत अंग्रेजों की क्रूरताओं के खिलाफ की गई थी ।

* असहयोग आंदोलन को करने के लिए लोगों ने सरकार के द्वारा दी गई उपाधि जैसे कि सिविल सेवा, अदालतों और विधान परिषदों, सेना पुलिस, स्कूलों और विदेशी सभी वस्तुओं का बहिष्कार करके किया गया था ।

* असहयोग आंदोलन में देश में सभी विदेशी सामानों का बहिष्कार किया गया, तथा सभी शराब की दुकानों करके, विदेशी सभी दुकानों को जला दिया गया ।

* इस आंदोलन में मोतीलाल नेहरू, आसफ अली, C.R. Das, C. राजगोपालाचारी जैसे की वकीलों ने अपनी Practice तक छोड़ दी थी ।

* असहयोग आंदोलन की वजह से विदेशी कपड़ों के आयात में भी बहुत गिरावट आई थी ।

* जैसे जैसे यह आंदोलन बढ़ता गया सभी ने विदेशी कपड़ों को छोड़कर भारतीय कपड़ों को अपनाना शुरू कर दिया गया ।

असहयोग आंदोलन कब समाप्त हुआ –

चौरीचौरा काण्ड

5 फरवरी 1922 में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे किसानों पर कुछ पुलिस कर्मियों ने किसानों-मजदूरों पर गोलीबारी की । जिसकी वजह से गुस्से में आकर किसानों ने  UP के चौथा चौरीचौरा में स्थित एक पुलिस चौकी में हमला किया और आग लगा दी जिसकी वजह से दो पुलिसकर्मियों की मौत भी हो गई ।  और इस घटना के बाद ही गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया ।