अनोखा खत

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शहंशाह अकबर और बीरबल अन्य मंत्रियों के साथ दरबार में बैठे थे। मंत्री सुखदेव सिंह ईरान से हाल ही में वापस आये थे तो, शहंशाह अकबर बोले….!

शहंशाह अकबर बोले सुखदेव सिंह से – सुखदेव सिंह जी….! आप हाल ही में ईरान से लौटे हैं। इस बारे में, हमें कुछ बताएं। कैसा रहा सफ़र….!

सुखदेव सिंह बोला अकबर से – हुजूर……! सफ़र काफी अच्छा रहा और शाही ईरान ने आपको अपना सलाम भेजा है। उन्होंने बीरबल को भी याद किया था। दरअसल बीरबल को ईरान आने का न्योता दिया है। शाही मेहमान बनकर बीरबल से उनकी पिछली मुलाकात बेहद पसंद आई।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तो बीरबल….! तुम्हारे चाहने वालों में एक और नाम जुड़ गया। और वो भी एक शहंशाह का…..!

बीरबल बोले अकबर से – शुक्रिया हुजूर…..! मुझे भी उनका साथ बहुत पसंद आया। वो एक समझदार शहंशाह हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल….! लगता है, तुम भी शाही ईरान से मिलकर काफी खुश हुए। क्या तुम उन्हें हमसे बेहतर शहंशाह मानते हो ?

बीरबल बोले अकबर से – हुजूर…..! मैंने सिर्फ ये कहा, वो एक समझदार शहंशाह हैं। और मुझे उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा। मैंने कोई तुलना नहीं की….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तो तुलना क्यों नहीं करते ?

शहंशाह अकबर बोले सुखदेव सिंह से – सुखदेव सिंह जी….! आप ने काफी दूर-दराज की सल्तनतों की सैर की है। बताइये, आपकी नजर में सबसे बेहतर सल्तनत कौन की है ?

सुखदेव सिंह बोला अकबर से – बेशक जहाँपनाह……! ये सल्तनत सबसे बेहतर है। हुजूर…..!

दूसरा मंत्री बोला अकबर से – बिलकुल जहाँपनाह……! मैंने भी काफी सल्तनतें देखी हैं, पर यहाँ मैंने देखा कि, लोग कितने खुश हैं ?

तीसरा मंत्री बोला अकबर से – बिलकुल सही जहाँपनाह……! और क्यों न खुश हो आपके राज्य में ? आप एक इंसाफ पसंद शहंशाह हैं। आप जनता से भारी लगान भी नहीं लेते। आप गरीबों में काफी दौलत भी बांटते हैं। लोग आपके राज्य में खुद को खुश किस्मत समझते हैं। जहाँपनाह……!

सुखदेव सिंह बोला अकबर से – हमारी सेना ताकतवर है। हमारी सेना का हर एक सिपाही इस सल्तनत की रखवाली के लिये अपनी जान तक देने को हिचकिचाता नहीं है। आपके लिये सैनिकों के दिल में इतनी वफ़ादारी है।

दरबार में चौथा मंत्री बोला अकबर से – जहाँपनाह……! ये सबसे बेहतरीन सल्तनत है बेशक….! आप जैसा ताकतवर इंसाफ पसंद शहंशाह न तो पहले कभी था और न कभी आगे होगा।

सुखदेव सिंह बोला अकबर से – जी हुजूर….! मैं भी यही कहुंगा। आप सबसे बेहतर हैं।

और दरबार में सभी मंत्री शहंशाह अकबर को सबसे बेहतरीन बताने लगे…..!

शहंशाह अकबर बोले दरबार में सबसे – शुक्रिया…. शुक्रिया……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! तुमने कुछ नहीं कहा ? तुम क्या सोचते हो ?

बीरबल बोले अकबर से – हुजूर……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हाँ…. हाँ….. बीरबल…..! कहो

बीरबल बोले अकबर से – हुजूर……! मैं, ये नहीं कह सकता कि इससे बेहतर सल्तनत हो नहीं सकती या आपसे बेहतर शहंशाह हो नहीं सकता।

दरबार में चौथा मंत्री बोला बीरबल से – बीरबल…! तुमने तो एक आदत बना ली है। हमेशा सबके खिलाफ बोलने की, खुद को सबसे अलग साबित करने की। अब तो हद कर दी।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हाँ…. बीरबल…..! अगर तुम्हें नहीं लगता कि हमारी सल्तनत सबसे बेहतर है। तो बताओ, कौन सी सल्तनत सबसे बेहतर है ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! फिर दौहराता हूँ। आप बेशक बहुत सबसे बेहतर शहंशाह हैं, पर सबसे बेहतर नहीं। हर किसी इन्सान की तरह, आप में भी खामियां हैं। भगवान ने हम इन्सान को इसी तरह बनाया है। हुजूर…..!

दरबार में पाचवां मंत्री बोला बीरबल से – तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? सबके सामने शहंशाह की बेइज्जती करने की।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! अगर तुम्हे लगता है कि हमारी सल्तनत सबसे बेहतर नहीं है। या हम बेतरीन शहंशाह नहीं हैं, तो हम नहीं चाहते तुम यहाँ रहो। दफा हो जाओ यहाँ से….! खुलेआम हमारी बेइज्जती करने वालों को हम कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते। निकल जाओ यहाँ से…..!

बीरबल बोले अकबर से – जहाँपनाह……! मेरा इरादा बेइज्जती करना या ठेस पहुंचाना नहीं था। मैं सिर्फ ये कह रहा था कि कोई जगह या इन्सान अपने आप में सम्पूर्ण नहीं होते और बेहतर होने की गुंजाइश हमेशा रहती है।

दरबार में छठा मंत्री बोला बीरबल से – पहले तुम शहंशाह को सरे आम बेइज्जत करते हो। और अब तुम्हारी ये जुर्रत कि तुम उन्हें बेहतर होने को कह रहे हो।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! हम तुम्हें और बर्दाश्त नहीं कर सकते। चले जाओ यहाँ से…..!

बीरबल बोला अकबर से – जैसी आपकी मर्जी हुजूर…..!

और बीरबल शहंशाह अकबर के दरबार से चले जाते हैं।

दरबार में चौथा मंत्री बोला शहंशाह अकबर से – आप खुद को परेशान न करें। जहाँपनाह……! इस बार बीरबल ने खुद को अलग साबित करने के लिये अपनी हद पार कर दी। अपने उन्हें निकालकर अच्छा किया।

शहंशाह अकबर बोले चौथे मंत्री से – हाँ….! तुम ठीक कहते हो। हमें परेशान नहीं होना चाहिए। हम बीरबल को बहुत पसंद करते थे और उसे एक समझदार इन्सान समझते थे। मगर उसने हमें निराश किया है।

और शहंशाह अकबर अपनी सभा बंद करके दरबार से घर चले गए।

अगले दिन सुबह शहंशाह अकबर अपने शाही बाग़ में टहल रहे थे। तो सोचने लगे…..! कि कल बीरबल के साथ हमने न इंसाफी की। वो हमसे काफी खफा होगा। हम समझ गए, वो हमसे क्या कहना चाहता था ? और कहने लगे…..! कल हम उसे वापस बुलाएंगे और उसे अच्छा सा तोहफा भी पेश करेंगे। और शहंशाह अकबर सिपाही को आवाज देने लगे…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – जी हुजूर…..!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – बीरबल के घर जाओ और उससे कहो कि वो फ़ौरन दरबार में आये।

उसी दिन एक सिपाही बीरबल के घर से लौटकर दरबार में आया और बोला……!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – आदाब हुजूर…..!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – बताओ…..! कहाँ है बीरबल….?

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह……! उनके घर पर कोई नहीं था। दरवाजे पर ताला लगा था।

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – कहाँ जा सकता है वो ? जाओ और उसे ढूंढकर लाओ। उसके नौकरों को ढूंढकर और उनसे पूछो।

इस तरह बीरबल का पता लगाकर, उसे लेकर ही दरबार में पहुंचना। जाओ जल्दी करो….!

दरबार में चौथा मंत्री बोला अकबर से – जहाँपनाह……! आप बीरबल को वापस बुला रहे हैं।

शहंशाह अकबर बोले चौथे मंत्री से – हाँ….! कल हमसे गलती हो गई थी। हमने बीरबल को निकल जाने को कहा। हमेशा की तरह उसने सच्ची बात कही और हमने उसकी सजा दी।

सिपाही बीरबल और बीरबल के नौकरों का पता लगाकर दरबार में वापस आया और बोला…..!

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – आदाब हुजूर…..!

शहंशाह अकबर बोले सिपाही से – बोलो….! तुम बीरबल को अपने साथ क्यों नहीं लाये ? कहाँ है वो ?

सिपाही बोला शहंशाह अकबर से – ज…ज… जहाँपनाह……! मैंने उनके नौकरों को ढूंढने की कोशिश की। एक मिला भी बाजार में, उसने कहा कि बीरबल अपना सामान बांधकर एक लम्बी यात्रा पर गए हैं। उसे भी नहीं पता कहा….! उसने कहा कि वो काफी लम्बे समय के लिये गए हैं।

शहंशाह अकबर बोले – ओ….! मैंने अपने अजीज दोस्त को काफी गहरी चोट पहुंचाई है। इसलिये वो चला गया।

शहंशाह अकबर ने दरबार में सभा बंद की। और अन्य मंत्री शहंशाह अकबर जिंदाबाद….! के नारे लगाने लगे…..!

शहंशाह अकबर अपने शाही बाग़ में टहल रहे थे, तो बीरबल के बारे में सोचने लगे कि तीन महीने गुजर गए और बीरबल नहीं लौटे। शहंशाह अपने दोस्त की कमी बहुत मह्सूस करने लगे। घर और दरबार में वो बैचेन और काफी उदास रहने लगे। शहंशाह अकबर दरबार में उदास बैठे हुए थे।

तीसरा मंत्री दरबार में बोला अकबर से – ज…ज… जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले तीसरे मंत्री से – हाँ…..! माफ़ कीजिये। हमने बीरबल के साथ जो सुलूक किया है। उसका हमें बहुत पछतावा है।

सुखदेव सिंह बोला अकबर से – हुजूर…..! क्यों न हम अपने दूतों को अलग-अगल शहर भिजवाकर उनके दोस्तों और रिश्तेदारों को उनके वापस आने की ख़बर भेजें।

शहंशाह अकबर बोले सुखदेव सिंह से – नहीं….! हमें नहीं लगता कि वो जबाब देगा। हमें खुद जाकर उसे वापस लेकर आना होगा। इस बार हमने उसे काफी गहरी चोट पहुंचाई है।

सुखदेव सिंह बोला अकबर से – हुजूर…..! हमें पता कैसे चलेगा कि हमें उन्हें कहा ढूंढना है।

शहंशाह अकबर बोले सुखदेव सिंह से – हाँ…..! हम भी वही सोच रहे थे। कई राजा महाराजा उसके दोस्त हैं। वो उन्हीं में से उनके साथ रहता होगा। हम सभी राजाओं को एक ख़ास ख़बर भेजेंगे। जो सिर्फ बीरबल ही समझ सके।

सुखदेव सिंह बोला अकबर से – बहुत खूब, ऐसे अगर कोई भी राजा आपके संदेश का जबाब देगा। तो इसका मतलब बीरबल वहीं है।

शहंशाह अकबर बोले सुखदेव सिंह से – बिलकुल….! और पैगाम क्या होगा ? ये हम बताएँगे।

और शहंशाह अकबर ने विदेशों के राजाओं  को पैगाम भेजा और पैगाम में जो लिखा था। उसको बीरबल ही पढ सकेगा। अन्यथा उसका पैगाम का जबाब बीरबल ही दे सकता है। एक पैगाम ईरान को भेजा था। ईरान के शहंशाह ने पैगाम को देखा तो उनके समझ में नहीं आया। ईरान के शहंशाह ने अपने दूत को पढ़ने को बोला…..!

ईरान का दूत बोला अपने शहंशाह से – मुझे भी ये पैगाम बिलकुल समझ नहीं आ रहा है। जहाँपनाह……!

ईरान के शहंशाह बोले बीरबल से – बीरबल….! शहंशाह अकबर का ये पैगाम तुम्हारी समझ में आ रहा है।

बीरबल ने पैगाम देखा और ईरान शहंशाह के दरबार में पैगाम को पढकर सुनाने लगे – अजीज दोस्त, हमने हमारे शहर के तालाबों का रिश्ता तय किया है। आपकी सल्तनत की नदियों को हम शादी का न्योता देते हैं।

ईरान के शहंशाह बोले बीरबल से – हूँ… हाँ…..! काफी ही अजीब सा पैगाम है। बीरबल….! क्या तुम्हारे समझ में आ रहा है ? कि शहंशाह क्या चाहते हैं ?

बीरबल बोला ईरान के शहंशाह से – हुजूर….! शायद मैं समझ सकता हूँ कि वो क्या कहना चाह रहे हैं ? हम उन्हें जबाब जरुर भेजेंगे।

और बीरबल ने ईरान के शहंशाह को पैगाम बताया और शहंशाह अकबर को पैगाम भेजा….!

शहंशाह अकबर का दूत ने ईरान के पैगाम को पढकर सुनाने लगे – हमारी नदियाँ आपके तालाबों की शादी में आने से बड़ी खुश होंगी। अपने शहर के कुओं से कहिये कि वो शहर के दरवाजे पर उनका स्वागत करें।

शहंशाह अकबर ईरान के पैगाम को सुनकर बोले – बहुत खूब….! ये बीरबल ही है। हम अभी ईरान के लिये रवाना होंगे।

शहंशाह अकबर और सुखदेव सिंह अन्य मंत्री और दूत ईरान पहुचें बीरबल को लेने…..!

बीरबल बोला शहंशाह अकबर से – आदाब हुजूर…..!

और शहंशाह अकबर ने बीरबल को गले लगाकर मिलने लगे और बीरबल को अपने साथ लेकर स्वदेश लौटे…..!

शहंशाह अकबर के दरबार में बीरबल वापस आये तो अन्य मंत्री बोले शहंशाह अकबर जिंदाबाद….! राजा बीरबल जिंदाबाद …..! के नारे लगाने लगे।