अनलजीत सिंह की जीवनी | Analjit Singh Biography in Hindi

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परिचय

अनलजीत सिंह वर्तमान काल में भारतीय व्यापार जगत के एक आत्म प्रेरित एवं अपने व्यापार के प्रति बहुत मेहनत करने वाले अनेक उद्योगपतियों में से एक हैं। अनलजीत सिंह बहुत से नए उद्यमियों के लिए प्रेरणा के स्रोत भी हैं। अनलजीत सिंह ‘मैक्स इंडिया’, ‘मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड’, ‘मैक्स हेल्थकेयर’ और ‘मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस’ के संस्थापक सदस्य और अध्यक्ष भी हैं।

सन 1980 के दशक के बाद ‘मैक्स इंडिया समूह’ के लगातार विकास और सफलता के पीछे अनलजीत सिंह का कुशल नेतृत्व ही है। अनलजीत सिंह का हॉस्पिटैलिटी व्यवसाय दक्षिण अफ्रीका में भी फैला हुआ है। अपने व्यापार विशेषज्ञता के बल पर इन्होंने लगातार बदलते वैश्विक व्यापार के रुझान के अनुरूप अपने को स्थापित किया और अपने व्यवसाय को शीर्ष स्थान पर लाकर खड़ा किया। अनलजीत सिंह आजकल भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संयुक्त भारत-अमेरिका सीईओ फोरम के सदस्य भी हैं। इसके अलावा ये कई देशी-विदेशी संस्थाओं और प्रतिष्ठानों के पद पर नियुक्त हैं।

अनलजीत सिंह की पहचान एक कुशल और गतिशील व्यापारी के रूप में ही नही, बल्कि समाज-सेवा के क्षेत्र में भी अपना योगदान से हैं। इन्होंने ‘मैक्स इंडिया फाउंडेशन’ (MIF) की स्थापना की और उसके सक्रिय अध्यक्ष के रूप में आज भी कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में यह फाउंडेशन ‘एसओएस बाल ग्राम’, ‘मानव सेवा सन्निधि’ और ‘चिन्मय मिशन’ जैसे कई अन्य गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर समाज-सेवा के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रही है।

शुरूआती जीवन

अनलजीत सिंह का जन्म भारत की राजधानी, नई दिल्ली में 11 जनवरी 1954 को एक व्यावसायिक परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम भाई मोहन सिंह है। ये अपने भाइयों में सबसे छोटे हैं। इनकी शुरूआती पढ़ाई देहरादून के ‘दून स्कूल’ से हुई और उसके बाद वाणिज्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के लिए इन्होंने ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में प्रवेश लिया। इसके पश्चात् इन्होंने प्रबंधन में उच्च-शिक्षा (MBA) प्राप्त करने के लिए बोस्टन विश्वविद्यालय, अमेरिका में प्रवेश लिया।

व्यापार की शुरूआती

अनलजीत सिंह अपनी MBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका से भारत वापस आए और सन 1986 में अपने पिता के पारिवारिक दवा कंपनी ‘रैनबैक्सी लैबोरेटरीज’ के व्यापार में मदद करने लगे। हालांकि ‘रैनबैक्सी’ में कम काम होने की वजह से परिवार में ज्यादातर विरोध बना रहता था। परिणामस्वरूप अपने पिता से मतभेदों को खत्म करने के लिए इन्होंने सन 1989 में व्यापार को अलग कर लिया।

अनलजीत सिंह के बड़े भाई परविंदर को ‘रैनबैक्सी लैबोरेटरीज’ दी गई और व्यापार की अचल संपत्ति दोनों छोटे भाइयों मंजीत एवं अनलजीत सिंह को प्राप्त हुई। इनके हिस्से में दिल्ली के ओखला में स्थित एक ऐसा कारखाना आया जो, लगभग बंद पड़ा था। इन्होंने कारखाने के कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना की पेशकश की और उनका भुगतान किया और सन 1992 में इन्होंने हचिसन टेलीकम्युनिकेशंस, हांगकांग, के साथ मिलकर मुंबई में सेलुलर और रेडियो पेजिंग की सेवाओं की शुरुआत की, जिसमें इन्होंने बहुत ही परिश्रम से काम किया। फलस्वरूप 6 वर्षों के छोटे से समय में सन 1998 में इनकी कंपनी को 1,368 करोड़ रुपए की बचत हुई।

इसी वर्ष अनलजीत सिंह का हचिसन के साथ लाइसेंस शुल्क को लेकर कुछ विवाद हुआ और इन्होंने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का 41% भाग हचिसन और कोटक महिंद्रा समूह को बेच दिया। इनका महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व इस उपलब्धि से अभी संतुष्ट नहीं हुआ और ये अपने दूरसंचार के कारोबार का विस्तार करने के लिए और प्रयत्नशील हुए, परन्तु रुपयों के विवाद के चलते कंपनी को बंद करने के अलावा इनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।

इसके बाद सन 1999 में अनलजीत सिंह ने जीवन बीमा और स्वास्थ्य सेवा के व्यापार के क्षेत्र में अपना कदम रखा, यहां इन्हें इस क्षेत्र में एक ऐसा खजाना मिल गया, जिसका इन्होंने कभी अनुमान ही नहीं किया था। सन 2000 में इन्होंने ‘मैक्स न्यूयॉर्क लाइफ इंश्योरेंस’ की स्थापना की। नए व्यापार को बढ़ाने के लिए इन्होंने शुरुआती वर्षों के दौरान अपने पिछली कंपनी की पूंजी को धीरे-धीरे लाभदायक कीमत पर बेच दिया। इन्होंने ‘मैक्स इंडिया लिमिटेड’ कंपनी को अपने दृढ़ विश्वास और कुशल व्यापारिक रणनीति के साथ संचालित करने के लिए भरोसेमंद दृष्टिकोण को अपनाया, इसमें सफलता भी मिली।

इसके बाद अनलजीत सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में भी कार्य करना प्रारंभ किया और आज वे मोहाली (पंजाब) में स्थित ‘इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस’ के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इन्होनें सन 2008 में लंदन की कंपनी ‘बूपा वित्त पीएलसी’ के सहयोग से ‘स्वास्थ्य बीमा योजना’ के क्षेत्र में कार्य करना प्रारम्भ किया। ‘मैक्स इंडिया समूह’ का देश के 275 से अधिक स्थानों पर 440 से अधिक कार्यालय हैं, जिनमें 75,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

दक्षिण अफ्रीका में व्यापार

इन्होंने दक्षिण अफ्रीका के दस्सेनेर्ग की खुबसूरत वादियों में लगभग 40 हेक्टेयर का फार्म हाउस भी विकसित किया है। इस फार्म हाउस को खरीदने से पहले ही ये मुल्लयूक्स और लीउ फेमिली के वाइन के व्यवसाय में शेयर होल्डर बन चुके थे, जो अवार्ड विनर वाइन कंपनी है। अनलजीत सिंह पहले ऐसे भारतीय हैं, जिन्होंने वाइन और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में दक्षिण अफ्रीका में अपनी पूंजी लगाई है। इन्होंने लीउ कलेक्शन के अंतर्गत ‘लीउ एस्टेट’ के नाम से दक्षिण अफ्रीका में हॉस्पिटैलिटी का व्यवसाय शुरू किया है, जिसमें 20 कमरों वाला एक पांच सितारा हाउस, लीउ हाउस और 13 कमरों का बुटीक होटल भी है।

अवार्ड एवं सम्मान

अनलजीत सिंह के व्यवसाय के प्रति कार्यकुशलता, राजनीतिक जागरूकता, समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान के कारण कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों ने इन्हें पुरस्कृत और सम्मानित किया है। ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संयुक्त भारत-अमेरिका सीईओ फोरम के एक सदस्य हैं।

  • अनलजीत सिंह को अमेरिकी सीनेटर ‘हिलेरी क्लिंटन’ द्वारा वैश्विक समुदाय को आधुनिक प्रगतिशील भारत को समझने में मदद करने के लिए, इनके उत्कृष्ट योगदान से प्रेरित होकर ‘भारतीय अमेरिकी केंद्र’ (ISCPA) ने सम्मानित किया है।
  • अनलजीत सिंह भारत में सैन मैरिनो गणराज्य के महावाणिज्य दूत (मानद) हैं। ये भारत के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज आईआईटी रूड़की के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
  • अनलजीत सिंह को सन 1911 में भारत सरकार के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म  भूषण’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।