अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूत निक्की हेली ने इजरायल के प्रति मानवाधिकार परिषद के रवैये पर सवाल उठाये हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वेनेजुएला और ईरान में जब मानवाधिकार का हनन हो रहा था, तब यह काउंसिल चुप थी। ऐसे में इसका सदस्य बने रहने का कोई औचित्य ही नहीं है।

अमेरिका ने UNHRC में कुछ सुधार की अपील की थी, लेकिन उसकी इस मांग पर भी सुनवाई नहीं हुई। अमेरिका का UNHRC में इस बार लगभग डेढ़ साल का कार्यकाल शेष बचा हुआ था, लेकिन उससे पहले ही उसने UNHRC से खुद को अलग कर लिया है।