अमर बोस की जीवनी | Amar Bose Biography in Hindi

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परिचय

अमर बोस भारतीय मूल के अमेरिकी अध्यापक, बिजली अभियंता, उपक्रमी और दुनिया भर में मशहूर ‘बोस कार्पोरशन’ के संस्थापक थे। अमर बोस बिजली और ध्वनि अभियंता, विश्व प्रसिद्ध संस्थान ‘मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान’ (MIT- Massachusetts Institute of Technology) में 45 वर्ष तक प्रोफेसर रहे। उन्होंने सन 2011 में अपनी कंपनी ‘बोस कारपोरेशन’ का एक बड़ा भाग मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) को दान में दे दिया और अपने अविष्कारों से संगीत की दुनिया बदल डाली। धीरे-धीरे उनकी कंपनी के बनाये स्पीकरों ने स्टीरियो स्पीकर बाज़ार में नए आयाम स्थापित किये और लोगों को ऐसी ध्वनि दी, जो उससे पहले के स्टीरियो स्पीकर्स में मौजूद नहीं थी। अपने ध्वनि अनुसन्धान के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पेटेंट्स भी अर्जित किये।

शुरूआती जीवन

अमर बोस का जन्म 2 नवम्बर 1929 को अमेरिका के फिलाडेल्फिया में हुआ था। इनके पिता का नाम ‘नोनी गोपाल बोस’ था, वे एक बंगाली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे और अंग्रेजों से बचकर अमेरिका चले गए थे। उनकी माता का नाम ‘शेर्लोट बोस’ था, वे फ्रेंच और जर्मन मूल की अमेरिकी थीं, वे पेशे से एक शिक्षिका थीं। अमर बोस ने बचपन से ही उद्यमशीलता में रूचि दिखाई थी। उन्होंने पेनसिलवेनिया के ‘अबिंगटन सीनियर हाई स्कूल’ में पढ़ाई की और उसके बाद मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश लिया। वहां से उन्होंने 1950 के दशक के शुरुआत में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय में BS पास किया।

इसके बाद अमर बोस ने  करीब 1 वर्ष तक नेदरलैंड्स में ‘NV फिलिप्स इलेक्ट्रोनिक्स’ के लैब में काम किया और फिर फुलब्राइट छात्रवृत्ति पर भारत में काम किया, जहाँ उनकी मुलाकात ‘प्रेमा बोस’ से हुई। अमर बोस की शादी प्रेमा बोस के साथ हुई और उनसे उन्हें दो संताने प्राप्त हुईं- वनु और माया। बाद में अमर बोस और प्रेमा बोस दोनों अलग हो गए। वनु बोस एक कंपनी ‘वनु’ के संस्थापक और CEO हैं। उन्होंने ‘नोर्बेर्ट वीनर’ और ‘युक-विंग-ली’ के मार्गदर्शन में मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान से ही अपनी PHD की पढ़ाई भी पूरी की।

करियर

अमर बोस स्नातक करने के बाद मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चुने गए। अमर बोस ने प्रोफेसर बनने के प्रारम्भिक वर्षों में एक उच्च-दर्जे का स्टीरियो स्पीकर सिस्टम खरीदा। उन्होंने जब उसे बजाया तो वे बहुत उदास हुए क्योंकि उच्च तकनीक क्षमताओं के बावजूद भी यह स्टीरियो ‘लाइव परफॉरमेंस’ का प्रभाव नहीं दे पाया। इस घटना ने उन्हें ‘स्टीरियो टेक्नोलॉजी’ के क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्होंने उस समय के उच्च तकनीक क्षमताओं वाले स्टीरियो स्पीकर्स का अध्ययन कर उनमें मौजूद खामियों को समझा।

‘एकॉस्टिक्स’ के क्षेत्र में उनके अनुसन्धान ने उन्हें एक ऐसे ‘स्टीरियो लाउडस्पीकर’ की खोज में मदद की, जो घर के वातावरण में ही एक सभागार जैसी ध्वनि उत्पन्न कर सकता था। इस प्रकार उनका ध्यान ‘साइकोएकॉस्टिक्स’ पर केन्द्रित हुआ, जो आगे चलकर उनकी कंपनी के उत्पादों की विशिष्टता बना।

सन 1964 में उन्हें अपनी कंपनी के लिए प्रारम्भिक पूँजी की जरुरत हुई, जिसके लिए उन्होंने अपने पूर्व प्रोफेसर डॉ ‘युक-विंग-ली’ का सहयोग लिया। इसके बाद अमर बोस को कई महत्वपूर्ण पेटेंट्स प्रदान किये गए, जो आज भी ‘बोस कारपोरेशन’ के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये सारे पेटेंट्स ‘लाउडस्पीकर डिजाईन, नॉन-लीनियर, टू-स्टेट-मोडयूलेटेड, क्लास-डी पॉवर प्रोसेसिंग के क्षेत्र से सम्बंधित थे।

‘बोस कारपोरेशन’ में विश्व भर में करीब 90 हजार लोगों को रोज़गार प्रदान करता है और घरों, कारों और प्रोफेशनल ऑडियो के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाता है। इसके साथ-साथ यह एकॉस्टिक्स और उससे सम्बंधित क्षेत्र में आधारभूत अनुसन्धान भी करता है। अमर बोस ने अपनी कंपनी को कभी भी ‘सार्वजनिक’ नहीं किया, यही कारण था कि वो लम्बे समय तक जोखिम भरे अनुसन्धान कर पाए।

सन 2004 में उन्होंने ‘पॉपुलर साइंस’ पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में कहा- “अगर मैं MBA किये हुए लोगों द्वारा चलाये जानी वाली कंपनी में काम करता, तो शायद सैकड़ों बार निकाला जा चुका होता, मैंने यह व्यापार पैसा कमाने के लिए नहीं किया था, बल्कि इसलिए किया कि ऐसी मजेदार चीज़ें कोजान सके, जो पहले नहीं हुई हों।”

1980 के दशक में बोस कारपोरेशन ने एक ऐसा उत्पाद बनाया, जिसने वाहन उद्योग में उपयोग होने वाले ‘शॉक एब्जोर्बर्स’ को प्रतिस्थापित कर दिया। इस महत्वपूर्ण खोज ने वाहनों के ‘सस्पेंशन प्रणाली’ के कार्य-सम्पादन को और उत्तम बना दिया।

सन 2007 में फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में 271वें स्थान पर रखा। सन 2009 में वे फ़ोर्ब्स के ‘अरबपति’ सूची से बाहर हो गए पर सन 2011 में लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति के साथ इस सूची में वापस आ गए।

विरासत

अमर बोस अपनी कंपनी बोस कारपोरेशन चलाने के साथ-साथ सन 2001 तक MIT में प्रोफेसर भी रहे और अध्यापन कार्य किया। सन 1963-64 में उन्हें ‘बेकर अवार्ड फॉर टीचिंग’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भी उन्हें कई सारे शैक्षिक सम्मान दिए गए। MIT स्कूल ऑफ़ इंजिनीरिंग में उनके उत्कृष्ट शिक्षण के लिए उनके सम्मान में ‘द बोस अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन टीचिंग’ (1989) और बाद में ‘जूनियर बोस अवार्ड’ स्थापित किये गए।

सन 2011 में अमर बोस ने अपनी कंपनी के अधिकांश नॉन-वोटिंग शेयर्स MIT को दान कर दिए। चूँकि ये शेयर्स नॉन-वोटिंग हैं, इसलिए MIT बोस कारपोरेशन के संचालन में हिस्सा नहीं ले सकती।

सम्मान एवं अवार्ड

  • उन्हें सन 1972 में IEEE ने लाउडस्पीकर डिजाईन, टू-स्टेट एम्पलीफायर-मोड्यूलेटर्स और नॉन-लीनियर सिस्टम्स के विकास में योगदान के लिए फ़ेलोशिप प्रदान किया।
  • ऑडियो इंजीनियरिंग सोसाइटी ने उन्हें सन 1985 में मानद सदस्यता प्रदान की।
  • IEEE ने ‘वोल्फसन जेम्स क्लर्क मैक्सवेल अवार्ड’ से सन 2010 में सम्मानित किया।
  • MIT 50 लिस्ट (150 इन्नोवेटर्स एंड आइडियाज फ्रॉम MIT) में उन्हें सन 2011 में 9वां स्थान दिया गया।
  • उन्हें सन 2014 में ‘बेरिलियम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ दिया गया।
  • सन 2015 में द एशियन अवार्ड्स ‘फाउंडर्स अवार्ड’ दिया गया।

मृत्यु

अमर बोस इस दुनियां से 12 जुलाई 2013 को वेलैंड (मैसाचुसेट्स) में विदा हो गए।