परिचय

अलाउद्दीन खिलजी खिलजी वंश का दूसरा शासक था। यह खिलजी वंश के सबसे पहले शासक जलालउद्दीन खिलजी का भतीजा और दामाद था और अपने खिलजी वंश का सबसे ताकतवर सुल्तान माना जाता था। इसका वास्तविक नाम अली गुरशास्प था। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा जलालउद्दीन खिलजी की बेटी मलिका-ए-जहाँ से शादी की। यह निर्दयी और क्रूर शासक था। सन. 1296 में 46 साल की उम्र में सुल्तान बना और लगभग 20 साल तक राज किया। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन काल में अपना साम्राज्य दक्षिण भारत के मदुरै तक फैला दिया था। इसके बाद अगले 300 सालों तक इतना बड़ा भारतीय साम्राज्य कोई भी शासक स्थापित नहीं कर सका। उसने भारत के राज्यों को जीतकर अपने अधीन कर लिया और उन पर शासन किया तथा उनसे वार्षिक कर वसूला करता था। उसको सिकंदर-आई-सनी का ख़िताब दिया गया था। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने राज्य में शराब पर रोक लगा दी थी। इसने अलाई दरवाजा बनवाया था और सुल्तान खिलजी वार्षिक कर लागू करने के लिए प्रसिद्ध था। अलाउद्दीन खिलजी रानी पद्मावती की सुन्दरता पर मोहित था। अलाउद्दीन खिलजी की तीन संतानें थीं कुतबुद्दीन मुबारक शाह, शादी खान और शाहबुद्दीन उमर।

जन्म व बचपन

अलाउद्दीन खिलजी का जन्म सन. 1250 में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी का बचपन का नाम अली गुरशास्प था। इनके पिता का नाम शाहबुद्दीन मसूद था और इनके चाचा का नाम जलालउद्दीन खिलजी था। बचपन से ही अलाउद्दीन खिलजी को अच्छी शिक्षा नहीं मिली थी, लेकिन वह बहुत ही शक्तिशाली योद्धा था।

जीवन कार्य

अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का दूसरा शासक था। दिल्ली सल्तनत के पहले शासक जलालउद्दीन खिलजी थे। इनके तख्त पर बैठने के बाद अलाउद्दीन खिजली को अमीर-ए-तुजुक का पद मिला। उसके बाद मलिक छज्जू के विद्रोह को दबाने में भूमिका निभाने के कारण उनको कडा-मनिकपुर की सूबेदारी का पद मिला। सफल अभियानों से प्राप्त धन से उसकी स्थिति और भी मजबूत हो गई। इस प्रकार उसने अपने चाचा या ससुर जलालउद्दीन खिलजी से गले मिलते समय अपने दो सैनिकों के साथ मिलकर उनकी हत्या करवा दी और अलाउद्दीन खिलजी ने अपने आप को दिल्ली का सुल्तान घोषित कर दिया और लालमहल में अपना राज्यभिषेक सम्पन्न करवाया। अलाउद्दीन खिलजी ने गद्दी पर बैठते ही अपने राज्य की सीमाओं को फैलाना शुरू कर दिया। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने जलालउद्दीन के वफादार सरदारों को खरीद लिया और जो नहीं माने उनका कत्ल करवा दिया। अलाउद्दीन खिलजी ने उत्तर भारत के राज्यों को अपने अधीन कर उनसे वार्षिक कर वसूलता था। अलाउद्दीन खिलजी ने सन. 1298 में उलूग खां और नुसरत खां को गुजरात पर विजय करने क लिए भेजा, दोनों सेनाओं में संघर्ष हुआ, राजा कर्ण पराजित होकर अपनी पुत्री देवल देवी को लेकर भाग गया। अलाउद्दीन खिलजी राजा कर्ण की सारी संपत्ति और उसकी पत्नी कमला देवी को साथ लेकर वापस दिल्ली आ गया और उससे विवाह कर लिया।

जैसलमेर के शासक दूदा और उसके सहयोगी तिलक सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी की सेना से कुछ घोड़े छीन लिए, जिसके कारण सुल्तान खिलजी ने सन. 1299में उनको पराजित करके जैसलमेर पर विजय प्राप्त की। सन. 1301 में अलाउद्दीन खिलजी ने हम्मीर देव को हराकर रणथम्भौर के किले को अपने कब्जे में कर लिया।

चित्तौड़ का किला एक सुरक्षित स्थान पर बना हुआ था। उस किले को पाने के लिए और राजा रतन सिंह की पत्नी रानी पद्मावती की सुन्दरता पर मोहित होकर पद्मावती को पाने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने सन. 1303 में चितौड़ पर आक्रमण कर दिया। दोनों सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ जिसमें राजा रतन सिंह शहीद हो गए और अलाउद्दीन खिलजी ने युद्ध जीतकर किले पर कब्जा कर लिया। उसके बाद वह पद्मावती को पाने के लिए पहुंचा तो तब तक रानी पद्मावती ने अन्य राजपूत महिलाओं के साथ जौहर (राजपूत प्रथा के अनुसार अग्नि कुंड में कूदना) में प्रवेश कर लिया। अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ का नाम खिज्र खां के नाम पर खिज्राबाद रखा और खिज्र खां को सौंप कर वापस दिल्ली आ गया।

सन. 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने मुल्तान के सूबेदार आईन-उल-मुल्क को मालवा को अपने अधीन करने के लिए भेजा। मालवा पर शासन करने वाले राजा महलक देव की सेना और सुल्तान खिलजी की सेना में युद्ध हुआ जिसमें महलक देव मारा गया और खिलजी ने किले पर अधिकार के साथ उज्जैन, धारानगरी आदि को मालवा समेत दिल्ली सल्तनत में मिला लिया। सन. 1308 में अलाउद्दीन ने सिवाना के शासक शीतल देव को हराकर वहां का शासक कमालुद्दीन गुर्ग को नियुक्त किया।

सन. 1304 में अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर पर आक्रमण करवाया और वहां के शासक कान्हण देव ने सुल्तान खिलजी की अधीनता स्वीकार कर ली। इस प्रकार अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर को अपने अधीन कर राजस्थान पर विजय का कार्य पूरा कर दक्षिण भारत की ओर अपना रुख किया। अलाउद्दीन खिलजी की दक्षिण भारत के राज्यों को जीतने के पीछे धन और विजय की लालसा थी, उसने वहां पर कई राज्यों को अपने अधिकार में लिया और उन राज्यों से वार्षिक कर वसूला करता था।

मृत्यु

सन. 1316 में अलाउद्दीन खिलजी की जलोदर रोग होने से मृत्यु में हो गई।