आरती

आरती हिन्दू धर्म में पूजा करने की एक विधि है| किसी भी प्रकार की पूजा में अगर कोई गलती हो जाए तो आरती करने से पूजा में पूर्णता आ जाती है| आरती करने के लिए घी, तेल या कपूर के दिये की आवश्यकता होती है, जिसे कि एक विशेष तरीके से पूजनीय भगवान या माता के सामने घुमाया जाता है|

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥ जयति जय गायत्री माता... आदि शक्ति तुम अलख निरञ्जन जग पालन कर्त्री। दुःख, शोक, भय, क्लेश, कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री॥ जयति जय गायत्री माता... ब्रहृ रुपिणी, प्रणत पालिनी, जगतधातृ अम्बे। भवभयहारी, जनहितकारी, सुखदा जगदम्बे॥ जयति जय गायत्री माता... भयहारिणि भवतारिणि अनघे, अज...
ॐ जय गौरी नंदा, प्रभु जय गौरी नंदा, गणपति आनंद कंदा, गणपति आनंद कंदा, मैं चरणन वंदा, ॐ जय गौरी नंदा ।। (x2) सूंड सूंडालों नयन विशालो, कुण्डल झलकंता, कुमकुम केसर चन्दन, सिंदूर बदन वंदा, ॐ जय गौरी नंदा ।। ॐ जय गौरी नंदा, प्रभु जय गौरी नंदा, गणपति आनंद कंदा, गणपति आनंद कंदा, मैं चरणन वंदा,...
ऊँ जय जय गौमाता, देवी जय जय गौमाता । मंगल मुक्ति प्रदायिनी, जन्म मरण त्राता ।। ऊँ जय जय गौमाता… (x2) गुरू वशिष्ट की सेवा, नंदनी चित लायी । कामधेनु से हारे, सैनिक समुदायी ।। ऊँ जय जय गौमाता… ब्रहमा विष्णू विराजे, शिव तन पर धारे । गौमुख निकसी गंगा, काज सकल सारे ।। ऊँ जय जय...
जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता । जो नर तुमको ध्याता, मन वांशित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता... चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी, जल निर्मल आता । शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता... पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन...
चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जन को तारो भोली माँ जन को तारो भोली माँ, काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा सिंह पर भई असवार, भोली माँ चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जन को तारो भोली माँ एक हाथ खड़ग दूजे मे खाडा, तीजे त्रिशूल सम्भालो चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जन को तारो भोली माँ चोथे हाथ...
जय चिंतपूर्णी माता, मैया जय चिंतपूर्णी माता । चिंता मेरी हर लो, सुख की वरदाता ।। मैया जय चिंतपूर्णी माता… (x2) सती के शुभ चरणों पर, मंदिर है भारी । छिन्न मस्तिका कहते, तुमको संसारी ।। मैया जय चिंतपूर्णी माता… ऊंचा भवन है न्यारा, झंडे झूल रहे । कोयल जय मां गाती, पक्षी बोल रहे ।। मैया...
ऊँ जय बृहस्पति देवा, गुरू बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा॥ (x2) तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा॥ चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता। सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा॥ तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े। प्रभु...
ऊँ जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा | सुर नर मुनि सब करते, प्रभु तुम्हरी सेवा || ऊँ जय भैरव देवा… (x2) तुम ही पाप उद्धारक, दुख सिन्धु तारक | भक्तों से सुखकारक, भीषण वपु धारक || ऊँ जय भैरव देवा… वाहन श्वान विराजत, कर त्रिशूल धारी | महिमा अमित तुम्हारी, जय जय भयहारी || ऊँ...
श्री भागवत भगवान की है आरती पापियों को पाप से है तारती (x2) ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ, ये पंचम वेद निराला, नव ज्योति जलाने वाला। (x2) हरी नाम यही, हरी धाम यही, यही जग मंगल की आरती पापियों को पाप से है तारती॥ श्री भागवत भगवान की है आरती पापियों को पाप से है तारती (x2) ये...
पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम्। निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्। (x2) शेष सुमिरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम्। वेद ब्रहमा करत स्तुति श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्। (x2) शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम्। जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्। (x2) इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर धूप दीप प्रकाशितम्। सिद्ध मुनिजन करत...

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