आरती

आरती हिन्दू धर्म में पूजा करने की एक विधि है| किसी भी प्रकार की पूजा में अगर कोई गलती हो जाए तो आरती करने से पूजा में पूर्णता आ जाती है| आरती करने के लिए घी, तेल या कपूर के दिये की आवश्यकता होती है, जिसे कि एक विशेष तरीके से पूजनीय भगवान या माता के सामने घुमाया जाता है|

जय जय शनिदेव महाराज। जन के संकट हरने वाले।। (x2) तुम सूर्य पुत्र बलिधारी, भय मानत दुनिया सारी तुम सूर्य पुत्र बलिधारी, भय मानत दुनिया सारी साधत हो दुर्लभ काज जय जय शनिदेव महाराज। जन के संकट हरने वाले।। (x2) तुम धर्मराज के भाई, जब क्रुरता पाई तुम धर्मराज के भाई, जब क्रुरता पाई घन गर्जन करते आवाज जय...
हरी ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो शताक्षी दयालु की आरती कीजो ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो तुम परिपूर्ण आदि भवानी, सब घट-घट तुम आप बखानी ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो तुम्ही हो शाकुम्भर, तुम ही हो सताक्षी...
ऊँ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय जय सरस्वती माता॥ (x2) चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय जय सरस्वती माता॥ बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ जय जय सरस्वती माता॥ देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा...
जय संतोषी माता, मैया संतोषी माता | अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता || जय संतोषी माता… (x2) सुन्दर चीर सुनहरी माँ, धारण कीन्हों | हीरा पन्ना दमके, तन श्रंगार लीन्हों || गेरु लाल घटा छवि, बदन कमल सोहे | मन्द हँसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे || स्वर्ण सिंहासन बैठी, चँवर ढूरे प्यारे | धुप, दीप,...
ऊँ जय साईं नाथ, जय साईं नाथ आदि न अंत तुम्हारा, तुम्हें श्रद्धा नमन हमारा (2) धरती पर रहकर प्रभु तुमने तन अमबर तक विस्तारा ऊँ जय साईं नाथ, जय साईं नाथ आदि न अंत तुम्हारा, तुम्हें श्रद्धा नमन हमारा ईश्वरीय आलोक लिए प्रभु मानव रूप धरे हो चमत्कार ही चमत्कार से तुम सम्पूर्ण भरे हो चमत्कार...
आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद। बालमीक विज्ञान विशारद। शुक सनकादि शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ सन्तन गावत शम्भू भवानी। अरु घट सम्भव मुनि विज्ञानी। व्यास आदि कविबर्ज बखानी। कागभुषुण्डि गरुड़ के ही की॥ आरती श्री रामायण...
ॐ जय श्री राधा, जय श्री कृष्ण श्री राधा कृष्णाय नमः  श्री राधा कृष्णाय नमः (x2) चन्द्रमुखी चंचल चितचोरी, सुघड़ सांवरा सूरत भोरी श्यामा श्याम एक सी जोड़ी श्री राधा कृष्णाय नमः.. ॐ जय श्री राधा, जय श्री कृष्ण श्री राधा कृष्णाय नमः  श्री राधा कृष्णाय नमः पंच रंग चूनर, केसर न्यारी, पट पीताम्बर, कामर...
जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रम्हा सनातन देवी शुभ फल की दाता || जय पार्वती माता || अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता || जय पार्वती माता || सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा देव बंधु जस गावत नृत्य करत ताथा || जय पार्वती माता || सतयुग...
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निस दिन सेवत, हर विष्णु धाता ॥ ॐ जय...॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय...॥ दुर्गारूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता ॥ ॐ जय...॥ तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता। कर्म प्रभाव...
आरती कीजे शैल सुता की जगदम्बा की, स्नेह सुधा सुख सुन्दर लीजै, जिनके नाम लेत दृग भीजै, ऐसी वह माता वसुधा की आरती कीजे शैल सुता की जगदम्बा की, || आरती कीजे || पाप विनाशिनी कलि मॉल हारिणी, दयामयी भवसागर तारिणी शस्त्र धारिणी शैल विहारिणी, बुधिराशी गणपति माता की आरती कीजे शैल सुता की...

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