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आरती

आरती हिन्दू धर्म में पूजा करने की एक विधि है| किसी भी प्रकार की पूजा में अगर कोई गलती हो जाए तो आरती करने से पूजा में पूर्णता आ जाती है| आरती करने के लिए घी, तेल या कपूर के दिये की आवश्यकता होती है, जिसे कि एक विशेष तरीके से पूजनीय भगवान या माता के सामने घुमाया जाता है|

जय संतोषी माता, मैया संतोषी माता | अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता || जय संतोषी माता… (x2) सुन्दर चीर सुनहरी माँ, धारण कीन्हों | हीरा पन्ना दमके, तन श्रंगार लीन्हों || गेरु लाल घटा छवि, बदन कमल सोहे | मन्द हँसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे || स्वर्ण सिंहासन बैठी, चँवर ढूरे प्यारे | धुप, दीप,...
!! जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी, सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी !! !! श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी, नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी !! !! क्रीट मुकुट शीश रजित...
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्। श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्। नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्। श्री राम, श्री राम… कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्। कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्। पट पीत मानहुं...
हरी ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो शताक्षी दयालु की आरती कीजो ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो तुम परिपूर्ण आदि भवानी, सब घट-घट तुम आप बखानी ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो तुम्ही हो शाकुम्भर, तुम ही हो सताक्षी...
ऊँ जय जय गौमाता, देवी जय जय गौमाता । मंगल मुक्ति प्रदायिनी, जन्म मरण त्राता ।। ऊँ जय जय गौमाता… (x2) गुरू वशिष्ट की सेवा, नंदनी चित लायी । कामधेनु से हारे, सैनिक समुदायी ।। ऊँ जय जय गौमाता… ब्रहमा विष्णू विराजे, शिव तन पर धारे । गौमुख निकसी गंगा, काज सकल सारे ।। ऊँ जय जय...
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥ जयति जय गायत्री माता... आदि शक्ति तुम अलख निरञ्जन जग पालन कर्त्री। दुःख, शोक, भय, क्लेश, कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री॥ जयति जय गायत्री माता... ब्रहृ रुपिणी, प्रणत पालिनी, जगतधातृ अम्बे। भवभयहारी, जनहितकारी, सुखदा जगदम्बे॥ जयति जय गायत्री माता... भयहारिणि भवतारिणि अनघे, अज...
ऊँ जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा | सुर नर मुनि सब करते, प्रभु तुम्हरी सेवा || ऊँ जय भैरव देवा… (x2) तुम ही पाप उद्धारक, दुख सिन्धु तारक | भक्तों से सुखकारक, भीषण वपु धारक || ऊँ जय भैरव देवा… वाहन श्वान विराजत, कर त्रिशूल धारी | महिमा अमित तुम्हारी, जय जय भयहारी || ऊँ...
जय जय शनिदेव महाराज। जन के संकट हरने वाले।। (x2) तुम सूर्य पुत्र बलिधारी, भय मानत दुनिया सारी तुम सूर्य पुत्र बलिधारी, भय मानत दुनिया सारी साधत हो दुर्लभ काज जय जय शनिदेव महाराज। जन के संकट हरने वाले।। (x2) तुम धर्मराज के भाई, जब क्रुरता पाई तुम धर्मराज के भाई, जब क्रुरता पाई घन गर्जन करते आवाज जय...
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा… आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया। जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा… ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई। ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि...
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे। (x2) जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ...

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