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आरती

आरती हिन्दू धर्म में पूजा करने की एक विधि है| किसी भी प्रकार की पूजा में अगर कोई गलती हो जाए तो आरती करने से पूजा में पूर्णता आ जाती है| आरती करने के लिए घी, तेल या कपूर के दिये की आवश्यकता होती है, जिसे कि एक विशेष तरीके से पूजनीय भगवान या माता के सामने घुमाया जाता है|

आरती युगलकिशोर की कीजै | तन मन धन न्योछावर कीजै || (x2) गौरश्याम मुख निरखत रीजे | प्रेम स्वरुप नयन भरि पीजै || रवि शशि कोटि बदन की शोभा | ताहि निरखि मेरो मन लोभा || आरती युगलकिशोर की कीजै | तन मन धन न्योछावर कीजै || (x2) मोर मुकुट कर मुरली सोहे | नटवर वेश निरख मन...
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा ॥1॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा… आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया। जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥2॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा… ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई। ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि...
सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी | कोई तेरा पार ना पाया || पान सुपारी ध्वजा नारियल | ले तेरी भेंट चढ़ाया || साड़ी-चोली तेरी अंग विराजे | केसर तिलक लगाया || ब्रम्हा वेद पढ़ें तेरे द्वारे | शंकर ध्यान लगाया || नंगे- नंगे पग से तेरे| सम्मुख अकबर आया || सोने का छत्र चढ़ाया | नीचे महल बनाया || धूप दीप...
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।  हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता।। शीश पे छत्र विराजे, मूर्तिया प्यारी।  गंगा बहती चरणन , ज्योति जागे न्यारी।। ब्रह्मावेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक छँवर ढुलावत , नारद नृत्य करे।। सुंदर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार बार देखन को, यह माँ मान चावे।। भवन...
जय जय जय तुलसी माता, जय जय जय तुलसी माता। सब जग की सुखदाता वरदाता। सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर, रुज से रक्षा करके भव त्राता। जय जय जय तुलसी माता। बटु पुत्री है श्यामा, सूर वल्ली है ग्राम्या, विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता। जय जय जय तुलसी माता। हरि के...
जय जय जय रविदेव, प्रभु जय जय जय रविदेव। रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता॥ प्रभु जय जय जय रविदेव… (x2) षटपद मन मुदकारी, हे दिनमणि दाता। जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव॥ प्रभु जय जय जय रविदेव… नभमंडल के वासी, तुम ज्योति देवा। निज जन हित सुखरासी, तेरी हम सब सेवा॥ प्रभु जय जय जय रविदेव… करते...
!! जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी, सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी !! !! श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी, नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी !! !! क्रीट मुकुट शीश रजित...
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। (x2) तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। तेरे कानन कुंडल सोहे रहेओ, तेरी ठोड़ी पे हीरा लाल। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट...
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं, हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं। आरती गाऊं प्यारे तुमको रिझाऊं, श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं॥ मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे। प्यारी बंसी मेरो मन मोहे। देख छवि बलिहारी मैं जाऊं। श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं॥ चरणों से निकली गंगा प्यारी, जिसने सारी दुनिया तारी। मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं। श्री...
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ (x2) एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। चंदन मृग मध्य चंदा भोले शुभकारी॥ ॐ जय शिव...

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