ताप्ती नदी | Tapti River in Hindi

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ताप्ती नदी पश्चिमी भारत की प्रसिद्ध नदी है। यह मध्य प्रदेश राज्य के ‘बैतूल’ जिले के ‘मुलताई’ नामक शहर से निकलकर सतपुड़ा पर्वतप्रक्षेपों के मध्य से पश्चिम की ओर बहती हुई महाराष्ट्र के खानदेश के पठार एवं सूरत के मैदान को पार करती हुई अरब सागर में गिरती है। ताप्ती नदी का उद्गम स्थल मुल्ताई शहर से है। यह भारत की उन मुख्य नदियों में है, जो पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती हैं। यह नदी पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 740 किलोमीटर की दूरी तक बहती है और खम्बात की खाड़ी में जाकर मिलती है। सूरत का बन्दरगाह इसी नदी के किनारे पर स्थित है। इसकी मुख्य सहायक नदी का नाम पूर्णा है।

ताप्ती नदी को सूर्यपुत्री भी कहा जाता है और समुद्र के निकट इसकी 32 मील की लंबाई में ज्वार आता है। हिन्दू धर्म के अनुसार ताप्ती को सूर्य एवं उनकी पत्नी छाया की पुत्री माना जाता है और ये शनि की बहन है। थाईलैंड की तापी नदी का नाम भी अगस्त 1915 में भारत की इसी ताप्ती नदी के नाम पर ही रखा गया है। महाभारत, स्कंद पुराण एवं भविष्य पुराण में ताप्ती नदी की महिमा कई स्थानों पर बतायी गई है। ताप्ती नदी का विवाह संवरण नाम के राजा के साथ हुआ था, जो वरुण देवता के अवतार थे।

नदी घाटी और सहायक नदियाँ  

ताप्ती नदी की घाटी का विस्तार कुल 65,145 किलोमीटर में है, जो भारत के कुल क्षेत्रफ़ल का 2 % है। यह घाटी महाराष्ट्र में 51,504 किलोमीटर, मध्य प्रदेश में 9,804 किलोमीटर एवं गुजरात में 3,837 किलोमीटर है। ये घाटी महाराष्ट्र उत्तरी एवं पूर्वी जिलों जैसे- अमरावती, अकोला, बुल्ढाना, वाशिम, जलगांव, धुले, नंदुरबार एवं नासिक में फ़ैली है, साथ ही मध्य प्रदेश के बैतूल और बुरहानपुर तथा गुजरात के सूरत एवं तापी जिलों में इसका विस्तार है। इसके जलग्रहण क्षेत्र का 79 प्रतिशत गुजरात शेष मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्य में पड़ता है। ताप्ती नदी की मुख्य सहायक नदियाँ मिन्धोला, गिरना, पन्जारा, वाघूर, बोरी एवं आनेर है, इनके आलावा और भी अनेक छोटी-छोटी सहायक नदिया हैं।

दर्शनीय स्थल

मध्य प्रदेश राज्य में मुल्ताई, नेपानगर, बैतूल और बुरहानपुर तथा भुसावल महाराष्ट्र्र में एवं सूरत और सोनगढ़ गुजरात आदि, ताप्ती नदी के किनारे पर प्रमुख शहर स्थित हैं, ताप्ती नदी पर प्रमुख मार्ग सेतुओं में धुले के सवालदे का राष्ट्रीय राजमार्ग- 3 एवं भुसावल-खंडवा रेलमार्ग का भुसावल रेल सेतु, जो मध्य रेलवे में आता है। इस नदी पर महाराष्ट्र राज्य के जलगांव शहर में हथनूर बांध एवं सोनगढ़ में उकई बांध भी बने हैं।

सूरत एवं कमरेज में 3 सेतु तथा राष्ट्रीय राजमार्ग- 8 पर सूरत सहित 10 सेतु बने हैं, जिनमें से दो का निर्माण कार्य अधूरा है। इनमें से एक गुजरात में रज्जु सेतु भी है। इनके अलावा प्रकाशा और सारंगखेड़ा के पास शहादा में छोटे-छोटे बैराज भी बने हैं। प्रकाशा एक पवित्र हिदू तीर्थ स्थल भी है, जो ताप्ती नदी के तट के निकट स्थित है और यहां भगवान शिव का एक मन्दिर, केदारेश्वर स्थित है। यह इस क्षेत्र का प्रसिद्ध स्थान है।

इनके अलावा तटवर्ती अन्य महत्त्वपूर्ण स्थानों में अमरावती जिले का मेलघाट बाघ रिज़र्व नदी के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है। यह बाघ परियोजना (प्रोजेक्ट टाइगर) के अन्तर्गत्त आता है और महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। इनके साथ ही बुरहानपुर के निकट ही ऐतिहासिक असीरगढ़ दुर्ग भी स्थित है, जिसे दक्खिन की कुंजी भी कहा जाता है। जलगांव में चांगदेव महाराज का एक मन्दिर भी स्थित है।

ताप्ती नदी के सात कुण्ड

ताप्ती नदी के मूलस्थान मुल्तापी में एवं उसके सीमावर्ती क्षेत्र में सात कुण्ड अलग-अलग नामों से बने हुए हैं और उनके बारे में विभिन्न कहानियां प्रचलित है-

सूर्यकुण्डसूर्यकुण्ड में भगवान सूर्य ने स्वंय स्नान किया था।

ताप्ती कुण्डसूर्य के तेज प्रकोप से पशु पक्षी नर किन्नर देव दानव आदि की रक्षा करने हेतु ताप्ती माता की पसीने के तीन बूंदे  के रूप में आकाश धरती और फ़िर पाताल पहुंची। तभी एक बूंद इस कुण्ड में पहुंची और बहती हुई आगे नदी रूप बन गई।

धर्म कुण्डधर्म कुण्ड में धर्मराज या यमराज ने स्वंय स्नान किया था।

पाप कुण्डपाप कुण्ड में सच्चे मन से पापी मनुष्य सूर्यपुत्री का ध्यान करके स्नान करता है, तो उसके पाप इस कुण्ड में स्नान करने से धुल जाते हैं।

नारद कुण्डदेवर्षि नारद ने नारद कुण्ड पर श्राप रूप में हुए कोढ के रोग से मुक्ति पाई थी एवं बारह वर्षो तक मां ताप्ती की तपस्या करके उनसे वर मांगा था। उसी से उन्हें पुराण की चोरी के कारण कोढ़ के श्राप से मुक्ति मिल पाई।

शनि कुण्डशनिदेव अपनी बहन ताप्ती के घर पर आने पर इसी कुण्ड में स्नान करने के बाद उनसे मिलने गए थे। इस कुण्ड में स्नान करके मनुष्य को शनि दशा से लाभ मिलता है।

नागा बाबा कुण्डयह नागा सम्प्रदाय के बाबाओं का कुण्ड है, जिन्होंने नागा बाबा कुण्ड के तट पर घोर तपस्या करके भगवान शिव को खुश किया था। इस कुण्ड के निकट स्वेत जनेउ धारी शिवलिंग भी है।