जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा की जीवनी | Jehangir Ratanji Dadabhoy Tata Biography in Hindi

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परिचय

भारत के मशहूर उद्योगपति ‘जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा’, ‘जे.आर.डी टाटा’ के नाम से भी जाने जाते थे। आधुनिक भारत की उद्योग सम्बन्धी नीव रखने वाले उद्योगपतियों में उनका नाम सबसे आगे है। उन्होंने भारत में इंजीनियरिंग, इस्पात, वायुयान, होटल एवं अन्य उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जे.आर.डी टाटा ने सन 1932 में देश की पहली वाणिज्यिक विमान सेवा ‘टाटा एयरलाइंस’ की शुरुआत की, जो आगे चलकर सन 1946 में ‘एयर इंडिया’ बन गई। इस सहायता के लिए जे.आर.डी टाटा को भारत के ‘नागरिक उड्डयन’ का पिता भी कहा जाता है। देश के विकास में उनके अतुल सहयोग को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सन 1955 मे ‘पद्म विभूषण’ और 1992 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मनित किया।

जे.आर.डी टाटा ने अपने कुशल नेतृत्व से टाटा समूह को देश के अग्रणी उद्योग घराने के बदल दिया और कर्मचारियों के सौभाग्य के लिए कई योजनाएं प्रारम्भ कीं, जिन्हें बाद में भारत सरकार ने भी अपनाया। उन्होंने टाटा समूह के कंपनियों में प्रति दिन 8 घंटे काम करना, निःशुल्क इलाज सहायता, कर्मचारी भविष्य निधि योजना और कामगार दुर्घटना मुआवजा योजना जैसी योजनाओं को अपनाया। जे.आर.डी टाटा पायलट लाइसेंस पाने वाले भारत के पहले नागरिक थे।

शुरूआती जीवन

जे.आर.डी टाटा का जन्म 29 जुलाई 1904 को पेरिस में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘रतनजी दादाभाई टाटा’ तथा माता का नाम ‘सुजैन ब्रियरे’ था। वे अपने माता-पिता की दूसरी संतान थे। उनके पिता ‘रतनजी दादाभाई टाटा’ भारत के प्रमुख उद्योगपति ‘जमशेदजी टाटा’ के चचेरे भाई थे। उनकी माँ फ़्रांसीसी थीं, इसलिए उनका अधिकतर बचपन फ़्राँस में ही गुजरा और उनकी पहली भाषा फ़्रेंच बन गयी। उन्होंने ‘कैथेडरल’ और ‘जॉन कोनोन स्कूल’ मुंबई से अपनी शुरूआती पढ़ाई की और उसके बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए ‘कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ इंग्लैंड चले गए।

टाटा ग्रुप में प्रवेश

जे.आर.डी टाटा ने सन 1925 में एक अवैतनिक शिक्षार्थी के रूप में ‘टाटा एंड संस’ में काम शुरू किया और अपनी कड़ी मेहनत व लगन से वे सन 1938 में भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह ‘टाटा एंड संस’ के अध्यक्ष बन गए। उन्होंने 14 उद्योगों के साथ समूह के नेतृत्व की शुरूआत की थी और जब 26 जुलाई 1988 को उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ा तब तक टाटा समूह 95 उद्यमों का एक विशाल समूह बन चुका था।

जे.आर.डी टाटा ने कई दशकों तक स्टील, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, रसायन और आतिथ्य के क्षेत्र में टाटा समूह की कंपनियों का निर्देशन किया। व्यापारिक क्षेत्र में सफलता के साथ-साथ उन्हें उच्च नैतिक मानकों के लिए और कर्मचारियों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से सम्बंधित नीतियों को लागू करने के लिए जाना जाता है। इनमें से बहुत सारे कार्यक्रमों को भारत सरकार ने बाद में कानून के तौर पर लागू किया।

जे.आर.डी टाटा 50 वर्ष से अधिक समय तक ‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट’ के ट्रस्टी रहे और अपने मार्गदर्शन में राष्ट्रीय महत्व के कई संस्थानों की स्थापना की। इनमें प्रमुख हैं- टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, टाटा मेमोरियल सेंटर (एशिया का पहला कैंसर अस्पताल) और प्रदर्शन कला के लिए राष्ट्रीय केंद्र।

जे.आर.डी टाटा के नेतृत्व में सन 1945 में टाटा मोटर्स की स्थापना हुई और उन्होंने सन 1948 में भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के रूप में ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ का शुभारंभ किया। भारत सरकार ने सन 1953 में उन्हें ‘एयर इंडिया’ का अध्यक्ष और ‘इंडियन एयरलाइंस’ के बोर्ड का निर्देशक नियुक्त किया। वे इस पद पर अगले 25 साल तक बने रहे।

जे.आर.डी टाटा ने टाटा समूह के कर्मचारियों के हित के लिए कई लाभकारी नीतियाँ लागू की। उन्होंने कंपनी के मामलों में श्रमिकों की भागीदारी और जानकारी के लिए ‘कंपनी प्रबंधन के साथ कर्मचारियों का संपर्क’ कार्यक्रम की शुरूआत की। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कर्मचारी हित के लिए अग्रगामी योजनायें लागू की। टाटा समूह की कंपनियों ने प्रति दिन 8 घंटे कार्य, नि:शुल्क चिकित्सा सहायता और कामगार दुर्घटना क्षतिपूर्ति जैसी योजनाओं को अपनाया।

अवार्ड एवं सम्मान

देश और समाज के विकास में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय अवार्डों से सम्मानित किया गया। भारतीय वायु सेना ने जे.आर.डी टाटा को ‘ग्रुप कैप्टन’ के मानद पद से सम्मानित किया और बाद में उन्हें ‘एयर कमोडोर’ के पद पर पदोन्नत किया और फिर 1 अप्रैल 1974 को ‘एयर वाइस मार्शल’ पद से सम्मानित किया।

विमानन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उनको कई पुरस्कार दिए गए, जैसे- टोनी जेनस पुरस्कार (1979), फेडरेशन ऐरोनॉटिक इंटरनेशनेल द्वारा गोल्ड एयर पदक (1985), कनाडा स्थित अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन द्वारा एडवर्ड वार्नर पुरस्कार (1986) और डैनियल गुग्नेइनिम अवार्ड (1988)। भारत सरकार ने सन 1955 में उन्हें ‘पद्म विभूषण’ और सन 1992 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

मृत्यु

जे.आर.डी टाटा की मृत्यु 89 वर्ष की आयु में गुर्दे की बीमारी के कारण 29 नवम्बर 1993 में जिनेवा (स्विट्ज़रलैण्ड) में हुई थी। उन‌की मृत्यु पर उनके सम्मान में भारतीय संसद ने अपनी कार्यवाही स्थगित कर दी थी। उन्हें पेरिस में ‘पेरे लेचसे’ नामक कब्रिस्तान में दफ़नाया गया।

जीवन घटनाक्रम

  • 29 जुलाई 1904 को पेरिस में जे.आर.डी टाटा का जन्म हुआ।
  • सन 1925 में जे.आर.डी टाटा एक अवैतनिक प्रशिक्षु के रूप में टाटा एंड संस में शामिल हुए।
  • सन 1938 में 34 साल की उम्र में उन्हें टाटा एंड संस का अध्यक्ष चुना गया।
  • 10 फरवरी 1929 को उन्हें भारत में जारी किया गया पहला पायलट लाइसेंस प्राप्त हुआ।
  • सन 1932 में उन्होंने ‘टाटा एयरलाइंस’ शुरू की।
  • सन1936 में ‘टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान’ की स्थापना की।
  • सन 1941 ‘टाटा मेमोरियल सेंटर फ़ॉर कैंसर रिसर्च एंड ट्रीटमेंट’ की स्थापना हुई।
  • सन 1945 ‘टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान’ की स्थापना की।
  • सन 1945 में टाटा ने ‘टेल्को’ शुरू किया।
  • सन 1948 में जे.आर.डी टाटा ने भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के रूप में एयर इंडिया इंटरनेशनल का शुभारंभ किया।
  • सन 1953 में भारत सरकार ने उन्हें ‘एयर इंडिया’ का अध्यक्ष और ‘इंडियन एयरलाइंस’ के बोर्ड का निर्देशक नियुक्त किया।
  • सन 1954 में फ़्राँस ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरकिता पुरस्कार ‘लीजन ऑफ द ऑनर’ से सम्मानित किया गया।
  • सन 1955 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया।
  • सन 1968 में टाटा कंप्यूटर सेंटर (अब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) की स्थापना हुई।
  • सन 1979 में ‘टाटा स्टील’ की स्थापना की।
  • 26 जुलाई 1988 को उन्होंने टाटा समूह के अध्यक्ष का पद छोड़ दिया।
  • सन 1992 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
  • सन 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत में जनसंख्या नियंत्रण में अहम योगदान देने के लिए उन्हें ‘यूनाइटेड नेशन पापुलेशन आवार्ड’ से सम्मानित किया।
  • जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा का देहांत 29 नवम्बर 1993 को जिनेवा में हो गया।