धीरुभाई अम्बानी की जीवनी | Dhirubhai Ambani Biography in Hindi

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परिचय

धीरुभाई अम्बानी एक मशहूर भारतीय उद्योगपति थे, उन्होंने ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज’ की स्थापना की। धीरुभाई अम्बानी की कहानी एक छोटे व्यापारी से लेकर बड़े प्रमुख व्यावसायिक बनने तक की है। कई लोग धीरुभाई अम्बानी के अपूर्व उन्नति के लिए सत्तारूढ़ राजनीतिज्ञों तक उनकी पहुँच को मानते हैं। वे केवल हाईस्कूल ही पास थे, लेकिन अपने दृढ-संकल्प के बल-बूते उन्होंने खुद को बड़े व्यापारी और औद्योगिक साम्राज्य स्थापित किया। उन्होंने मात्र 3 दशकों में ही अपने छोटे से कारोबार को एक विशाल औद्योगिक कंपनी में बदल डाला।

भारत में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी रिलायंस एक बड़ी व्यवसायिक शक्ति के रूप में जानी जाती है। उनकी हानि उठाने की अपार सामर्थ्य और अचूक प्रवृत्ति ने उन्हें फोर्ब्स के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में पहुंचा दिया। अपने वित्तीय कौशल और सूझ-बूझ से धीरूभाई अम्बानी ने वास्तव में एक आधुनिक शेयर बाजार बनाया।

सन 2012 के एक आंकड़े के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप ‘500 फार्च्यून’ कंपनियों में से एक थी। धीरुभाई अम्बानी ने रिलायंस को सन 1977 में सार्वजानिक क्षेत्र में सम्मिलित किया और एक आंकड़े के अनुसार सन 2007 में उनके दोनों बेटे ‘अनिल अम्बानी’ और ‘मुकेश अम्बानी’ की सयुंक्त संपत्ति लगभग 100 अरब डॉलर थी। इस बेहिसाब दौलत ने अम्बानी परिवार को विश्व के अमीर परिवारों में से एक बना दिया।

 शुरूआती जीवन

धीरुभाई अंबानी (धीरजलाल हीरालाल अंबानी) का जन्म 28 दिसंबर 1932 को गुजरात के जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गाँव में एक सामान्य ‘मोध बनिया’ परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘हिराचंद गोर्धनभाई अंबानी’ तथा माता का नाम ‘जमनाबेन’ था। उनके पिता अध्यापक थे। धीरुभाई अंबानी अपने माँ-बाप के 5 संतानों में से 3 नंबर के थे और बाकी भाई-बहन रमणिकलाल, नटवर लाल, त्रिलोचना और जसुमती थे। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ गई। ऐसा माना जाता है कि धीरुभाई अंबानी ने अपने परिवार की आर्थिक सहायता करने के लिए गिरनार की पहाड़ियों में पकौड़े बेचने का काम किया, जो केवल यहां आने वाले तीर्थयात्रियों पर आश्रित थे।

करियर

धीरुभाई अंबानी 16 साल की आयु में अपने बड़े भाई ‘रमणिकलाल’ की मदद से सन 1948 में यमन के अदन शहर पहुंचे गए। वहां उन्होंने ‘ए. बेस्सी एंड कंपनी’ के साथ 300 रूपये प्रति महीने की तनख्वाह पर नौकरी की। करीब 2 साल बाद ‘ए. बेस्सी एंड कंपनी’ जब ‘शेल’ नामक कंपनी के उत्पादों के वितरक बन गई, तब धीरुभाई अंबानी को अदन बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिलिंग स्टेशन में प्रबंधक की नौकरी मिली।

रिलायंस कमर्शियल कारपोरेशन की स्थापना

धीरुभाई अंबानी 1950 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में यमन से भारत वापस लौट आये और अपने चचेरे भाई ‘चम्पकलाल दमानी’ (जिनके साथ वो यमन में रहते थे) के साथ मिलकर पॉलिएस्टर धागे और मसालों के आयात-निर्यात का व्यापार शुरू किया। ‘रिलायंस कमर्शियल कारपोरेशन’ की शुरुआत मस्जिद बन्दर के ‘नरसिम्हा स्ट्रीट’ पर एक छोटे से कार्यालय के साथ हुई। उस समय धीरुभाई अम्बानी अपने परिवार के साथ  मुंबई के भुलेस्वर स्थित ‘जय हिन्द एस्टेट’ में एक छोटे से मकान में रहते थे।

धीरुभाई अम्बानी और चम्पकलाल दमानी के कारोबार की साझेदारी सन 1965 में दो हिस्सों में बंट गई। दोनों के मन और व्यापार करने के तरीके बिलकुल अलग थे, इसलिए ये साझेदारी ज्यादा लम्बे समय तक नहीं चल पायी।

रिलायंस टेक्सटाइल्स

धीरुभाई अम्बानी को कपड़े के व्यापार में अच्छी तरह से जानकारी हो गई और उन्होंने सन 1966 में अहमदाबाद के नैरोड़ा में एक कपड़ा मिल लगाई। इस मिल में कपड़ा बनाने में ‘पॉलिएस्टर’ के धागों का इस्तेमाल हुआ और धीरुभाई अम्बानी ने ‘विमल’ ब्रांड का कपड़ा बनाना शुरु किया। उनके बड़े भाई ‘रमणिकलाल अम्बानी’ के बेटे का नाम ‘विमल’ था इसीलिए कपड़े का ब्रांड भी ‘विमल’ के नाम पर रखा। उन्होंने ‘विमल’ ब्रांड का प्रचार-प्रसार इतने बड़े पैमाने पर किया कि यह ब्रांड भारत के भीतरी इलाकों में भी एक घरेलू नाम बन गया।

मताधिकार खुदरा विक्रेता केन्द्र की शुरुआत हुयी और वे ‘केवल विमल’ छाप के कपड़े बेचने लगे। 1975 में विश्व बैंक की एक तकनीकी मंडली ने ‘रिलायंस टेक्सटाइल्स’ निर्माण इकाई का दौरा किया। इकाई की दुर्लभ खासियत यह थी कि इसे उस समय में “विकसित देशों के मानकों से भी उत्कृष्ट” माना गया।

रिलायंस और स्टॉक मार्केट

धीरुभाई अम्बानी को ‘शेयर संस्कृति’ भारत में शुरू करने का श्रेय में भी जाना जाता है। जब सन 1977 में रिलायंस ने IPO जारी किया, तब 58 हजार से अधिक निवेशकों ने उसमें निवेश किया। धीरुभाई अम्बानी  गुजरात और दूसरे राज्यों के ग्रामीण लोगों को आश्वस्त करने में सफल रहे कि जो उनके कंपनी के शेयर खरीदेगा उसे अपने निवेश पर केवल लाभ ही मिलेगा।

व्यापार का विस्तार

धीरुभाई अम्बानी ने अपने जीवनकाल में रिलायंस के कारोबार का विस्तार विभिन क्षेत्रों में किया। इसमें मुख्य रूप से पेट्रोरसायन, दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, उर्जा, बिजली, फुटकर कपड़ा/टेक्सटाइल, मूलभूत सुविधाओं की सेवा, पूंजी बाज़ार और प्रचालन-तंत्र शामिल हैं।

सम्मान एवं अवार्ड

  • एशिया वीक पत्रिका द्वारा वर्ष 1996, 1998 और 2000 में ‘पॉवर 50 – मोस्ट पावरफुल पीपल इन एशिया’ की सूची में शामिल किया गया।
  • वर्ष 1998 में पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय द्वारा अप्रतीम नेतृत्व के लिए ‘डीन मैडल’ प्रदान किया गया।
  • भारत में केमिकल उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ‘केमटेक फाउंडेशन एंड कैमिकल इंजीनियरिंग वर्ल्ड’ द्वारा ‘मैन ऑफ़ द सेंचुरी’ सम्मान, सन 2000 में दिया गया।
  • वर्ष 2001 में ‘इकनोमिक टाइम्स अवार्ड्स फॉर कॉर्पोरेट एक्सीलेंस’ के अंतर्गत ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
  • फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा ‘मैन ऑफ 20 सेंचुरी’ घोषित किया गया।
  • एशियन बिज़नस लीडरशिप फोरम अवार्ड्स सन 2011 में मरणोपरांत ‘ABLF ग्लोबल एशियन अवार्ड’ से सम्मानित किया।

निधन

धीरुभाई अम्बानी को दिल का दौरा पड़ने के बाद मुंबई के ‘ब्रीच कैंडी’ अस्पताल में 24 जून 2002 को भर्ती कराया गया। इससे पहले भी उन्हें दिल का दौरा एक बार 1986 में पड़ चुका था, जिससे उनके दायें हाँथ में लकवा मार गया था। 6 जुलाई 2002 को धीरुभाई अम्बानी ने दुनिया से विदा ले ली। उनके पीछे उनकी पत्नी ‘कोकिलाबेन’ और दो बेटे ‘मुकेश अम्बानी’ और ‘अनिल अम्बानी’ और दो पुत्रियाँ ‘नीना कोठारी’ और ‘दीप्ति सल्गाओंकर’ हैं।

धीरुभाई अम्बानी के विचार

  • ‘जो सपने देखने की हिम्मत करते हैं, वो पूरी दुनिया को जीत सकते हैं।’
  • ‘हम दुनिया को साबित कर सकते हैं कि भारत सक्षम राष्ट्र हैं। हम भारतीयों को प्रतियोगिता से डर नहीं लगता। भारत उपलब्धियां प्राप्त करने वालों का राष्ट्र है।’
  • ‘मेरी सफलता का राज़ मेरी महत्वाकांक्षा और अन्य लोगों का मन जानना है।’
  • ‘सही उद्यमशीलता जोखिम लेने से ही आता है।’
  • ‘कठिन समय में भी अपने लक्ष्य को मत छोड़िये और विपत्ति को अवसर में बदलिए।’
  • ‘युवाओं को एक अच्छा वातावरण दीजिये। उन्हें प्रेरित कीजिये। उन्हें जो चाहिए वो सहयोग प्रदान कीजिये। उसमे से हर एक आपार उर्जा का स्रोत है। वो कर दिखायेगा।’
  • ‘कठिनाइयों में भी अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश करें। कठिनाइयों को अवसरों में तब्दील करें।’, असफलताओं के बावजूद अपना मनोबल ऊँचा रखें। अंत में सफलता आपको अवश्य मिलेगी।’
  • ‘बड़ा सोचो, जल्दी सोचो, आगे सोचो। विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है।’
  • ‘हम अपने शासकों को नहीं बदल सकते, पर जिस तरह वो हम पर राज करते हैं, उसे बदल सकते हैं।‘
  • ‘मेरे भूत, वर्तमान और भविष्य के बीच एक आम कारक है: रिश्ते और विश्वास का। यही हमारे विकास की नीव हैं।’
  • ‘समय सीमा पर काम खत्म कर लेना काफी नहीं है, मैं समय सीमा से पहले काम खत्म होने की अपेक्षा करता हूँ।’
  • ‘फायदा कमाने के लिए न्योते की ज़रुरत नहीं होती।’
  • ‘यदि आप दृढ-संकल्प और पूर्णता के साथ काम करेंगे, तो सफलता ज़रूर मिलेगी।’