बैतरणी नदी | Baitarani River in Hindi

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बैतरणी नदी पुराणों में वर्जित नरलोक की नदी है। गरुड़ पुराण, शंखलिखित स्मृति आदि कुछ ग्रंथो के अनुसार यह शत योजना विस्तीर्ण, गर्म जल से भरी हुई रक्त-पूय-युक्त, मांस- कर्दम-संकुल एवं दुर्गंधपूर्ण है। वैतरणी नदी में मनुष्य मरने के बाद (प्रेतशरीर धारण कर) रोते हुए गिरते हैं और भयंकर जीव जंतुओं द्वारा दंशि एवं त्रसित होकर रोते हैं। पापियों के लिए इसके पार जाना अत्यंत कठिन माना गया है। यमलोक में स्थित वैतरणी नदी को पार करने के लिए धर्मशास्त्र में कुछ उपाय भी कहे गए हैं।

महाभारत में यह सूचना भी मिलती है कि भागीरथी गंगा ही जब पितृलोक में बहती है, तब वह ‘बैतरणी’ कहलाती है।

बैतरणी नाम की एक भैतिक नदी भारत के ओड़िसा राज्य में है, जो बालेश्वर जिला और कटक जिला की सीमा बनाती है तथा जिसकी लंबाई 365 किलोमीटर है।। यह नदी ओडिशा का सबसे पावन नदी है। बैतरणी नदी को ‘ओडिशा की गंगा’ भी कहा जाता है, इसमें ज्यादातर बाढ़ आया करती हैं।