आदि गोदरेज की जीवनी | Adi Godrej Biography in Hindi

35

परिचय

भारतीय उद्योगपति ‘आदि गोदरेज’ मशहूर व्यवसायिक गोदरेज समूह के अध्यक्ष हैं। वे भारत के सबसे अमीर व्यापारियों की श्रेणी में शामिल हैं। आदि गोदरेज कई भारतीय व्यापार संगठनों के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सन 2011 से वे ‘इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नस’ के अध्यक्ष हैं और ‘कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री’ के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

आदि गोदरेज ‘MIT स्लोअन प्रबंधन संस्थान’ के सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष सदस्य हैं। वे ‘नारसी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज’ के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के भी अध्यक्ष हैं और ‘व्हार्टन एशियन एग्जीक्यूटिव बोर्ड’ के मेम्बर हैं। इसके साथ-साथ आदि गोदरेज ‘हिमालयन क्लब’ के संरक्षक भी हैं। उन्होंने गोदरेज कम्पनी को एक तौर-तरीके से काम करने वाली कंपनी बनाया।

शुरूआती जीवन

आदि गोदरेज का जन्म 3 अप्रैल 1942 को मुंबई शहर में हुआ था। इनके पिता का नाम ‘बुर्जोजी गोदरेज’ तथा माता का नाम ‘जय गोदरेज’ था। उनकी शुरूआती पढाई मुंबई में ही हुई। उन्होंने HL कॉलेज से स्नातक किया इसके बाद MIT स्लोअन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट से MBA किया। अपने प्रबंधन के पढ़ाई के दौरान वे ‘पाई लैम्ब्डा फाई’ और ‘ताऊ बीटा पाई’ के सदस्य थे। उन्होंने अपनी प्रबंधन की पढ़ाई सन 1963 मे पूरी की।

व्यक्तिगत जीवन

आदि गोदरेज मुंबई के जुहू क्षेत्र में निवास करते हैं। उन्होंने प्रसिद्ध समाज-सेविका ‘परमेश्वर गोदरेज’ से शादी की और उनकी धर्मपत्नी ने 3 बच्चों को जन्म दिया।

  • उनकी सबसे बड़ी बेटी ‘तान्या गोदरेज’ इंडस्ट्रीज में कार्यकारी निदेशक और विपणन विभाग की अध्यक्ष हैं।
  • उनकी दूसरी बेटी ‘निशा गोदरेज’ ने अमेरिका के हार्वर्ड बिज़नस स्कूल से प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त है और गोदरेज समूह में कार्य करते हैं।
  • उनके बेटे ‘पिरोजशा गोदरेज’ ने भी अमेरिका से प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त की है और ‘गोदरेज प्रॉपर्टीज’ से जुड़े हैं।

करियर

आदि गोदरेज अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान MIT (Massachusetts Institute of Technology) से MBA की पढाई पूरी करने के बाद भारत वापस लौट आये और अपने पारिवारिक व्यापार में शामिल हो गए। जब वे गोदरेज समूह में शामिल हुए तो प्रबंधन को उनसे बहुत उम्मीदें, थी क्योंकि प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त करने के बाद कंपनी में शामिल होने वाले वे पहले व्यक्ति थे।

आदि गोदरेज के शामिल होने से पहले कंपनी पुराने प्रणाली पर काम करती थी। उन्होंने कंपनी के प्रबंधन ढाँचे को अच्छी तरह से व्यवस्थित किया और बेहतर प्रक्रियाओं को लागू किया। उन्होंने गोदरेज को एक ‘पारिवारिक कंपनी’ से एक ‘पेशेवर कंपनी’ बनाया और ‘मुख्य कार्यकारी अधिकारी’ जैसे पदों पर पेशेवर लोगों को भर्ती किया। भारत में लाइसेंस राज के दौर में भी वे ‘गोदरेज समूह’ को सफलता के नए शिखर पर ले गए।

उन्होंने अपने भाई ‘नादिर गोदरेज’ (जो गोदरेज इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक और गोदरेज अग्रोवेट के अध्यक्ष हैं) और चचेरे भाई ‘जमशेद गोदरेज’ (जो गोदरेज एंड बोयस के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष हैं) गोदरेज समूह का बहुत विकास किया है।

आदि गोदरेज के नेतृत्व में गोदरेज समूह की कई परोपकारी कार्यकलापों में साझेदारी है। वे ‘वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फण्ड इन इंडिया’ के जोरदार समर्थक हैं और इसके कार्यों में सहयोग प्रदान किया है। सन 2011 से वे इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस’ के अध्यक्ष हैं। उन्हें सन 2012-13 में ‘कान्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया इंडस्ट्री CII का अध्यक्ष भी चुना गया था।

सम्मान एवं अवार्ड

  • सन 2002 में उन्हें ‘राजीव गाँधी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
  • चेमेक्सिल के ‘लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार’ सन 2010 से सम्मानित किया गया।
  • AIMA- JRD टाटा कॉर्पोरेट लीडरशिप सन 2010 में सम्मान दिया।
  • सन 2010 में द अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन लीडरशिप इन फिलान्थ्रोप्य अवार्ड दिया गया।
  • एशिया पसिफ़िक इंटरप्रेन्योरशिप सम्मान सन 2010 में ‘इंटरप्रेन्योर ऑफ़ द इयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • GQ मेन ऑफ़ द इयर अवार्ड्स, सन 2010 में ‘बेस्ट बिजनेसमैन ऑफ़ द इयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • बॉम्बे मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा मैनेजमेंट ऑफ़ द इयर पुरस्कार सन 2010-2011 में दिया गया।
  • सन 2011 में किम्प्रो प्लैटिनम स्टैण्डर्ड अवार्ड फॉर बिज़नस सम्मानित किया गया।
  • अर्न्स्ट एंड यंग इंटरप्रेन्योर ऑफ़ द इयर सन 2012 में सम्मानित किया गया।
  • भारत सरकार द्वारा उन्हें सन 2012 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया।
  • सन 2013 में डा एशियन अवार्ड्स- इंटरप्रेन्योर ऑफ़ द इयर दिया गया।
  • सन 2015 में आल इंडियन मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा बिज़नस लीडर ऑफ़ द ईयर पुरस्कार से नवाजा गया।
  • सन 2014 में ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा बिजनेस लीडर ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • सन 2018 में TERI स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।