परिचय

सोनिया गांधी एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” की अध्यक्ष के तौर पर कार्य किया। इस समय वे रायबरेली, उत्तर प्रदेश से सांसद हैं और इसके साथ ही वे 15वीं लोक सभा में न सिर्फ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बल्कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की भी प्रमुख हैं। वे 14वीं लोक सभा में भी यूपी, की अध्यक्ष थीं। सोनिया गांधी कांग्रेस के 132 साल के इतिहास में सबसे लंबे समय (1998 से 2017) तक सेवारत अध्यक्ष रही।

जन्म एवं शिक्षा

सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसम्बर 1946 को वैनेतो, इटली के क्षेत्र विसेन्जा से कुछ दूरी पर स्थित एक छोटे से गाँव लुसिआना में हुआ था। सोनिया गांधी का शादी से पहले नाम ‘एंटोनियों माइनो’ था। उनके पिता का नाम ‘स्टेफानो माइनो’ तथा माता का नाम ‘पाओला माइनो’ था। सोनिया गांधी के पिता एक फासीवादी सिपाही थे। सन 1964 में वे कैम्ब्रिज शहर में “बेल एजुकेशन ट्रस्ट के भाषा स्कूल” में अंग्रेज़ी भाषा का अध्ययन करने गयीं, जहाँ उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई, जो उस समय “ट्रिनिटी कॉलेज” कैम्ब्रिज में पढ़ते थे। दोनों ने सन 1968 में हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया। शादी बाद वे भारत में रहने लगीं और उन्होंने सन 1983 में भारतीय नागरिकता स्वीकार की।

राजनीतिक करियर

सन 1991 में सोनिया गांधी के पति तथा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई, उसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से बिना पूछे कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने का एलान किया, लेकिन सीनिया गांधी ने इस एलान को स्वीकृति नही किया।

पी.वी. नरसिंहाराव के प्रधानमंत्री शासन काल के बाद कांग्रेस सन 1996 का आम चुनाव भी हार गई, जिससे कांग्रेस के नेताओं ने फिर से नेहरु-गांधी परिवार के किसी सदस्य का होना जरुरी समझा। उनके दबाव में सोनिया गांधी ने सन 1997 में कोलकाता के प्लेनरी सेशन में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता हासिल की और उसके 62 दिनों के अंदर सन 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयीं।

सोनिया गांधी अक्टूबर 1999 में बेल्लारी, कर्नाटक से और साथ ही अपने पति के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी, उत्तर प्रदेश से लोकसभा के लिए चुनाव लड़ीं और लगभग 3 लाख मतों के साथ बड़ी जीत हासिल की। सन 1999 में 13वीं लोक सभा में वे विपक्ष की नेता नियुक्त की गईं।

सन 2004 के चुनाव से पूर्व आम राय ये बनाई गई थी कि अटल बिहारी वाजपेयी ही प्रधानमंत्री बनेंगे, पर सोनिया गांधी ने देश भर में प्रचार किया और सब को चौंका देने वाले नतीजों में UPA को अनपेक्षित 200 से अधिक सीटें मिली। सोनिया गांधी खुद रायबरेली, उत्तर प्रदेश से सांसद नियुक्त की गईं। वामपंथी दलों ने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर रखने के लिये कांग्रेस और सहयोगी दलों की सरकार का समर्थन करने का निर्णय लिया, जिससे कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों का स्पष्ट बहुमत पूरा हुआ।

16 मई 2004 को सोनिया गांधी 16-दलीय गंठबंधन की नेता चुनी गईं, जो वामपंथी दलों के सहयोग से सरकार बनाता जिसकी प्रधानमंत्री सोनिया गांधी बनती। सबको अपेक्षा थी की सोनिया गांधी ही प्रधानमंत्री बनेंगी और सबने उनका समर्थन किया। परंतु NDA के नेताओं ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल पर आक्षेप लगाए। ‘सुषमा स्वराज’ और ‘उमा भारती’ ने घोषणा की कि यदि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनीं तो वे अपना सिर के बाल कटवा लेगी और भूमि पर ही सोयेंगीं।

18 मई को उन्होने ‘मनमोहन सिंह’ को अपना उम्मीदवार बताया और पार्टी को उनका समर्थन करने का अनुरोध किया और प्रचारित किया कि सोनिया गांधी ने स्वेच्छा से प्रधानमंत्री नहीं बनने का एलान किया। कांग्रेसियों ने इसका अधिक विरोध किया और उनसे इस फ़ैसले को बदलने का अनुरोध किया पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनना उनका लक्ष्य कभी नहीं था। सब नेताओं ने मनमोहन सिंह का समर्थन किया और वे प्रधानमंत्री बने, पर सोनिया गांधी को दल का तथा गठबंधन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

राष्ट्रीय सुझाव समिति का अध्यक्ष होने के कारण सोनिया गांधी पर लाभ के पद पर होने के साथ लोकसभा का सदस्य होने का आक्षेप लगा, जिसके फलस्वरूप 23 मार्च 2006 को उन्होंने राष्ट्रीय सुझाव समिति के अध्यक्ष के पद और लोकसभा का सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया। मई 2006 में वे रायबरेली, उत्तर प्रदेश से दोबारा सांसद नियुक्त की गईं और उन्होंने अपने निकटवर्ती प्रतियोगी को 4 लाख से अधिक मतों से हराया। सन 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर UPA के लिए देश की जनता से वोट मांगे। एक बार फिर UPA ने जीत हासिल की और सोनिया गांधी UPA की अध्यक्ष चुनी गईं।