परिचय

सत्यजित राय 20वीं शताब्दी की महानतम फ़िल्मी हस्तियों में से एक थे, जिन्होंने यथार्थवादी धारा की फ़िल्मों के साथ-साथ साहित्य, चित्रकला जैसी अन्य विधाओं में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वे फ़िल्म निर्माण से संबंधित कई काम ख़ुद ही करते थे। उन्होंने अपने जीवन में 37 फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फ़ीचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फ़िल्में शामिल हैं।

सत्यजित राय की पहली फ़िल्म ‘पाथेर पांचाली’ को कान फ़िल्मोत्सव में मिले “सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख” पुरस्कार को मिलाकर कुल ग्यारह अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। सत्यजित राय को भारत रत्न (1992) के अतिरिक्त पद्म श्री (1958), पद्म भूषण (1965), पद्म विभूषण (1976) और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (1967) आदि से सम्मानित किया गया।

शुरूआती जीवन

सत्यजित राय का जन्म 22 मई 1921 को ब्रिटिश बंगाल (वर्तमान कलकत्ता) में हुआ। उनके पिता का नाम ‘सुकुमार राय’ तथा माता का नाम ‘सुप्रभा राय’ था। सुकुमार राय चित्रकार होने के साथ-साथ बांग्ला में बच्चों के लिए रोचक कविताएँ लिखते थे। ‘सुकुमार राय’ की मृत्यु सन् 1923 में हुई, जब सत्यजित राय मात्र 2 वर्ष के थे। उनका पालन-पोषण उनकी माँ ‘सुप्रभा राय’ ने अपने भाई के घर में भरे-पूरे और फैले हुए परिवार के बीच किया।

माँ ‘सुप्रभा राय’ रवीन्द्र संगीत की निपुण गायिका थीं और उनकी आवाज़ काफ़ी अच्छी थी। सत्यजित राय के दादा जी ‘उपेन्द्रकिशोर राय’ एक लेखक एवं चित्रकार थे। प्रेसीडेंसी कॉलेज कलकत्ता से स्नातक करने के बाद सत्यजित राय पेंटिंग के अध्ययन के लिए रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, शांति निकेतन चले गए।

शिक्षा

उस दौरान शांति निकेतन साहित्य और कला की नयी भारतीय चेतना के केंद्र के रूप में दुनिया भर में मशहूर था। शांति निकेतन में सत्यजित राय ने नंदलाल बोस और विनोद बिहारी मुखोपाध्याय जैसे कलाकारों से शिक्षा प्राप्त की।

प्रेस में कार्य

सन 1942 में सत्यजित राय ने शांति निकेतन छोड़ दिया। जल्दी ही उन्हें एक ब्रिटिश विज्ञापन एजेंसी ‘डी. जे. केमर एंड कंपनी’ में कमर्शियल आर्टिस्ट की नौकरी मिल गई, जहाँ काम करते हुए उन्होंने पुस्तकों के आवरण पृष्ठों की डिजाइनिंग और रेखांकन का कार्य किया। यह कार्य उन्होंने भारतीय पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने वाले अग्रणी प्रकाशन संस्थान ‘साइनेट प्रेस’ के लिए किया।

फ़िल्मों में रुचि

सन् 1947 में सत्यजित राय ने दूसरे लोगों के साथ मिलकर ‘कलकत्ता फ़िल्म सोसायटी’ की स्थापना की और भारतीय सिनेमा की समस्याओं पर लेख लिखे। उनकी इस पहल ने उन्हें तथा अन्य लोगों को भी फ़िल्मी शिक्षा प्रदान की।

हॉलीवुड फ़िल्मों से प्रशिक्षण

सत्यजित राय का सिनेमा का प्रारंभिक प्रशिक्षण हॉलीवुड फ़िल्मों के अध्ययन से शुरू हुआ। वास्तव में आज़ादी से पूर्व वे ये ही फ़िल्में देख सकते थे। जैसा कि उन्होंने बार-बार कहा- “उन्होंने फ़िल्म निर्माण मुख्यत: अमरीकी फ़िल्मों को बार-बार देखकर सीखा।“

सफलता ‘पाथेर पांचाली’ की

पाथेर पांचाली की निर्विवाद सफलता के बाद सत्यजित राय अक्सर कहा करते थे कि उन्होंने फ़िल्म निर्माण फ़िल्में देखकर सीखा। जो बातें फ़िल्में नहीं सिखा पाईं, वे उन्होंने काम के दौरान सीखीं। यद्यपि ‘पाथेर पांचाली’ को सन् 1956 में केन्स में एक पुरस्कार दिया गया था, पर वास्तव में सन् 1957 में ‘वेनिस महोत्सव’ में ‘अपराजितो’ को मिला ग्रांड प्राइस पुरस्कार ही था जो पाथेर पांचाली को अंतर्राष्ट्रीय स्तर में लाया।

ऑस्कर अवॉर्ड

सत्यजित राय ने अपनी किसी भी फ़िल्म को ऑस्कर में शामिल होने नहीं भेजा। उनकी फ़िल्म ‘पाथेर पांचाली’ (1955) और ‘अपू त्रयी’ को दुनिया भर के फ़िल्म महोत्सवों में सैकड़ों अवॉर्ड मिले हैं। विश्व सिनेमा में अभूतपूर्व योगदान के लिए सत्यजित राय को मानद ऑस्कर अवॉर्ड से विभूषित किया।

निधन

सत्यजित राय की जो बीमारी शुरू हुई, उससे वे पूर्ण रूप से कभी भी ठीक नहीं हो पाए और उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता रहा, जिसके चलते 23 अप्रैल 1992 को कलकत्ता में सत्यजित राय का निधन हो गया।