‘शौर्य चक्र’ भारत का एक सम्मान है, जो किसी को उसकी असाधारण वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार मरने के बाद भी दिया जा सकता है। वरीयता में यह शांति के समय के पुरस्कारों में तीसरे नंबर पर आता है।

इतिहास

इस पदक की स्थापना 4 जनवरी 1952 को ‘अशोक चक्र क्लास 3’ के नाम से भारत के राष्ट्रपति द्वारा की गई थी। 27 जनवरी 1967 को इस पुरस्कार का नाम बदलकर ‘शौर्य चक्र’ रखा गया। पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति को बहादुरी के अलग-अलग कार्यों के लिए ‘अशोक चक्र’ या ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया जा सकता है। जुलाई 1999 के बाद से यह पुरस्कार पुलिस बल और मान्यता प्राप्त अग्नि सेवाओं के सदस्यों को छोड़कर, जीवन के सभी क्षेत्रों में किसी भी लिंग के व्यक्ति को दिया जा सकता है ।

1 फ़रवरी 1999 से भारत सरकार ने इस पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं को 750 रूपये देने का निर्णय किया। जम्मू कश्मीर राज्य में ‘शौर्य चक्र’ के प्राप्तकर्ताओं को प्रतिमाह 700 रूपये देने का प्रावधान है।

बनावट

यह मेडल (पदक) ब्रोंज धातु का बना होता है और इसका आकार गोल होता है। इसका व्यास 1-3/8 इंच का होता है। इस पदक के बीच में ‘अशोक चक्र’ बना हुआ होता है, जिसके चारों तरफ कमल के फूलों की माला बनी होती है और साथ ही उस पदक के किनारों पर डिजाइन भी बना हुआ होता है।

1967 से पहले इस पुरस्कार के पीछे के हिस्से में हिंदी में ‘अशोक चक्र’ उपर की तरफ और अंग्रजी में ‘अशोक चक्र’ नीचे की तरफ लिखा हुआ था और दोनों साइड के किनारों पर एक-एक कमल के फूल बने हुए थे । अब भी बेसिक (मूल) डिजाइन वैसा ही है, बस अब ‘अशोक चक्र’ की जगह पर हिंदी और अंग्रजी में ‘शौर्य चक्र’ लिखा जाता है। इस पदक में हरे रंग का एक फीता होता होता है, जिसके उपर 3 नारंगी रंग की पट्टियां होती हैं, जो हरे रंग के फीते को 4 बराबर के हिस्सों में बांटती हैं।

योग्यता

यह सम्मान ‘वीर चक्र’ के बराबर का सम्मान है। यह पुरस्कार आमतौर पर शांति से समय में किसी दुश्मन के खिलाफ बहादुरी के काम के लिए दिया जाता है।

निम्नलिखित व्यक्तियों को ‘शौर्य चक्र’ दिया जा सकता है-

  • सेना के किसी भी रैंक के पुरुष और महिला ऑफिसर, जल सेना और वायु सेना, क्षेत्रीय सेना, और किसी अन्य कानूनी रूप से बनी सेना के जवानों को यह पुरस्कार दिया जा सकता है।
  • किसी भी सैन्य नर्सिंग सेवा के नर्सिंग ऑफिसर को भी यह पुरस्कार दिया जा सकता है।
  • इस पुरस्कार को कोई भी आम नागरिक, पैरा-मिलिट्री फ़ोर्स और रेलवे सुरक्षा बल जवानों में से कोई भी हासिल कर सकता है।