‘वीर चक्र’ भारत का, एक बहादुरी का पुरस्कार है। इस पुरस्कार को लड़ाई के मैदान पर वीरता दिखाने के लिए भारत सरकार की तरफ से दिया जाता है। इस पुरस्कार ने ब्रिटिश विशिष्ट सेवा क्रॉस (DSC), मिलिटरी क्रॉस (MC) और प्रतिष्ठित फ्लाइंग क्रॉस (DFC) की जगह ली। यह पुरस्कार मरने के बाद भी दिया जाता है। इस पुरस्कार को VrC (वीर चक्र) भी कहा जाता है। यह भारत का युद्ध के समय दिया जाने वाला तीसरा वीरता पुरस्कार है। यह ‘परमवीर चक्र’ और ‘महावीर चक्र’ के बाद सबसे बड़ा, युद्ध के समय दिया जाने वाला वीरता पुरस्कार है। इस पुरस्कार की स्थापना भारत के राष्ट्रपति ने 26 जनवरी 1950 में की थी, मगर उस पुरस्कार से लोगों को सम्मानित करना 15 अगस्त 1947 से शुरू हुआ।

पुरस्कार का रूप

‘वीर चक्र’ का पदक गोल होता है और चाँदी का बना होता है। उस पदक के अंदर एक 5 कोनों वाला तारा बना होता है। उस पदक के बीच में एक गोलाकार के अंदर ‘अशोक स्तम्भ’ बना हुआ होता है। पदक के पीछे वाले हिस्से में हिंदी और अंग्रजी में ‘वीर चक्र’ लिखा होता है और पदक के पीछे 2 कमल के फूल भी बने हुए हैं। उस पदक में 32 मीटर का फीता जुड़ा हुआ होता है, जो आधा गहरा नीला और आधा नारंगी-केसर रंग का होता है। इस पुरस्कार के साथ अलौंस (allowance) भी दिया जाता है और कभी-कभी इकट्ठा नकद इनाम भी दिया जाता है। यह शुरुआत से ही एक विवादित मुद्दा है। भारत सरकार ने 1 फरवरी 1999 से इस पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं को पुरस्कार के साथ 850 रूपये प्रतिमाह देने का निर्णय लिया। इसी के साथ कई राज्यों ने इस पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं को अपने-अपने हिसाब से इनाम देना शुरू कर दिया।