रावी नदी पश्चिमोत्तर भारत और पूर्वोत्तर पाकिस्तान में बहने वाली एक नदी है। इसका पुराना नाम ‘परूष्णी’ है। यह उन 5 नदियों में शामिल है, जिनसे पंजाब का नाम (पांच नदियों का प्रदेश) पड़ा। यह हिमाचल प्रदेश में बृहद हिमालय से निकलती है और पश्चिम-पश्चिमोत्तर में चंबा नगर से होती हुए जम्मू-कश्मीर की सीमा पर दक्षिण-पश्चिम की तरफ घूम जाती है। इसके बाद रावी नदी पाकिस्तान के पंजाब में प्रवेश करने से पहले पाकिस्तानी सीमा के साथ-साथ 80 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक बहती है। यह लाहौर से होकर बहती हुई कमलिया के निकट पश्चिम की तरफ घुम जाती है और लगभग 725 किलोमीटर के बाद अहमदपुर सियाल के दक्षिण में चिनाव नदी में मिल जाती है।

रावी नदी के जल का इस्तेमाल खेतों में सिचाई के लिए किया जाता है। भारतीय पंजाब के उत्तरी छोर पर माधोपुर में प्रारम्भिक बिंदु वाली ऊपरी बारी (बा-ब्यास, री-रावी) दोआब नहर सन 1878 से 1879 में बनकर तैयार हुई थी। यह रावी के पूर्व के बड़े हिस्से को सिंचाई की सुविधा प्रदान करती है, जिसकी सहायक नहरें पाकिस्तान तक फैली हुई हैं।

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अग्रेजों ने फांसी के निश्चित समय से एक दिन पहले फांसी पर लटका दिया था और बुरे तरीके से उनके शवों के टुकड़े-टुकड़े कर सतलुज नदी के किनारे स्थित हुसैनीवाला के पास जला दिया था, लेकिन बाद में लोगों ने अगाध सम्मान के साथ इन तीनों वीर सपूतों का अंतिम संस्कार लाहौर में रावी नदी के किनारे किया था।