रामगंगा नदी भारत की प्रमुख तथा पवित्र नदियों में से एक हैं। स्कंदपुराण के मानसखण्ड में इसका वर्णन ‘रथवाहिनी’ के नाम से किया गया है। उत्तराखण्ड के हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं के कुमाऊँ मण्डल के अन्तर्गत अल्मोड़ा जिले के दूनागिरी (प्राचीन नाम द्रोणगिरी) के विभिन्न प्राकृतिक जलस्रोत निकलकर कई गधेरों अर्थात लघु सरिताओं के रूप में तड़ागताल पहुंचते हैं।

इस झील का कोई मुहाना नहीं है। चन्द कदमों की दूरी के उपरान्त स्वच्छ स्वेत धवल सी भूगर्भ से निकलती है और इसी अस्तित्व में प्रकट होकर रामगंगा नाम से पुकारी जाती है। दूसरी ओर गढ़वाल मण्डल के चमोली जिले के अन्तर्गत ग्वालदम तथा दूधातोली के मध्यवर्ती क्षेत्र के कई गधेरों के ताल नामक गॉंव के समीप मिलने पर रामगंगा कहलाती है। यहीं से रामगंगा का उद्गम होता है।

पौराणिक कथा

रामगंगा नदी जिसका पौराणिक ग्रन्थों में रथवाहिनी के नाम से उल्लेख है। इसके रहस्य व महत्व सारगर्भित पाये जाते हैं। उनमें से एक तथ्य, मानसखण्ड के उल्लेखानुसार द्रोणागिरी यानि दूनागिरी के दो श्रंगों ब्रह्मपर्वत व लोध्र पर्वत (भटकोट) के मध्य से रामगंगा (रथवाहिनी) का उद्गम। इन्हीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह लोध्र-पर्वत यानि भटकोट शिखर जामदाग्नि ऋषि (परशुराम) की तपोभूमि रही है। इसी कारण परशुराम के नाम पर ही इसका नाम रथवाहिनी (रामगंगा) माना गया था।

बाँध व जलविधुत परियोजना

रामगंगा नदी पर बाँध ‘कालागढ़’ नामक स्थान पर बनाया गया है, जहाँ बिजली का उत्पादन तथा तराई के मैदान में सिचाई की सुविधाऐं उपलब्ध होती हैं।

वन्य-सम्पदा

रामगंगा के छोरों पर ‘जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान’ है, जिसे सन 1936 में लुप्तप्राय बंगाल बाघ की रक्षा के लिए ‘हैंली नेशनल पार्क’ के रूप में स्थापित किया गया था। भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क है, यह उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जिले में स्थित है और इसका नाम ‘जिम कॉर्बेट’ के नाम पर रखा गया था। बाघ परियोजना के अंतर्गत आने वाला पहला पार्क व पशु-पक्षी विहार है। यह रामगंगा नदी की पातलीदून घाटी में 1318.54 वर्ग किलोमीटर में बसा हुआ है, जिसके अंतर्गत 821.99  वर्ग किलोमीटर का जिम कॉर्बेट व्याघ्र संरक्षित क्षेत्र भी आता है।

मुहाना

रामगंगा नदी लगभग 154 किलोमीटर की पहाड़ी यात्रा करके कालागढ़ जिले के निकट बिजनौर जिले के मैदान में उतरती है तथा 24 किलोमीटर की मैदान भागों की यात्रा करने के उपरांत इसमे ‘कोह नदी’ आकर मिलती है। अंतत: रामगंगा नदी 610 किलोमीटर की पहाड़ी तथा मैदान यात्रा करने के बाद कन्नोज के निकट गंगा नदी की सहायक नदी के रूप में गंगा नदी में मिल जाती है।

सहायक नदियाँ

·       अरिल नदी ·       विनोद नदी ·      कोसी नदी
·       गगास नदी ·       खोह नदी

 

रामगंगा के किनारे बसे हुए जिले

·       बरेली ·       बदायूँ ·       फरुखाबाद
·       अल्मोड़ा ·       मुरादाबाद ·       हरदोई
·       नैनीताल ·       शाहजहाँपुर

 

रामगंगा के किनारे बसे हुए तीर्थ स्थल और गाँव

·       चौखुटिया ·       सोमनाथेश्वर महादेव ·       पौराणिक बृद्धकेदार
·       स्वीठौ ·       कनौंणी ·       रुद्रेश्वर महादेव
·       श्रीरामपादुका ·       मॉंसी ·       नौला
·       डॉंग ·       काला चौना ·       जैनल
·       आदीग्राम कनौणियॉं ·       रामघाट ·       भिकियासैंण

 

जीव जन्तु

रामगंगा घाटी में अनेक प्रकार के जीव जन्तु पाये जाते है जैसे-

·       शेर ·       नील गाय ·       जंगली सुअर
·       तेंदुआ ·       बार्किग डियर ·       रसेल्स
·       सांबर ·       एशियाई हाथी ·       पाइथन
·       बांध ·       जैकाल ·       मगरमच्छ
·       चीता ·       वाइपर ·       ओद बिलाव
·       गुलनार ·       भालू ·       मछलियाँ
·       हिरन ·       कोबरा ·       बन्दर