शहंशाह अकबर बोले दरबार में – हमारे ख्याल से आलू सबसे उम्दा सब्जी है।

शहंशाह अकबर का एक मंत्री बोला – आप सही फरमा रहे हैं। जहाँपनाह……! आलू ही सबसे बहतरीन है।

शहंशाह अकबर का दूसरा मंत्री बोला – जी हाँ….! आलू के कई तरह के पकवान बनाये जा सकते हैं और इन्हें दोपहर या रात के खाने में भी खा सकते हैं। ये बेशक एक बेहतरीन सब्जी है।

शहंशाह अकबर बोले दरबार में – इस जहाँ में ऐसा कोई नहीं, जिसे आलू पसंद न हो। ये हर किसी की पसंदीदा सब्जी है। इसे खाकर कोई नहीं ऊकता।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल……! हमेशा की तरह आप फिर चुप हैं। क्या आप हमसे सहमत नहीं हैं ?

बीरबल बोला अकबर से – माफ़ी चाहता हूँ। जहाँपनाह……! मुझे भी यही लगता है, कि आलू काफी स्वादिष्ट होते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ओ……! तो आपको ये लगता है, आलू काफी स्वादिष्ट होते हैं। मगर ये नहीं लगता आलू सभी सब्जियों में बेतरीन है। क्यों…?

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! आलू बेशक स्वादिष्ट होते हैं। पर अगर कोई लगातार आलू खाए, तो ऊक जायेगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – आप एक बार फिर हमारे खिलाफ जा रहे हैं। आप हमेशा ऐसा क्यों करते हैं ? यहाँ हमसे सब सहमत हैं। सिर्फ आपको छोड़कर।

शहंशाह अकबर का दूसरा मंत्री बोला – जहाँपनाह……! हम सब की यही राय है। जो कुछ आपने कहा वो बिलकुल दुरुस्त है कि कोई भी आलू खाके ऊक नहीं सकता। बीरबल हमेशा की तरह खुद को अलग साबित करना चाहते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – हाँ….! बीरबल कभी-कभी हमें ताजुब होता है। आप ऐसा क्यों करते हैं ?

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! आपकी बात काटने के लिए मैं माफ़ी चाहता हूँ। पर मुझे लगता है, कि भगवान की बनाई सभी चीजों में बेशक आलू ही नायाब तोहफा है पर वो सबसे बेहतर नहीं है। दुनिया में और भी शानदार और लाजवाब चीजें हैं, जो भगवान ने हमारे लिए बनाये हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – भगवान ने बनाई हैं। आपका मतलब है कि भगवान ने खुद जमीन पर आकर इन सब चीजों को बनाया है। हो सकता है, पर यदि ऐसा है। तो आप ये क्यों नहीं बताते कि आपके किस भगवान ने क्या नायाब चीज बनाई हैं ? अब तक तो हमें यही समझ नहीं आता, कि आपके इतने सारे भगवान कैसे हैं….?

बीरबल बोला अकबर से – मेरे लिए, यह कहना मुश्किल है कि हमारे किस भगवान ने आलू बनाया। पर आपके दूसरे सवाल का जबाब ये है कि हमारे हिन्दू धर्म में सभी कुदरती तत्वों को भगवान के समान माना जाता है। इसलिए भगवान भी अनेक हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ये हमारे सवाल का पूरा जबाब नहीं है। लेकिन कुछ और भी यही है, जो हमें आपकी धार्मिक कथाओं में बड़ा बेवकूफपना लगता है। क्यों भगवान खुद ही जन्नत से नीचे आते हैं? अपनी बनाई हुई चीजों को बजाने। वो किसी और को क्यों नहीं भेजते ? आखिरकार वो भगवान हैं।

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! अभी मेरे पास आपके सवाल का कोई जबाब नहीं है, पर आप मुझे एक दो दिन की मोहलत दीजिये। मैं जरुर आपको जबाब दुंगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! हमें नहीं लगता कि आप इस सवाल का कोई महत्वपूर्ण जबाब दे पाएंगे। जिस तरह आप हमें, ये नहीं समझा पाए कि आलू सब्जियों का राजा क्यों नहीं है ? पर आप कोशिश कर सकते हैं। हमें आपके जबाब का बेसब्री से इंतजार रहेगा।

अगले दिन शाम को शहंशाह अकबर और बीरबल खाने को देखकर बीरबल से बोले……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! आपको खाना पसंद आ रहा है।

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ… जहाँपनाह……! खाना बड़ा ही स्वादिष्ट है।

शहंशाह अकबर बोले – हूँ….!

शहंशाह अकबर खाने को देखकर सिपाही को आवाज लगाने लगे…..!

शहंशाह अकबर सिपाही को आवाज देने लगे – सिपाही….!

और सिपाही से बोले खानसामा को यहाँ पेश करो।

बीरबल बोला अकबर से – क्या बात है ? जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – कुछ नहीं…..!

शहंशाह अकबर के सामने खानसामा  पेश हो गया। और बोला…..!

खानसामा बोला अकबर से – जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले खानसामा से – तुमने खाने में क्या बनाया है ?

खानसामा बोला अकबर से – क्या इन पकवानों में कोई गड़बड़ी ? जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले खानसामा से – तुम हमें बताओ….! क्या गड़बड़ है ?

खानसामा बीरबल की तरफ देखने लगे और शहंशाह अकबर गुस्से में बोले खानसामा से…..!

शहंशाह अकबर बोले खानसामा से – तुम हमें बताते क्यों नहीं कि तुमने कौन-कौन से पकवान बनाये हैं ?

खानसामा बोला अकबर से – जहाँपनाह……! स्वाद के लिए मसाला और मिलाया है।

और खानसामा एक एक करके अपने पकवान शहंशाह अकबर को बताने लगा। ये पकवान दमआलू है, ये है मसले हुये आलू, लाल तरीके के साथ में तली हुई आलू की टिकिया इसके साथ आलू का सालाद और खीरे, खाने के बाद मीठे आलू भी हैं।

शहंशाह अकबर बोले खानसामा से – और….!

खानसामा बोला अकबर से – और जहाँपनाह……! मैंने खुद से भी पकवानों को चखा है। किसी में कोई कमी नहीं है।

शहंशाह अकबर बोले खानसामा से – हाँ….! किसी में कोई कमी नहीं है। पर ये सब पकवान आलू के ही क्यों हैं ? यहाँ कही मुर्ग मुसल्लम और गोश्त क्यों नहीं है खाने में ? क्या हम सिर्फ आलू ही खायेंगे ?

खानसामा बोला अकबर से – जहाँपनाह……! मुझे कहा गया कि आपको आलू अच्छा लगता है। और आप किसी भी तरह से आप खाने में पसंद करते हैं, इसीलिए मैंने तमाम आलू के ही पकवान बनाये हैं।

शहंशाह अकबर बोले खानसामा से – हाँ….! हमें आलू पसंद है। पर इसका मतलब ये तो नहीं, कि हम सिर्फ आलू ही खाएं। हमें इन सभी आलू के पकवानों को देखकर बड़ा अजीब लग रहा है। किसने कहा सिर्फ आलू बनाने के लिये ?

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – मैंने कहा ? जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! क्या आपका दिमाग खराब हो गया है ? आपने ऐसा क्यों किया ?

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – माफ़ी चाहता हूँ। जहाँपनाह……! पर कल तो आप आलू के फायदे पर बात कर रहे थे। और आपने कहा था कि आप आलू कभी भी और किसी भी रूप में हमेशा खाना पसंद करते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ठीक है, बीरबल…..! हम समझ गये, कोई भी शख्स सिर्फ आलू ही खाकर जी नहीं सकता।

शहंशाह अकबर बोले खानसामा से – ठीक है, हमें बीरबल से बहस करने की काफी सजा मिल गयी। अब हमें खाने में आलू के अलावा कुछ और दिया जाये।

खानसामा बोला अकबर से – जरुर… जहाँपनाह……! अभी लाया।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं है। अभी तक आपने अपने भगवान के बारे में हमारे सवाल का जवाब नहीं दिया है।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – जहाँपनाह……! मुझे आपका सवाल याद है। आपको एक दो दिनों में जबाव मिल जायेगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ओ…. आपको इतना भरोसा है, खुद पर…..! पर हमें नहीं लगता, कि आप कोई माकूल जबाव देकर हमें यकीन दिला पाएंगे।

अगले दिन सुबह के समय शहंशाह अकबर और बीरबल अन्य मंत्रियों के अपने शाही बाग़ में घूमने निकले तो देखा और बोले…..!

शहंशाह अकबर बोले अपने मंत्री से – यहाँ कितना अच्छा लग रहा है, बल्कि महारानी और शहजादे भी यहाँ आकर कितने खुश हैं।

बीरबल बोले शहंशाह अकबर से – हाँ…. जहाँपनाह……! आप सही फरमा रहे हैं।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – शाम के वक्त यहाँ काफी ठण्ड हो जाती है और पानी भी दिन में जम जाता है। मुझे लगता है, इस साल सर्दिया जल्द आएंगी।

शहंशाह अकबर ने देखा दासी शहजादे को गोद में लेकर शाही बाग़ के तालाब के किनारे खड़ी है…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल..! वो दासी क्या कर रही है ? वो पानी के इतने नजदीक क्यों टहल रही है ?

तभी दासी का सीढ़ियों से पैर फिसल जाता है और दासी से शहजादा पानी में गिर जाता है।

दासी चिल्लाने लगी – बचाओ बचाओ…..! शहजादा……!

महारानी बोली – ओ…. मेरा बच्चा….! मेरा शहजादा……! कोई बचाओ इसे, कोई तो बचाओ।

शहंशाह अकबर बोलेबेवकूफ़ औरत…..! ये मेरा बच्चा……! अरे बचाओ…..!

शहंशाह अकबर और बीरबल अन्य मंत्री भागकर तालाब की तरफ गए और शहंशाह अकबर पानी के तालाब में कूदकर शहजादे को निकालकर लाये।

महारानी बोली शहंशाह अकबर से – इसे मुझे दीजिये। मेरा बेटा….! मेरा लाल……! ओ….. क्या हो गया ? कुछ हुआ तो नहीं…..! ओ… मेरा बेटा…..!

महारानी ने बच्चे के मुंह से कपड़ा हटाकर देखा तो, महारानी साहिबा बोली……!

महारानी बोली शहंशाह अकबर से – ये क्या हुआ ?

शहंशाह अकबर ने देखा खिलौने की गुड़िया निकली और खिलौने की गुड़िया को हाथ में लेके बोले अकबर…..!

शहंशाह अकबर बोले दासी से – क्या…..! क्या मतलब है इसका ?

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! मुझे समझाने दीजिये।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तुम…..! तुम फिर इस घिनौने मजाक के पीछे।

बीरबल बोला अकबर से – गुस्ताकी माफ़ हो। हुजूर…..! पर शहजादा बिलकुल ठीक है।

तभी बीरबल ने दासी से शहजादे को बुलवाया।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! अगर तुमने ऐसा घिनौना मजाक करने की सही वजह नहीं बताई, तो हम तुमे आपने राज्य से निकाल बाहर करेंगे।

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! मेरा मकसद मजाक करना नहीं था। पर आपको और रानी साहिबा को इससे जो दुःख पहुंचा, उसके लिये में माफ़ी चाहता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ठीक है, अगर ये कोई मजाक नहीं था। तो तब इसके पीछे तुम्हारा क्या मतलब था ?

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! आप मेरे एक सवाल का जबाव देंगे। तब मैं आपको सब समझा दुंगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तुम हमसे सवाल करोगे। ठीक है….! पर ये हमारे सब्र का इम्तिहान है, पूछो….।

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! जब आपने शहजादे को पानी में गिरते हुये देखा। तब आपने सिपाहियों, दसियों या हम में से किसी को पानी में कूद कर शहजादे को बचाने का इंतजार क्यों नहीं किया ? आप एक शहंशाह होते हुये भी, खुद उसे बचाने गए।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – क्या फिजूल का सवाल है ये ? किसी के बच्चे की जान खतरे में हो। क्या उसके माँ-बाप चुप बैठकर तमाशा देखेंगे ? क्या किसी गैर को आने का इंतजार करेंगे ?

बीरबल बोला अकबर से – बिलकुल जहाँपनाह……! आपने बिलकुल सही कहा, अपने बच्चे की जान खतरे में देखकर चुपचाप नहीं बैठेंगे। हम सभी भगवान की संतान है। जब भी हम में से कोई किसी मुसीबत में होता है। और भगवान को पुकारता है तो वे अपने किसी सेवक को भेजने या इंतजार करने के बजाय खुद स्वर्ग से आकर हमें बचाते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! आपने हमारे सवाल का बिलकुल सही और महत्वपूर्ण जवाव दिया है। और आपने हमें ही अपने सवाल के जवाव देने का जरिया बनाया।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – शाबास……! पर आपको हमें और महारानी को परेशान करने की सजा जरुर मिलेगी।

बीरबल शहंशाह अकबर की तरफ यह बात सुनकर घबराने लगे……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – आपको शहजादे की पूरे दिन देखभाल करनी होगी। इस मजाक के ऐवज में…..!

बीरबल बोला अकबर से – ये सजा नहीं है। जहाँपनाह……! ये मेरी खुद किस्मती है। इसके लिये आपका शुक्रिया….!