शहंशाह अकबर और बीरबल अपने अन्य मंत्रियों के साथ सुबह की ठंड का जायजा लेने बगीचे के तालाब की तरफ घूमने निकले।

शहंशाह अकबर बोले अपने मंत्री से – इस साल ठंड बहुत ज्यादा है।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – जी हाँ जहाँपनाह……! आजकल लोग घर से बाहर निकलने से झिझकते हैं।

शहंशाह अकबर बोले अपने मंत्री से – हाँ…. पर लोगों को काम तो करना पड़ेगा। चाहे ठंड हो या न हो।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – वो तो है पर….. ठंड बहुत बढ़ जाती है, तो ज्यादातर लोग घर पर ही रहना पसंद करते हैं।

शहंशाह अकबर ने पानी के तालाब के अंदर हाथ से ठंड का जायजा लिया, तो बोले अपने मंत्री से……

शहंशाह अकबर बोले अपने मंत्री से – ओह…हो..! ये पानी तो जैसे बर्फ बन गया हो। आप ठीक कह रहे हो। लाला जी……! इतनी ठंड में कौन बाहर निकलेगा ? लाला जी……!

बीरबल बोला अकबर से – माफ़ी चाहता हूँ। हुजूर…..! मुझे ऐसा नहीं लगता।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल आपको हर वक्त हमारे खिलाफ जाना जरुरी नहीं है।

बीरबल बोला अकबर से – माफ़ी चाहता हूँ। जहाँपनाह……! मैं आपकी बात नहीं काटना चाहता, मैं तो सिर्फ आपको बताना चाहता था कि ऐसे भी लोग हैं, जिन्हेँ मुश्किलों में भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – आप कहना चाहते हैं, कि ऐसे भी लोग हैं, जो पैसों के लिये कुछ भी कर सकते हैं।

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ हुजुर……! मैं यही कहना चाह रहा था।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ। कोई भी इंसान पैसा कमाने के लिये एक हद से पार नहीं जा सकता।

शहंशाह अकबर का मंत्री लाला जी बोला – आप सही फरमा रहे हो हुजुर….! मैं भी ऐसा ही समझता हूँ।

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! आपके राज्य में ऐसे भी लोग हैं, जो हालात की वजह से थोड़ा पैसा कामने के लिए मुश्किल से मुश्किल काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – क्यों न तुम अपनी बात को साबित कर दिखाओ? क्या तुम ऐसे आदमी को ला सकते हो? जो सारी रात इस ठंड में ठंडे पानी में खड़ा रह सके। हम उस आदमी को 10 सोने की अशर्फियाँ देंगे।

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ हुजुर….इतनी कम रकम के लिए भी कोई न कोई इस काम को करने के लिए तैयार हो ही जायेगा।

शहंशाह अकबर का मंत्री लाला जी बोला – मैं इस बात का यकीन करना चाहूँ भी तो नहीं कर सकता। पहली बात तो कोई भी इंसान को पता चलने के बाद कि पानी कितना ठंडा है, इसको स्वीकार नही करेगा। दूसरी बात अगर कोई मुर्ख स्वीकार कर भी ले तो, सुबह तक बच नहीं पायेगा।

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! मुझे पूरा यकीन है, ऐसे आदमी को आज ही ढूंड सकता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ठीक है….! आप इस बात को साबित कीजिये और ऐसा आदमी ढूंढिए, इस बात का फैसला आज ही हो जाये, मुझे यकीन है कि इस बार आप गलत साबित हो जायेगे।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूरे अल्लाह……! मैं आज ही ऐसा आदमी ढूंढकर शाम को दरबार में पेश कर दूंगा।

शाम के समय में…..

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! अपनी चुनौती स्वीकार करने वाला आदमी मुझे मिल गया है इजाजत हो तो दरबार में बुलाया जाये।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – उसे बुलाएं बीरबल, हम जरुर मिलना चाहेंगे उससे…..!

शहंशाह अकबर के दूत ने दरबार में आवाज़ लगाई – गंगाराम हाजिर हो…..!

गंगाराम बोला अकबर से – आदाब जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – क्या बीरबल ने समझा दिया है, कि तुम्हेँ क्या करना है?

गंगाराम बोला अकबर से – जी हाँ हुजुर….! मुझे सारी रात आपके बगीचे वाले तालाब के पानी में खडा रहना होगा….।

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – क्या तुम्हेँ डर नहीं लगता कि तुम तालाब में खडे होकर अपनी जान गवाँ सकते हो या तुम्हेँ वहां की ठंड का अंदाजा नहीं।

गंगाराम बोला अकबर से – जहाँपनाह……! मैं जानता हूँ कि तालाब का पानी कितना ठंडा होगा।

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – हमें लगता है कि 10 अशर्फियाँ के बदले ये करना बहुत बड़ी मूर्खता है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! इस पर नजर रखने के लिए दो सैनिक तैनात रहेंगे। ये आदमी आज रात हमारा मेहमान है, इसकी अच्छी तरह खातिर की जाये। क्या पता आज की रात इसकी आखिरी रात हो?

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – और हम दोनों आप से कल सुबह मिलेंगे।

शहंशाह अकबर अपनी सभा समाप्त करके चले जाते हैं और गंगाराम को बगीचे वाले तालाब के पानी के अंदर खड़ा करने के लिए, उसे दो सैनिक ले जाते हैं और पूरी रात गंगाराम पानी के तालाब के अंदर खड़ा रहता है और अगले दिन गंगाराम को सभा में पेश किया जाता है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तो बतायें…! बीरबल क्या हाल हैं आपके आदमी के…..?     

बीरबल बोला अकबर से – वो बाहर ही रुका है, क्यों न उसी से पूछ लें?

शहंशाह अकबर के दूत ने दरबार में आवाज़ लगाई – गंगाराम हाजिर हो…..!

गंगाराम को शहंशाह अकबर के दो सैनिकों ने दरबार में पेश किया।

गंगाराम बोला अकबर से – आदाब जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – तो कहो कैसी रही रात….?

गंगाराम बोला अकबर से – हुजूर….! आसानी से तो नहीं, पर ऊपर वाले की दया से किसी तरह कट गई।

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – तुम कहना चाहते हो कि तुमने सारी रात तालाब में गुजारीमुझे यकीन नहीं आता”।

गंगाराम बोला अकबर से –  ये सच है, जहाँपनाह……! ये सिपाही मेरे गवाह हैं।

शहंशाह अकबर बोले सिपाहियों से – सच बताओ। क्या इस आदमी ने सारी रात तालाब में गुजारी..?

सिपाही बोले अकबर से – जी हाँ जहाँपनाह……! सुबह होने पर ही ये आदमी पानी से बाहर निकला। हम दोनों ने कड़ी नजर रखी।

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – हमें इस बात का यकीन नहीं हो रह है। कैसे किया तुमने ये…. ? सारी रात क्या किया तुमने…. ?

शहंशाह अकबर से बोला गंगाराम – हुजूर….! शुरु में तो बहुत ही मुश्किल था और ठंड के मारे में अकड़ गया था। फिर तालाब के किनारे एक ‘दीये’ को देखने लगा और सारी रात उसे देखते और भगवान का नाम लेकर गुजार दिया।

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – हाँ…..हाँ तो अच्छा ये राज है। तुम्हेँ उस ‘दीये’ से गर्मी मिल रही होगी। इसीलिए तुम देर रात ठंडे पानी में रहे सके। हम जानते थे, वरना ऐसा कर पाना तुम्हारे लिए नामुमकिन होता।

गंगाराम बोला अकबर से – पर जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई…. ? हम से धोखा करने में… फिर भी हम तुम्हेँ सजा नही देंगे, क्योंकि हम समझ सकते हैं ये कितना मुश्किल था, पर इनाम के बारे में तुम भूल ही जाओ।

गंगाराम बोला अकबर से – पर जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले गंगाराम से – बस बहुत हो चुका, हम और कुछ सुनना नहीं चाहते।

शहंशाह अकबर बोले सिपाहियों से – सिपाहियों….! इस आदमी को दरबार से बहार ले जाओ।

और दो सिपाही गंगाराम को सभा से बहार निकाल देते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल….! इस बार आपको हार माननी पड़ेगी। आप गलत साबित हुए।

बीरबल बोला अकबर से – आपके खिलाफ जाने के लिए मैं माफ़ी चाहता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – कोई बात नहीं बीरबल….! सभी कभी न कभी गलती करते हैं। आगे बढ़ते हैं। हमारे ख्याल से ईरान के तोहफे का फैसला करने वाले थे। क्या आपके पास कोई सुझाव है….?

बीरबल बोला अकबर से – माफ़ी चाहता हूँ हुजुर….पर कुछ घरेलू परेशानी की वजह से मैं अभी घर जाने की माफ़ी चाहता हूँ। मैं दोपहर तक वापस आ जाऊंगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – जरुर बीरबल……! आप जा सकते हैं पर जल्दी लौट आइयेगा।

बीरबल शहंशाह अकबर को आदाब जहाँपनाह करते हुये घर चले गए। दोपहर के समय शहंशाह अकबर दोबारा सभा में आये।

शहंशाह अकबर बोले अपने मंत्री से- “बीरबल कहां हैं”..? क्या वो अभी तक लौटे नहीं..?

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – नहीँ हुजुर….! अभी तक नहीं लौटे।

शहंशाह अकबर का दूसरा मंत्री बोला – क्या उन्हें बुलाने के लिए किसी को भेजा जाये..?

शहंशाह अकबर मंत्री से बोले  – हाँ… एक सिपाही को भेजिए और उन्हें जल्द दरबार पहुंचने को कहिये।

शहंशाह अकबर बोले मंत्री से – तब तक आप बाकी कार्यवाही कर सकते हैं।

अकबर का दूत बीरबल के यहाँ से एक सन्देश लेकर आता है।

शहंशाह अकबर का दूत बोला – आदाब जहाँपनाह……! बीरबल ने कहा है कि वो खाना खा रहे हैं और खाना खाकर दरबार में हाजिर हो जायेंगे।

शहंशाह अकबर बोले – आज बीरबल को हो क्या गया है….? इतनी देर से कभी खाना नहीं खाते, हमारे ख्याल से खाना हो गया होगा। और बोले एक और घोडा लेकर जाओ, उनसे कहो जितनी जल्दी हो सके दरबार पहुंचे।

शहंशाह अकबर का दूत आया तो बोला – तुम अकेले क्यों आये हो…? और बोले बीरबल कहा है…? क्या हमने तुमसे कहा नहीं था..? उनको साथ लेकर आना।

शहंशाह अकबर का दूत बोला – ओ… हो….हुजुर….! मैं उनके घर गया था। आपका संदेशा लेकर… पर बीरबल भोजन तैयार कर रहे थे और उन्होंने आपको कहने के लिए कहा है कि जैसे ही भोजन बन जायेगा, फिर दरबार में हाजिर हो जायेंगे।

शहंशाह अकबर बोले – हमारे ख्याल से हमें खुद जाकर देखना पड़ेगा कि बीरबल क्या कर रहे हैं..?

शहंशाह अकबर ने कहा – हम इसी वक्त उनके घर जायेंगे। शहंशाह अकबर दो दूत और एक मंत्री के साथ बीरबल के घर जाते हैं और बीरबल के दरवाजे पर पहुंचते हैं, तो बीरबल का सेवक मिलता है।

बीरबल का सेवक बोला अकबर से – आदाब जहाँपनाह……!

शहंशाह अकबर सीधे बीरबल के पास पहुंच जाते हैं, बीरबल अपने लिए खिचड़ी बना रहे थे। तभी शहंशाह अकबर आ गए।

बीरबल बोले अकबर से – अगर मेरी वजह से किसी भी तरह की तकलीफ हुई हो, तो मैं माफ़ी चाहता हूँ।

शहंशाह अकबर ने देखा एक हांडी तीन बाँसों के बीच में ऊँची लटकी हुई थी और उसके नीचे आग जल रही थी। शहंशाह अकबर ने देखा तो बीरबल से पूछने लगे।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – क्या हो रहा है बीरबल….? सिपाही ने कहा कि, आप खाना खा रहे हैं और ये सब माजरा क्या है..?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर….! ये ऊपर हांडी टंगी हुई है। इसमें मेरा भोजन है। मैं खिचड़ी बना रहा हूँ। अफ़सोस…! अभी तक बनी नहीं है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…! आप ठीक तो हैं। आग से इतनी ऊंचाई पर हांड़ी टांगने से खिचड़ी कैसे पकेगी..?

बीरबल बोला अकबर से – हुजुर….! मुझे नहीं लगता, मैं कुछ गलत कर रहा हूँ। क्यों नहीं पकेगी..? हांड़ी सीधे आग के ऊपर टंगी है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल आपका दिमाग तो नहीं ख़राब हो गया है। खाने को जब तक गर्मी नहीं मिलेगी, तो वो पकेगी कैसे..? और अगर आप हांड़ी को आग से इतना ऊपर रखेंगे तो, गर्मी कैसे पहुंचेगी..?

बीरबल बोला अकबर से – जहाँपनाह……! मैंने सोचा अगर गंगाराम को दूर लगे एक दीये से गर्मी मिल सकती है, तो आग से थोड़ा ऊपर टांगने पर खिचड़ी क्यों नहीं पक सकती…?

शहंशाह अकबर बोले बीरबल – अच्छा…अच्छा….! हम आपकी बात समझ गए। ठीक है आप जीत गये और अपने आदमी के साथ दरबार में जल्दी हाजिर….हो। उसे उसका इनाम मिल जायेगा।

शहंशाह अकबर अपने दरबार चले जाते हैं। बीरबल, गंगाराम को लेकर दरबार में पेश होते हैं और गंगाराम को एक रात ठंड के मौसम में पानी के तालाब में खडे होने का बीरबल ने शहंशाह अकबर से इनाम दिलवाया।

गंगाराम इनाम मिलने के बाद बोला अकबर से – शुक्रिया….! हुजूर

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – और ये आपके लिए इनाम बीरबल…..! एक शहंशाह को उसकी गलती का एहसास कराने में बड़ी हिम्मत चाहिये। और ये दिखाने के लिए, आपने जो रास्ता चुना वो भी बड़ा दिलचस्प था, शाबाश….!

और सभा में सारे लोग राजा बीरबल…..जिंदाबाद ! शहंशाह अकबर……! जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया….. हुजूर!

सीख

हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि चाहे राजा हो या भिखारी उसे उसकी गलती का अहसास कराना चाहिये