शहंशाह अकबर और बीरबल अन्य मंत्रियों के साथ सभा में जाते हैं। शहंशाह अकबर के दरवार में एक दूत आवाज लगता है साहिरान, ईरान के राजदूत दरबार में पेश हो रहे हैं।   

ईरान का दूत बोला – आदाब बादशाह……

शहंशाह अकबर ने कहा – आपका स्वागत है….

ईरान का दूत बोला – बहुतबहुत शुक्रिया जहाँपनाह… मैं ईरान के जहाँपनाह की तरफ से आपको भेजे गए तोहफे को पेश करने की इजाजत चाहता हूँ….

शहंशाह अकबर बोले – जरुर..! जरुर….!

ईरान का दूत बोला – भारत के शहंशाह और हमारे मित्र अकबर महान को हमारा सलाम। पहेलियां बुझाने की हमारी परंपरा के सिलसिले में हमें लगता है कि हमें आपके लिए सही चुनौती मिली है।

जैसे कि आप देख रहे हैं, बंद पिंजरे में नकली शेर है। चुनौती ये है कि बिना पिंजरे को छुए और शेर को बिना छुए पिंजरा खाली करना है। आपके पास सिर्फ तीन मौके हैं, एक आदमी को सिर्फ एक मौका मिलेगा, मुझे यकीन है कि ये पहेली बुझाने में आपको बहुत मजा आएगा। आपका मित्र साहिरान।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल आपका क्या ख्याल है, क्या आपके पास कोई सुझाव है।

बीरबल बोले अकबर से – जहाँपनाह….. आपकी इजाजत हो तो मेरे पास कुछ सुझाव है।

शहंशाह अकबर का मंत्री सुखदेव सिंह बोला – जहाँपनाह…. हमें भी एक मौका दिया जाये, हर बार बीरबल को ही क्यों मौका मिलता है।

शहंशाह अकबर बोले मंत्री सुखदेव सिंह से – जरुर …. जरुर सुखदेव सिंह जी आप सही फरमा रहे हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल हम पहले सुखदेव सिंह जी को गुत्थी सुलझाने का मौका देते हैं।

बीरबल बोला अकबर से – जैसी आपकी मर्जी हुजूर ……।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – जहाँपनाह…. मैंने जादूगर जादूराम को आज हमारा मनोरंजन करने को बुलाया है, वो इस देश के सबसे बड़े जादूगर हैं। मुझे पूरा यकीन है कि ये इसे जरुर सुलझा सकेंगे। अगर आपकी इजाजत हो तो मैं उन्हें दरबार में बुलाना चाहूँगा।

शहंशाह अकबर बोले मंत्री से – जरुर….।

सुखदेव सिंह मंत्री बोले – शुक्रिया हुजूर….।

सुखदेव सिंह मंत्री बोले – जादूगर को बुलाया जाये।

शहंशाह अकबर का दूत ने आवाज लगाई – जादूगर जादूराम हाजिर हो…।

जादूगर बोला अकबर सेआदाब जहाँपनाह….।

जादूगर अपना जादू दिखाने लगा – जंतर मंतर छु… मंतर, जंतर मंतर छु… मंतर और जादूगर ने अपनी जादुई से गुलाब का फूल दिया शहंशाह अकबर के हाथ में।

शहंशाह अकबर जादूगर से बोले – शाबाश …. शुक्रिया।

ईरान का दूत बोला जादूगर से – क्या आप पिंजरे में शेर को देख रहे हैं? क्या आप पिंजरे में से शेर को निकाल सकते है, बिना पिंजरा या शेर को हाथ लगाये।

जादूगर बोला ईरान के दूत से जी हाँ

शहंशाह अकबर से बोला जादूगर – हाँ जहाँपनाह…. मैं जरुर कर सकता हूँ, मैं आपकी इजाजत चाहता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले जादूगर से – जरुर…. आगे बढिये।

जादूगर, जो ईरान से आया बंद पिंजरे में शेर के पास गया और उसे देखकर अपने साथी से बोला जमूरे ये जादुई संदूक खोलकर अंदर बैठ जा।

जादूगर बोला अकबर से – जमूरे को इस संदूक के अंदर बैठाकर में इसे जादुई शक्ति से गायब कर दुंगा और उसके जगह शेर बक्से के अंदर आ जायेगा और जमूरे संदूक के अंदर बैठ जाता है और जादूगर बोलता है पिंजरे का पर्दा गिरा दो। ईरान के दूत पिंजरे का पर्दा गिरा देते हैं। उसके बाद जादूगर ईरान से आये पिंजरा लेकर उनको शुक्रिया अदा करता है और जादूगर अपनी जादुई दिखने लगता है।  

जंतर … मंतर ….छु ..मंतर…. जंतर … मंतर ….छु ..मंतर…. जंतर … मंतर ….छु ..मंतर और जादूगर अपनी शक्ति प्रयोग करने के बाद जादूगर के साथ आया बंदा उसे बोला संदूक खोलो और उसने संदूक को खोलने को बोला और जिसने संदूक को खोला तो संदूक से जमूरे गायब हो गया।

जादूगर के मुंह से आवाज निकली – ओह…..।

उसके बाद शेर वाले पिंजरे से आवाज आई बचाओ मुझे….. बचाओ मुझे…..कोई मुझे इस पिंजरे से बहार निकालो बचाओ मुझे…. बचाओ।

जादूगर बोला – पिंजरे का पर्दा खोलो। और पर्दा खोलने के बाद देखा तो पिंजरे के अंदर जमूर बैठा था।

जमूर बोला – जादूगर जी मुझे बहार निकालो….. कोई बचाओ मुझे…. कोई पिंजरे से बहार निकालो, इस तरह कहने लगा।

शहंशाह अकबर ने जादुई देखी – तो हंसने लगे और सभा में बैठे सारे लोग भी जादुई देखकर हंसने लगे।

जादूगर बोला सभा में – मुझे लगता है थोड़ी गलती हुई और बोला अभी ठीक कर देता हूँ, जादूगर करने लगा छु …. मंतर ……जादू ….. मंतर – छु …. मंतर ……जादू ….. मंतर..

ईरान का दूत बोला जादूगर से  – ठहरो….. जहाँपनाह….. किसी को भी इस पहेली के लिए एक बार से ज्यादा मौका नही दिया जायेगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल क्या आप कोशिश करना चाहेंगे।

बीरबल बोले अकबर से जी हाँ ….. जरुर जहाँपनाह।

शहंशाह अकबर के मंत्री दिलेर सिंह जी बोले – जहाँपनाह…. मैं भी एक मौका चाहता हूँ, मैं एक ऐसे आदमी को जानता हूँ, जो जरुर ये काम कर सकेगा।

शहंशाह अकबर बोले मंत्री दिलेर सिंह से – अगर आपको यकीन है दिलेर सिंह जी तो जरूर…..।

शहंशाह अकबर का मंत्री दिलेर सिंह जी बोले – जहाँपनाह …… मैंने ओझा काली बाबू को दरबार में बुलाया, जो रूहानी ताकतों के मालिक हैं और कई चमत्कार करते हैं, मुझे यकीन है कि वो ये छोटी सी गुत्थी जरुर सुलझा सकेंगे।

शहंशाह अकबर के दूत ने आवाज लगाई – ओझा काली बाबू हाजिर हो…..।

शहंशाह अकबर के दरबार में ओझा काली बाबू बोले जय काली……।

शहंशाह अकबर के मंत्री दिलेर सिंह जी बोले – ओझा आपका स्वागत है। एक छोटी सी गुत्थी सुलझानी है, क्या आप बिना पिंजरा या शेर को हाथ लगाये शेर को पिंजरे के बहार निकाल सकते हैं।

शहंशाह अकबर के दरबार में ओझा काली बाबू बोले जय काली …… मेरे लिए कोई चुनौती बड़ी नहीँ, में इसे जरुर पूरा कर सकता हूँ।

बंद पिंजरे में बैठा जमूरा बोला – बचाओ मुझे ओझा जी ……बचाओ मुझे बाहर निकालो।

ओझा काली बाबू बोले जमूरा से – फ़िक्र न करो बालक, में तुम्हेँ भी पिंजरे से बहार निकाल दूंगा।  

और ओझा काली बाबू अपना जादू दिखाने लगे और बोले जय..काली। उसके बाद पिंजरे का पर्दा नीचे डाल दिया और ओझा काली बाबू जादूगर दिखने लगे। ॐ सोम मीन किलीन और तेजी से बोलने लगा ॐ सोम मीन किलीन बोलने लगा और बोला मेरी शक्ति देखो।

ओझा काली बाबू बोले सभा में – पिंजरे का पर्दा हटाओ….मेरी शक्ति देखो।

ओझा काली बाबू की शक्ति से बंद पिंजरे से जमूरा बाहर आ गया और जमूरा घुटमन पैर चलकर सभा में बिल्ली की तरह आवाज निकालने लगा और उसे देखकर सभा में सब हँसने लगे।

शहंशाह अकबर बोले सभा में – क्योंकि अब सिर्फ एक मौका बाकी है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल आप इस गुत्थी को क्यों नहीं सुलझाते।

बीरबल बोले अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह…..। और बीरबल बंद पिंजरे के पास चले जाते हैं। बीरबल ने बंद पिंजरे में शेर को बड़ी चतुराई से देखा।

बीरबल बोले अकबर से – जहाँपनाह ….. क्या मुझे दो सुलगती हुई लोहे की सलाखें मिलेंगी।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – जरुर….।

शहंशाह अकबर बोले सभा में – बीरबल के लिए दो सलाखों का इंतजाम करो।

उसके बाद बीरबल के लिए दो सुलगती हुई लोहे की सलाखें मिल जाती हैं, फिर बीरबल उन लोहे की दो सलाखों से मोम का बना हुआ शेर को पिघला देते हैं। और शहंशाह अकबर की सभा में बैठे अन्य लोग बीरबल की चतुराई देखकर अचंभित रह गए।

बीरबल बोला अकबर से – लीजिये हो गया। जहाँपनाह….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – शाबाश…. बीरबल बहुत बढ़िया।

बीरबल बोला अकबर से – बहुत आसान था।  जहाँपनाह…. शेर मोम का बना हुआ था, इस गुत्थी को सुलझाने के लिये यही समझना जरूरी था।

ईरान का दूत बोला – जहाँपनाह…. आपके सब रत्नों में से बीरबल सबसे कीमती रत्न है।

शहंशाह अकबर की सभा में सारे मंत्री बोले – राजा बीरबल जिंदाबाद….. ! शहंशाह अकबर जिंदाबाद……! के नारे लगाने लगे।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – शाबाश बीरबल…. ! एक बार फिर आपने साबित कर दिया कि ज्यादातर परेशानियां सुलझाने के लिये केवल बुद्धि और समझ की जरुरत है। शाबाश…..

सभा में बैठे अन्य मंत्री राजा बीरबल जिंदाबाद ….. ! शहंशाह अकबर जिंदाबाद … ! के नारे लगाने लगे।

और बीरबल ने शहंशाह अकबर को शुक्रिया अदा करते हुये आशीर्वाद लिया।

सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि परेशानियां सुलझाने के लिये केवल बुद्धि और समझ की जरुरत होती है।