परिचय

नितिन गडकरी एक भारतीय राजनीतिज्ञ और ‘भारतीय जनता पार्टी’ के वरिष्ठ राजनेता हैं। वर्तमान में वे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, जहाज़रानी विभाग के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री हैं। उन्हें दिसम्बर 2009 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 9वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया। नितिन गडकरी 52 साल की उम्र में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बनने वाले पार्टी के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने।

जन्म एवं शिक्षा

नितिन गडकरी का जन्म 27 मई 1957 को महाराष्ट्र राज्य के नागपुर जिले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ‘जयराम रामचंद्र गडकरी’ तथा उनकी माता का नाम ‘भानुतई गडकरी’ था। उनके पिता संघ के एक सामान्य कार्यकर्ता थे और उनकी माता एक मशहूर प्रचारक थीं। नितिन गडकरी ने वाणिज्य में परास्नातक और उन्होंने कानून तथा बिजनेस मनेजमेंट की पढ़ाई भी की है।

राजनीति में प्रवेश

नितिन गडकरी ने पहले ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के लिए कार्य किया। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। बाद में वे 23 वर्ष की आयु में ‘भारतीय जनता युवा मोर्चा’ के अध्यक्ष बने। नितिन गडकरी की स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर बहुत जानी पहचानी नहीं रही है, लेकिन वे RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के प्रिय माने जाते हैं, क्योंकि वे संघ के एक प्रतिबद्ध और निष्ठावान स्वयंसेवक हैं। नितिन गडकरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले महाराष्ट्र में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। वे महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी हैं। लोक सभा के चुनाव के समय प्रधानमंत्री ‘मनमोहन सिंह’ के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक बयान देने के लिए वे विवादों में घिरे और चुनाव आयोग ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया।

मंत्री पद

नितिन गडकरी सन 1995 में महाराष्ट्र में शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार में लोक निर्माण मंत्री बनाए गए और 4 वर्ष तक मंत्री पद पर रहे। वे एक मंत्री के तौर पर अपने अच्छे कामों और अपनी छवि की वजह से जनता के प्रिय रहे। सन 1989 में वे पहली बार विधान परिषद के लिए नियुक्त किए  गए थे, लेकिन उससे पहले सन 1983 में वे चुनाव हार गए थे। वे पिछले 20 वर्षों से विधान परिषद के सदस्य हैं और आख़िरी बार सन 2008 में विधान परिषद के लिए नियुक्त किए गए थे। वे महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। उन्होंने अपनी पहचान ज़मीन से जुड़े एक कार्यकर्ता के रूप में बनाई है। वे एक राजनेता के साथ-साथ एक किसान और एक व्यापारी भी हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

लोक सभा चुनावों में लगातार दूसरी बार हार के बाद भाजपा में जो उथल पुथल थी, उससे उबरने के लिए RSS ने पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों के बदलने की बात कही थी। जब संघ ने यह कहा कि नया अध्यक्ष दिल्ली से नहीं होगा, तो नेता की तलाश हुई, जिसमें नितिन गडकरी के साथ गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री ‘मनोहर पारिक्कर’ का भी नाम निकलकर सामने आया, लेकिन ‘लालकृष्ण आडवाणी’ के बारे में मनोहर पारिक्कर के विवादास्पद बयान ने उनका पत्ता काट दिया और इस तरह उनका रास्ता अधिक आसान हो गया। आख़िर में लालकृष्ण आडवाणी की राय पर नितिन गडकरी के नाम पर RSS ने अपनी मुहर लगा दी। 19 दिसंबर को भाजपा के संसदीय बोर्ड में उन्हें सर्वसम्मति से नया अध्यक्ष चुनने के लिए सहमति बन गई। पार्टी के संविधान के अनुरुप उनका कार्यकाल 3 वर्ष का निश्चित हुआ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में इनका कार्यकाल 1 जनवरी 2010 से 22 जनवरी 2013 तक रहा। इनके बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ‘राजनाथ सिंह’ को भाजपा पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।