शहंशाह अकबर और बीरबल अपने मंत्रियो के साथ दरबार में जाते हैं।, शहंशाह अकबर दरबार में जाकर अपने मंत्रियों के साथ बैठक करते हैं और उस बैठक में मंत्री सुखदेव सिंह अपने शहंशाह अकबर से बोलता है कि हर किसी को दान धर्म करना चाहिए, खासकर साधूसंतो और खुदा के बन्दों को।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – दरअसल हुजूर…! हमें पीरपैगम्बर और साधूसंतो की सेवा करनी चाहिए, उनके जरिये भगवान हमारी मुराद पूरी करते हैं।

शहंशाह अकबर ने कहा – हम हमेशा साधूसंतो की सेवा करते आये हैं, और हम उनको खूब खिलाते हैं, हम हमेशा कपड़े, अनाज और धन दान करते हैं। हम अक्सर मंदिरों और दरगाहों पर जाते हैं और उनके रखरखाव में काफी रकम भी खर्च करते हैं। आखिर साधुसंत, पीरपैगम्बर और खुदा के बन्दे, जो हमारी मुराद खुदा तक पंहुचाते हैं। उसके बाद शहंशाह अकबर ने बीरवल से पूछा बीरबल आप चुप क्यों हो? क्या आप हमसे सहमत नहीं हो?

बीरबल बोले – माफ़ कीजिये जहांपना…. पर मुझे ऐसा नही लगता।

शहंशाह अकबर बोले – बीरबल आप ये कैसे कह सकते है? सारी दुनिया साधू-संतो और पीर-पैगम्बर को मानती है। उनके मंदिरों और दरगाहों पर सजदा करती है और लाखों लोगों की इन जगहों पर मुरादें पूरी होती हैं।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – जी हाँ… जनाब हद है, खुद को अलग साबित करने के लिए ये कैसे कह सकते हैं। दुनिया भर के हजारों लाखों लोग मंदिरों और मस्जिदों में जाकर प्रार्थना करते हैं और वहां उनकी मुरादें पूरी होती हैं। ये करिश्मा इन्ही पाक हस्तियों की वजह से होता है। हाय हुजुर…..

शहंशाह अकबर बोले हाँ.. ये यकीनन सच है।

बीरबल ने अकबर से कहा इन्सान के विश्वाश की वजह से ये चमत्कार होते हैं साबित, साधूसंतो के कारण नहीं।

शहंशाह अकबर ने कहा – विश्वास, खुदा के नेक बन्दे से बड़ा विश्वास कैसे हो सकता है।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – जी हुजुर…. हमारी मनोकामना पूर्ण होने के लिए विश्वास ही नहीं होता।

शहंशाह अकबर बोले बीरवल से – बीरबल आप बेतुकी बात कर रहे हैं, विश्वाश खुदा के बन्दों से ज्यादा अब नहीं हो सकता।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…. मेरा मानना ये है, कि पवित्र जगहों पर या संतो पर लोगों का विश्वाश ही अहम होता है, जो मन की ईच्छा पूरी करता है, न ये मंदिर न ये साधू-सन्यासी।

शहंशाह अकबर बोले बीरवल से – ठीक है बीरवल, बहुत हो चुका, अब हम आपकी बेतुकी बातें और नहीं सुनना चाहते। आप ने जो कहा उसे साबित करें, वर्ना आपको सरेआम सबके सामने बेतुकी बातों की माफ़ी मांगनी होगी।

बीरबल ने अकबर से कहा – माफ़ करिए हुज़ूर….. मैंने आपको परेशान किया। मेरा यकीन करो, मेरी बातों का मतलब किसी मंदिर या मस्जिद या संतो का अपमान करना नहीं था, मैं आपको ये साबित कर दिखाऊंगा कि विश्वास ही सबसे जरूरी है, लेकिन इसके लिए दो महीने का वक्त चाहिए।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – 2 महीने…. चलिए ये ठीक है, आप को 2 महीने दिए, पर हमें नहीं लगता आप खुद को साबित कर पायेंगे, भले ही 2 या 20 या 200 साल भी लें, हमें नहीं लगता आप साबित कर पाएंगे, इसलिए इस बार हार मानने के लिए तैयार रहें बीरबल।

बीरबल ने अकबर से कहा – मुझे मौका देने के लिए शुक्रिया जहांपना, मैं आपको परेशान करने के लिए माफ़ी मांगना चाहता हूँ। बीरबल अकबर के दरबार से बात को साबित करने के लिए चले जाते हैं।

बीरबल ने अपने सेवक से कहा – सेवक राम….।

बीरबल का सेवक बोला – जी जनाब….।

बीरबल बोला अपने सेवक से – सेवक राम, मेरे लिए ऐसे कारीगर को ढूढ़ों, जो एक मंदिर बना सके, यमुना नदी के किनारे मेरी जमीन पर।

बीरबल का सेवक बोला – मंदिर जनाब।

बीरबल बोला अपने सेवक से – हाँ एक मंदिर… और कारीगरों से कहो, ये मंदिर बहुत शानदार हो, और ये मंदिर ज्यादा बड़ा ना हो और छोटा होना चाहिए, बल्कि खूबसूरत हो और एक महीने में तैयार हो।

बीरबल का सेवक बोला बीरबल से – एक महीना… फिर तो ज्यादा लोगों की जरुरत होगी और मंदिर में किस भगवान की मूर्ति स्थापन करना चाहेंगे आप…।

बीरबल बोले अपने सेवक से – जितने भी लोगों की जरुरत हो उतने लोग लगाये आप, जैसे कि मैनें कहा, ये बड़ा न हो और एक महीने में तैयार हो जाना चाहिए, रही बात भगवान की।

उसके बाद बीरबल का एक महीना बीत जाता है और बीरबल का मंदिर तैयार हो जाता है।

बीरबल का सेवक – मुझे उम्मीद है कि मंदिर आपको पसंद ही होगा।

बीरबल बोले अपने सेवक से – बहुत बढ़िया किया है शुक्रिया…सेवक राम, अब तुम लोगों में इस मंदिर के बारे में कुछ अच्छी बातें फैला दो।

आगे अपने सेवक से बीरबल बोला – अब तुम इस मंदिर और शक्ति के बारे में जानकारी दो और एक पुजारी रखो, जिससे सख्त हिदायतें हो कि इस मंदिर की मूर्ति को कोई भी व्यक्ति देखना पाए और मूर्ति के कमरे का दरवाजा हमेशा बंद रखे और इस जगह की छवि बढ़ाने के लिए इसे बंद मूर्ति वाला मंदिर कहा जाये।

बीरबल का सेवक बोला – बंद मूर्ति वाला मंदिर, जनाब…. ये अच्छा है। इसका नाम ही अपने आप में लोगों के मान में आश्चर्य भरेगा।

बीरबल ने बोला अपने सेवक से – हाँ हाँ …… मैं चाहता हूँ, तुम इस मंदिर के बारे में किसी को जानकारी दो। इस जगह के करिश्माओं की कहानी सुनाओ, यहाँ की गई फरियाद के असर के बारे में बताओ और मुरादे मांगने पर कैसे मनोकामनायें पूरी होती हैं, मुझे यकीन है इस मंदिर के चर्चे दूर–दूर तक फैलेंगे।

बीरबल के सेवक ने कहा – जैसी आपकी मर्जी, जनाब…. में अभी शुरु करता हूँ। जनाब…. में कुछ कानाफूसी वालों को जानता हूँ, मुझे सिर्फ ये बात बताने की देर है और वे इसी को पल भर में बता देंगे।

बीरबल ने बोला अपने सेवक से – तो ठीक है, और जल्दी शुरु करो जल्दी…।

बीरबल के सेवक ने खेत में बने नए मंदिर के बारे में लोगों को बताया और जंगल में मंदिर के बारे में आग की तरह फैल गई बात। लोग काफी तादाद में मंदिर के दर्शन के लिए आने लगे।

शहंशाह अकबर के दरबार में एक मंत्री बोला – जहांपना…. क्या आपने बंद मूर्ति वाला मंदिर देखा है।

शहंशाह अकबर बोला अपने मंत्री से – बंद मूर्ति वाला मंदिर, नहीं हमने इसके बारे में नही सुना।

शहंशाह अकबर के दरबार में दूसरा मंत्री बोला – जहांपना… हजारो लाखोँ लोग इस मंदिर के दर्शन कर अपनी मनोकामनायें पूरी कर चुके हैं। मंदिर में बड़ी शक्ति है और जो कोई भी वहा मन्नत मागता है, उसकी इच्छा पूरी होती है। जहांपना….

शहंशाह अकबर अपने मंत्री से बोले – सचमुच तब तो, हमें जरुर जाना चाहिए। हमारे राज्य की पश्चिमी सीमा पर लड़ाई चल रही है और हम अपनी फौज की दुआ मांगना चाहते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल क्या आपने इस मंदिर के बारे में सुना है और जो ये कह रहे है क्या वो सच है।

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ …. जहांपना, मैने भी इस मंदिर के बारे में सुना है पर अभी तक मेरा वहां जाना नही हुआ है, हमनें तो सुना है, पर वहां कई तरह के चमत्कार होते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – लगता है आपको यकीन नहीं, फिर अभी तक आपने अपनी बात भी साबित नहीं की है, कहीं आप भूल तो नहीं गए हो, बेहतर तो यही होगा आप हमारे साथ इस मंदिर चलें, शायद हम ही ये साबित कर दें विश्वाश ज्यादा असरदार नहीं होता।

बीरबल बोला अकबर से – जरुर जहांपना… मेरी खुश किस्मती है, जो आपके साथ जाऊं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ठीक है… हम कल ही उस मंदिर में जायेंगे।

और अगला दिन हुआ, शहंशाह अकबर और बीरबल अपने साथियों के साथ उस मंदिर में पहुंच जाते हैं। शहंशाह अकबर ने देखा, मंदिर के आगे हजारों लाखों की संख्या में भीड़ लगी हुई थी।

शहंशाह अकबर ने बोला बीरबल से – देखो बीरबल…. अपनी आंखों से देखो… इस जगह का करिश्मा कितने भक्त और मुरीद खीचें चलेआए हैं।

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ … हुजूर वाकई में ऐसा ही लग रहा है।

शहंशाह अकबर बोले – हाँ.. हम बंद मूर्ति से ये दुआ मांगते है कि हर हाल में जीत हमारी सेना की होनी चाहिए।

तभी शहंशाह अकबर का मंत्री एक सन्देश लेकर आया और बोला ….. जहांपना खुश खबरी लाया हूँ।

शहंशाह अकबर बोले मंत्री से – बोलो क्या सन्देश लाये हो?

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – पश्चिमी में हमारी फौज ने दुश्मन को हरा दिया है और वहां के राजा ने हथियार डाल दिए हैं।

शहंशाह अकबर ने इस खुश-खबरी को सुनते ही, जो मंत्री सन्देश लेकर आया था, उसको अपने गले में पड़ी माला को मंत्री को इनाम के रूप में दिया।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – देखा बीरबल आपने इस जगह का करिश्मा हमारे मुंह से मुराद निकली नहीं और पूरी भी हो गयी, अब आपको और क्या सबूत चाहिये।

बीरबल बोला अकबर से – जहांपना…. मुझे तो नहीं लगता। मुझे अभी भी लगता है जाफना… ये मंदिर नहीं, लोगों का विश्वास है। इन सब करिश्माओं और चमत्कारों की असली वजह है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल आप ये कैसे कह सकते हैं। जबकि आपने अपनी आखों से इस मंदिर की शक्ति को देखा है। अब हम एक लव्ज भी नहीं सुनना चाहते बीरबल…. और आपकी शक्ल भी नहीं देखना चाहते, आपने हमें मायूस किया है।

बीरबल मंदिर के सामने हाथ जोड़कर खड़े होते हैं, मंदिर की बंद मूर्ति से दुआ मांगते हैं, शहंशाह के दिल में रेहम पैदा करो, ताकि ये मुझे माफ़ करें।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – अच्छा अब तुम अपनी इच्छा करने के लिए इस मंदिर की ताकत का इस्तेमाल कर रहे हो, अब हार मान जाओ बीरबल…।

बीरबल बोला अकबर से – ऐसा ही होगा हुजूर, अगर आप थोडा वक्त और इंतजार करें तो, सुखदेव सिंह जी अगर आपको हर्ज न हो, तो मंदिर के अंदर जाकर बंद मूर्ति के दरवाजे को खोलिए और उसके अंदर से मूर्ति को यहाँ ले आईये।

बीरबल बोला अकबर के मंत्री से – बंद मूर्ति के मंदिर की चाबी लेकर जाओ और दरवाजा खोलने को बोलो। और बीरबल बोला जहांपना…. फिक्र ना करना। जहांपना… इसमें कोई गुनाह नहीं है। आपको खुद इसके बारे में पता चल जायेगा। में जानता हूँ, क्योंकि जिसने मंदिर बनवाया, वो मैं ही हूँ।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तो तुम हो… । हम कुछ समझे नहीं बीरबल।

बीरबल बोला अकबर से – में अभी आप को सब कुछ समझाता हूँ। जहांपना…..

बीरबल बोला अकबर के मंत्री से – सुखदेव सिंह जी कृपा मूर्ति को हमारे पास लेकर आयेंगे।

शहंशाह अकबर ने मंत्री सुखदेव सिंह से बोला – बंद मूर्ति मंदिर से मूर्ति लेकर आओ और मंत्री सुखदेव सिंह जी मंदिर के अंदर जाते हैं और मंत्री मंदिर के अंदर से कपडे से ढ़का फूलदान लेकर शहंशाह अकबर के सामने ले आया।

शहंशाह अकबर बोले – ये…. ये तो हमारा पसंदीदा फूल दान है, जो हमें एक चीनी यात्री ने दिया था और ये हमारे कमरे से काफी दिनों से गायब है।

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ …. जहांपना…. माफ़ कीजियेगा, मैंने ही यहाँ पर रखा था। अब में आपको सब कुछ बताता हूँ और बीरबल ने अपनी बीती कहानी शहंशाह अकबर को बताई। ये मंदिर कैसे मैंने बनवाया और बीरबल ने ये भी कहा तो मुझे लगता है कि विश्वास की शक्ति को साबित करने के लिए ये सबूत काफी है। जहांपना…..

शहंशाह अकबर बीरबल से बोले – बहुत खूब बीरबल…. शाबाश बीरबल….. शाबाश…. आप बिल्कुल सही थे। हमेशा की तरह विश्वास ही सबसे ताकतवर है, जो किसी भी मंदिर या संत से ज्यादा असरदार है और अब इस बंद मूर्ति वाले मंदिर का क्या करें। बीरबल… इसका कैसा इस्तमाल होगा।

बीरबल बोला अकबर से – क्यों न इसे इस शहर में आने वाले यात्री और मुसाफ़िर के लिए मुफ्त सराय में बदल दिया जाये।

शहंशाह अकबर ने कहा बीरबल से – बहुत बढ़िया सुझाव है बीरबल…. शाबाश बीरबल….. शाबाश

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया जहांपना……  शुक्रिया…..।।

सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि विश्वास ही आदमी का धर्म है