शहंशाह अकबर और बीरबल अपने अन्य मंत्रियों के साथ सभा में बैठे हुये थे। दरबार में एक सैफ अली नाम का किसान आया और बोला……!

शहंशाह अकबर बोले सैफ अली किसान से – बोलो…..! कौन हो तुम ? हमसे क्या चाहते हो ?

सैफ अली किसान बोला अकबर से – जहाँपनाह……! मेरा नाम सैफ अली है। मैं एक किसान हूँ। मैं थोड़े से पैसे कमाकर में सीधी सादी जिंदगी जी रहा था। छ: महीने पहले तक मैं अपनी बीबी के साथ ख़ुशी से रह रहा था, फिर वो चल बसी।

शहंशाह अकबर बोले सैफ अली किसान से – यह सुनकर हमें बहुत अफ़सोस हुआ। फिर क्या हुआ ?

सैफ अली किसान बोला अकबर से – बीबी के गुजर जाने के बाद, मैं बिलकुल मायूस हो गया था। क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा ? हमारी कोई औलाद भी नहीं, तो मैं बिलकुल अकेला महसूस करने लगा।

शहंशाह अकबर बोले बात सुनकरओ…हो…!

सैफ अली किसान बोला अकबर से – एक दिन काजी अब्दुल्लाह मिले।

काजी अब्दुल्लाह बोले सैफ अली किसान से – सैफ अली, तुम इतने दु:खी और मायूस क्यों लग रहे हो ?

सैफ अली किसान बोला काजी अब्दुल्लाह से – आप जानते हैं, काजी साहब कुछ दिन पहले मेरी बीबी चल बसी थी। और अब मुझे जीने की कोई चाह नहीं है।

काजी अब्दुल्लाह बोले सैफ अली किसान से – अरे…. अरे…..! तुम्हें ऐसा नहीं सोचना चाहिए। खुदा की खुदाई, कमाल है। तुम्हें इस तरह मायूस नहीं होना चाहिए। तुमने सारी जिंदगी मेहनत की है। क्यों न तुम कुछ दिनों के लिए अजमेर चले जाओ ? खुदा के फजल से तुमको जीने का एक नया मकसद मिलेगा।

सैफ अली किसान बोला काजी अब्दुल्लाह से – जी काजी साहब….! आप ठीक कह रहे हो। मुझे यही करना चाहिए। मैं अजमेर चला जाऊंगा, फिर ख्वाजा के दरबार से ही जीने का नया मकसद मिलेगा। शुक्रिया…. काजी साहब…..!

और बताने लगा, सैफ अली किसान – मैं घर गया। और अगले दिन अजमेर जाने की तैयारी करने लगा। पर उस रात मुझे ख्याल आया कि मैं उम्र भर की जमा पूंजी का क्या करूँगा ? उसे कहाँ छोड़कर जाऊंगा ? पैसों के लिए किस पर भरोसा कर सकता हूँ। फिर मुझे काजी अब्दुल्ला का ख्याल आया। मैंने सोचा काजी साहब पर मैं भरोसा कर सकता हूँ। तो मैं अगले दिन उनके घर गया और उनसे मैंने लौटकर आने तक मेरी जमा पूंजी अपने पास रखने की दरखास्त दी।

काजी अब्दुल्लाह बोले सैफ अली किसान से – सैफ अली….! तुम्हारे आने तक, ये थैला मेरे पास रहेगा। पर पहले मेरे सामने, इस पर मोहर बंद लगा दो। हो सके तो तुम्हें इत्मीनान रहे कि इसे किसी ने नहीं खोला।

और बताने लगा, सैफ अली किसान – मैंने उसके सामने मोहर बंद कर दिया और उन्होंने वो थैला अपने पास रख लिया

और बोला सैफ अली किसान मैं अजमेर से लौटा। ये फैसला करने के बाद कि अब बाकी जिन्दगी बच्चों को अल्लाह और इबादत के बारे में सिखाने में गुजारूँगा। अपनी जमा पूंजी पर गुजर कर लूँगा। ये सोचकर में काजी साहब के पास, मैं अपने पैसे लेने गया।

काजी अब्दुल्लाह बोले सैफ अली किसान से – मुझे खुशी है कि तुमने अब अपनी बाकी जिन्दगी बच्चों को धर्म और खुदा के बारे में तालीम देने का फैसला किया है। ये लो मैंने तुम्हारे पैसे को हिफाजत से रखा है। जरा जांच लो, मोहर ठीक है न…..!

और पैसे की थैली को सैफ अली किसान ने देखा ओर बोले…..!  

सैफ अली किसान बोला काजी अब्दुल्लाह से – शुक्रिया…. काजी साहब…..! मेरे पैसों की देखभाल करने के लिए, मोहर वैसे ही है। आपका फिर से शुक्रिया…..!

और कहकर सैफ अली किसान अपने घर चला गया और घर जाकर सैफ अली किसान ने अपना पैसों का थैला खोला और देखा तो बोले…..!

सैफ अली किसान बोला पैसों की थैली खोलकर – ओ…हो..! या खुदा ये कैसे हो सकता है ? मेरे सोने के सिक्के कहाँ गए…. ?

सैफ अली किसान ने देखा कि थैली के अंदर सोने के सिक्के की जगह पत्थर निकले। सैफ अली किसान यह देखकर वापस काजी अब्दुल्लाह के घर गया। काजी अब्दुल्लाह ने सैफ अली किसान को देखा तो बोले……!

काजी अब्दुल्लाह बोले सैफ अली किसान से – क्या हुआ सैफ अली…? बच्चों को पढ़ाने में सलाह चाहिए। फिर से कैसे आना हुआ ?

सैफ अली किसान बोला काजी अब्दुल्लाह से – काजी साहब…..! घर जाकर जब मैंने वो पैसों का थैला खोला, तो मेरे रखे हुये पैसों की जगह पत्थर निकले और मेरे तो होश उड़ गए।

काजी अब्दुल्लाह बोले सैफ अली किसान से – क्या मतलब है ? तुम्हारा…! क्या तुमने मेरे पास रखने से पहले ? वो थैला मुझे खोलकर दिखाया था। क्या तुमने खुद मोहर नहीं लगाई थी ? फिर यहाँ आकर….! मुझसे ये बात करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? अब जाओ यहाँ से और दूर हो जाओ। मेरी नजरों से….!

सैफ अली किसान बोला काजी अब्दुल्लाह से – काजी साहब…..! मेरे साथ ऐसा मत कीजिये। मेरी जिंदगी भर की कमाई है। मैं उन पैसों के बिना अपना बुढ़ापा कैसे गुजारूँगा ?

काजी अब्दुल्लाह बोले सैफ अली किसान से – तुम मुझ पर चोरी का इल्जाम लगा रहे हो। सुना नहीं तुमने…..! दफा हो जाओ। यहाँ से…..! वर्ना, मैं तुम्हें मुझ पर झूठा इल्जाम लगाने के जुर्म में गिरफ्तार करवा दूंगा। निकल जाओ…..!

इस तरह सैफ अली किसान काजी अब्दुल्लाह के घर से वापस आ गया। और शहंशाह अकबर को इस तरह अपनी बात बताई…..!

सैफ अली किसान बोला अकबर से – आपके पास आने के अलावा, मेरे पास और कोई चारा नहीं था। हुजूर….! आप ही मेरे पैसे वापस दिल वा सकते हैं। काजी साहब जैसे, ऊँचे अफसर से…! सिर्फ, आप ही मेरे पैसे वापस दिल वा सकते हैं।

शहंशाह अकबर ने सैफ अली किसान की बात सुनकर बीरबल से बोले……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल……! तुम क्या सोचते हो ? क्या तुम इस मामले में सच का पता लगा सकते हो ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! मैं कुछ और जानना चाहूँगा।

बीरबल बोले सैफ अली किसान से – क्या तुम्हारे पास वो थैला है…?

सैफ अली किसान ने अपना पैसों वाला थैला बीरबल को दिखाया और बीरबल ने वो थैला देखकर शहंशाह अकबर से कहा….!

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! मुझे इस मामले में सच जानने के लिए थोडा समय चाहिए। मुझे दो दिन का वक्त दीजिये।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – यकीनन बीरबल….!

शहंशाह अकबर बोले सैफ अली किसान से – इस बीच सैफ अली….! तुम, हमारे यहाँ मेहमान बनकर रह सकते हो। पर अगर, हमें ये पता चला कि तुम झूठे हो, तो तुम्हें लम्बे समय तक हमारे कैद खाने में मेहमान बनना पड़ेगा।

सैफ अली किसान बोला अकबर से – शुक्रिया हुजूर……! मैं आपको जुबान देता हूँ, कि मैंने सिर्फ सच और सच ही कहा है।

और बीरबल….! सैफ अली किसान की बातों को सोचते हुये अपने घर गए और एक चाकू से अपनी पोशाक काट दी। अपने सेवक राम से बोले….!

बीरबल बोले सेवक राम से – सेवक राम…..!

सेवक राम बोला बीरबल से – जी जनाब…..!

बीरबल बोले सेवक राम से – सेवक राम, ये मेरी पसंदीदा पोशाकों में से एक है। थोड़ी फट सी गई है,  क्या तुम शहर के सबसे अच्छे दर्जी का पता लगा सकते हो, जो इसे रफू कर सके। रफू इस तरह से होनी चाहिए, कि पोशाक सिल भी जाये और सिलाई भी नहीं दिखनी चाहिए।

सेवक राम बोला बीरबल से – बिल्कुल जनाब…..! मैं अभी बाजार जाकर पता लगाता हूँ। मैं जरुर किसी अच्छे दर्जी को ढूंढ़ लूँगा, जो ये काम कर सके।

बीरबल बोले सेवक राम से – नहीं… सेवक राम….! मुझे एक अच्छा दर्जी नहीं, सबसे अच्छा दर्जी चाहिए। तुम इस शहर के सबसे अच्छे दर्जी का पता लगाओ।

और सेवक राम बीरबल की पोशाक को बाजार जाकर सबसे अच्छे दर्जी से सिलवाकर लाया। और बीरबल बोले….!

बीरबल बोले सेवक राम से – बहुत बढ़िया…..। पता ही नहीं चल रहा है, कि ये पहले फटी हुई थी और रफू भी कमाल का किया है। कोई आसानी से पता नहीं लगा सकता। बताओ, ये काम किसने किया है ?

सेवक राम बोला बीरबल से – जनाब…..! गोपाल नाम का एक दर्जी है। उसी ने ये काम किया है। मेरे लिए, मैंने जिनसे भी पूछा सब ने उसी का नाम बताया।

बीरबल बोले सेवक राम से – बहुत खूब….! तुम, उससे कहो मुझसे आकर यहाँ मिले। मुझे और कपड़ो की रफू करानी है।

अगले दिन बीरबल शहंशाह अकबर के दरबार में गए। तो शहंशाह अकबर बोले….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल….! क्या तुमने सैफ अली के मामले में सच का पता लगा लिया ? या कुछ और वक्त चाहिए।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! मैंने सच का पता लगा लिया है। आप सैफ अली और काजी अब्दुल्लाह को बुलवा लीजिये। मैं सारी सचाई आपके सामने रख दूंगा। हुजूर…!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – जरुर बीरबल….!

शहंशाह अकबर बोले सिपाहियों से – सिपाहियों, सैफ अली और काजी अब्दुल्लाह को तुरंत दरबार में हाजिर किया जाये।

सैफ अली और काजी अब्दुल्लाह शहंशाह अकबर के दरबार में पेश हो जाते हैं।

बीरबल बोले सैफ अली किसान से – सैफ अली…! क्या ये वही थैला है, जो तुमने काजी अब्दुल्लाह के पास रखवाया था।

सैफ अली किसान बोला बीरबल से – जी हुजूर….! ये मेरा ही थैला है।

बीरबल बोले काजी अब्दुल्लाह से – काजी साहब…..! क्या आप ? इस थैले को पहचानते हैं।

काजी अब्दुल्लाह बोले बीरबल से – हाँ…. बिलकुल….! वैसा ही थैला लगता है। और ये मोहर भी मेरी बेशक अभी खुली है। पर इसी ने, इस पर मोहर लगाई। और वापस लेने से पहले, इसी ने इसे जाँच करके देखा। तब ये, खुली नहीं थी। थैले में क्या था ? ये मैंने देखा भी नहीं। ये कहता है, सोने के सिक्के थे। मैं कैसे यकीन कर लूँ ? हुजूर….! ये झूठ भी तो बोल सकता है।

बीरबल बोले दरबार में – गोपाल दर्जी को जल्द बुलाया जाये।

शहंशाह अकबर के दूत ने आवाज लगाई – गोपाल दर्जी दरबार में हाजिर हो।

और गोपाल दर्जी दरबार में पेश हो जाते हैं।

बीरबल बोले गोपाल दर्जी से – हमें बताओ गोपाल…! क्या हाल ही में काजी अब्दुल्लाह का कोई काम किया है ?

गोपाल दर्जी बोला बीरबल से – जी जहाँपनाह……! काजी अब्दुल्लाह ने मुझसे अपना पैसे का थैला रफू करवाया था, जो फट गया था।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! काजी अब्दुल्लाह को सजा मिलनी चाहिए। क्योंकि सैफ अली के थैले को काटकर उसमें से पैसे निकाल लिए, फिर उसने पैसों कि जगह पत्थर रखकर गोपाल से रफू करने को कहा। झूठा और धोखेवाज है।

काजी अब्दुल्लाह गुठनों के बल हाथ जोड़कर शहंशाह अकबर के सामने खड़ा हो गया और बोला….!

काजी अब्दुल्लाह अकबर से – जहाँपनाह……! मुझे माफ़ कर दीजिये। मैं लालची हो गया था। मैं दोबारा ऐसी गलती नहीं करूँगा। मुझे इस बार माफ़ कर दीजिये।

शहंशाह अकबर बोले काजी अब्दुल्लाह से – इतने बड़े ओहदे पर रहकर तुम, ऐसी घटिया हरकत कैसे कर सकते हो ? लोग तुमसे सलाह और मदद की उम्मीद रखते हैं। ओर तुम धोखेबाजी करते फिरते हो। नहीं…..! तुम्हे माफ़ नहीं किया जा सकता। हम तुम्हे एक साल कैद की सजा देते हैं।

शहंशाह अकबर बोले सिपाहियों सेसिपाहियों, बंद कर दो इसे कैदखाने में।

और दो सिपाही काजी अब्दुल्लाह को कैदखाने में बंद कर देते हैं।

शहंशाह अकबर बोले सैफ अली किसान से – सैफ अली….! फ़िक्र मत करो। तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस मिल जायेंगे और तुम्हारे नेक काम में हम भी तुम्हारी मदद करेंगे। हम तुम्हारे लिये एक मदरसा बनवा देंगे। जहाँ तुम बच्चों को मदरसी तालीम दे सको। जाओ…..! खुदा खैर करे।

सैफ अली किसान बोला अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह……!

सैफ अली किसान बोला बीरबल सेशुक्रिया राजा बीरबल…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल….! एक बार फिर तुम्हारी सूझबूझ और एक पल की नजर ने एक चोर और धोखेवाज को पकड़ा। तुम्हें काजी करतूत पर शक कैसे हुआ ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर……..! जब मैंने सैफ अली को ये कहते हुए सुना कि काजी ने उससे थैली को मोहर बंद करके और जाँचने को कहा। तभी, में समझ गया कि पैसे चालाकी से निकल लिये गए थे। इसलिये मैंने थैले की ध्यान से जाँच की। और ये सिलाई देखी। अब मुझे सिर्फ शहर के सबसे अच्छे दर्जी का पता लगाने की देर थी। हुजूर….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – शाबास…….! बीरबल शाबास……! तुमने फिर नई मिसाल कायम की। शाबास…..!

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया हुजूर……!

सीख

हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि चोर और धोखेवाज को पकड़ने के लिये हमें सूझबूझ की जरुरत होती है।