हरिद्वार से दिल्ली चली किसान क्रांति यात्रा आखिरकार दिल्ली के किसान घाट पर पहुंचकर समाप्त हो गई। मंगलवार को दिल्ली में दाखिल होने से रोके जाने के बाद किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर पर डेरा डाला था, लेकिन देर रात किसानों को दिल्ली में घुसने की इजाजत मिल गई। इसके बाद हजारों किसान अपने ट्रैक्टर पर सवार होकर किसान घाट पहुंचे और चौधरी चरण सिंह की समाधि पर फूल चढ़ाकर इस यात्रा को समाप्त कर दिया गया। आंदोलन समाप्त होने के बाद ट्रैफिक नॉर्मल हो गया है, और NH24 और मेरठ एक्सप्रेस वे पर अब ट्रैफिक पहले की तरह सामान्य हो गया है।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि किसान घाट पर फूल चढ़ाकर हम अपना आंदोलन समाप्त कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार किसान विरोधी है और हमारी कोई भी मांग पूरी नहीं हुई हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अब आंदोलनकारी किसान अपने-अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। हालांकि, दिनभर किसानों और पुलिस के बीच जोरदार संघर्ष देखने को मिला और किसानों को रोकने के लिए ‘वाटर केनन’ से लेकर ‘आंसू गैस’ के गोलों का इस्तेमाल हुआ। दिल्ली में दाखिल होने से रोके जाने पर किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की। सरकार ने किसानों की कुछ मांगें मानने पर सहमति जताई थी और कुछ के लिए समय मांगा। बाद में किसानों ने अपनी मांगों के संबंध में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों पर भी भरोसा करने से इनकार कर दिया।

किसानों की मांगें क्या हैं?

किसान सबसे पहले अपने लिए कर्जमाफी चाहते हैं, लेकिन इस मांग को सरकार ने वित्तीय मामला कहकर फिलहाल के लिए लटका दिया है। इसके अलावा किसानों ने सिंचाई के लिए सस्ती बिजली और पिछले साल से बकाया गन्ने की फसल का भुगतान करने की मांग की थी। किसान यह भी चाहते हैं कि 60 साल की उम्र पार करने वाले किसानों के लिए पेंशन दी जाए। एक प्रमुख मांग जल्द से जल्द स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने को लेकर भी है, इसमें कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों की सिफारिश की गई है। कर्ज के बोझ तले दबे और खुदकुशी करने वाले किसानों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई है। इसके अलावा मृतक किसानों के परिवारों के लिए घरों की भी मांग की गई। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने फसलों के लिए डेढ़ गुना कीमत की घोषणा तो कर दी, लेकिन खरीद तब शुरू होती है जब उपज बिक गई होती है, इसीलिए फसल का उचित मूल्य किसानों को मिलना चाहिए। किसानों ने डीजल के दाम घटाने से लेकर पाबंदी झेल रहे 10 साल पुराने ट्रैक्टर को फिर से इजाजत दिए जाने की मांग भी सरकार से की है।

सरकार पर विपक्ष का हमला

किसानों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर ट्वीट किया ”विश्व अहिंसा दिवस पर शांतिपूर्वक दिल्ली आ रहे किसानों की बर्बर पिटाई से शुरू हुआ। अब किसान देश की राजधानी आकर अपना दर्द भी नहीं सुना सकते।” विपक्ष का कहना है कि गांधी जयंती के अवसर पर किसान शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के लिए राजघाट जाना चाहते थे। वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने भीड़ को तितर-बितर करने और दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हल्का बल प्रयोग किया है।

किसानों ने 200 किमी लंबी यात्रा की

किसानों ने बीते 23 सितंबर को हरिद्वार से 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबी ये पदयात्रा शुरू की थी। सैकड़ों ट्रैक्टरों में सवार होकर आए किसानों में कुछ महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे, जिन्हें पुलिस की कार्रवाई में काफी चोट भी आई हैं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने के लिए तीन हजार से ज्यादा कर्मियों को तैनात किया था। किसानों के प्रदर्शन के चलते गाजियाबाद में स्कूल-कॉलेज भी बंद रखे गए हैं।