एक तेली और कसाई में पैसे की थैली के ऊपर झगडा होता है। तेली बोला मेरी है और कसाई उस थैली को अपनी बताने लगा, तेली बोला राजा बीरबल के पास चलते हैं। तेली और कसाई राजा बीरबल के घर पहुंच जाते हैं।

बीरबल का सेवक बोला तेली और कसाई से – जी…. कौन हैं आप ? और आपको क्या चाहिए ?

तेली बोला बीरबल के सेवक से – मैं गंगू… हूँ! और मैं राजा बीरबल से मिलना चाहता हूँ। में उनसे इन्साफ़ चाहता हूँ।

बीरबल का सेवक बोला गंगू तेली से – लेकिन राजा बीरबल आराम कर रहें हैं। उनसे आप लोग कल दरबार में जाकर क्यों नही मिलते ?

गंगू तेली बोला बीरबल के सेवक से – नहीं…नहीं, हमें अभी उनसे मिलने दीजिये। ये आदमी एक चोर और झूठा है, मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता। हमें आज ही ये मामला सुलझाने दीजिये।

बीरबल का सेवक बोला गंगू तेली से – ठीक है….ठीक है, मैं जाकर देखता हूँ। अगर वो आप से अभी मिल सकते हैं। आप यहीं ठहरिये….।

बीरबल का सेवक बोला बीरबल से – हुजूर….! बाहर दो आदमी आप से मिलने के लिए आये हुये हैं। वो आप से इन्साफ़ चाहते हैं, मैंने उनसे कल दरबार में मिलने को कहा, पर वो अभी ही मिलना चाहते हैं।

बीरबल बोला अपने सेवक से – ठीक है, उन्हें अंदर ले आओ।

बीरबल का सेवक बोला तेली और कसाई से – अंदर आइये। राजा बीरबल आप से अभी मिलेंगे।

तेली और कसाई बीरबल से बोले – आदाब हुजूर…..!

बीरबल बोला तेली और कसाई से – हाँ… जी…..! क्या समस्या है?

तभी राजा बीरबल के घर के दरवाजे को कोई खटखटाने लगा। राजा बीरबल बोले अपने सेवक राम से कौन है? जाइये देखिए। बीरबल के सेवक ने देखा कि शहंशाह अकबर आये हैं।

बीरबल का सेवक बोला अकबर को देखकर – आदाब… आदाब…. जहाँपनाह….!

बीरबल ने देखा शहंशाह अकबर आये हैं, तो बीरबल तुरंत उनके पास आये।

बीरबल बोले अकबर से – आदाब हुजूर……! आपने मुझे बुलबा दिया होता, अगर कुछ काम था तो।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – नहीं मैं सिर्फ बगीचे में सैर कर रहा था, सोचा क्यों न तुमसे मिलता चलूं।

तेली और कसाई बोले अकबर से – आदाब हुजूर….!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ये कौन हैं बीरबल…..!

बीरबल बोला अकबर से – मैं खुद भी जानना चाहता हूं हुजूर…..! इन्हें इन्साफ़ चाहिये, लेकिन मैं इन्हें बाद में आने को कहूँगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – नहीं… नहीं…! मैं तुम्हेँ इन्साफ़ करते देखना चाहता हूँ।… शुरु करो।

बीरबल बोला गंगू तेली से – हाँ…. तो आप कहिये। कहिये आप दोनों कौन हैं? और समस्या क्या है ?

गंगू तेली बीरबल को अपनी बीती हुई बात बताने लगा और बोला – जहाँपनाह….! हुजूर मैं गंगू तेली हूँ। मैं तेल बेचता हूँ। मैं शहर के काफी व्यापारियों और दुकानों में तेल बेचता हूँ। आज मेरा कारोबार अच्छा हुआ और में इसकी दुकान से गुजर रहा था।

और बोला गंगू तेली – ये लछुराम कसाई है। इसने मुझे अंदर बुलाया।

 कसाई बोला गंगू तेली से – ऐ तेल वाले इधर आओ।

कसाई बोला गंगू तेली से – मुझे थोड़ा तेल दो।

गंगू तेली बोला कसाई से – जी… जनाब….! कितना तेल चाहिए। आपको….

कसाई बोला गंगू तेली से – मुझे सोचने दो….! मुझे एक माप तेल दे दो।

और गंगू तेली कसाई को एक माप तेल दे देता है….।

गंगू तेली बोला कसाई से – जनाब….ये लीजिये। 2 रुपये हुये, जनाब….।

कसाई बोला तेली से – 2 रुपये…! ये तो ज्यादा है। तुम तो बेईमानी कर रहे हो।

गंगू तेली बोला कसाई से – जनाब….! तेल महंगा हो गया है, मुझे व्यापारी को भी देना पड़ता है और कमाई इसमें कम है, मैं आपको ठग नहीं रहा। आप किसी से भी पूछ लें।

कसाई बोला तेली से – खैर सभी यही कहते हैं। तुम हमें ठग रहें हो। खैर ये लो पैसे, एक चाँदी का सिक्का है, अब मुझे छुटे दे दो।

और गंगू तेली की पैसों की थैली देखकर कसाई बोला – तुम थक गए होंगे। ये सारा दिन, ये बोझा उठाकर क्यों न अंदर हाथ धोकर मेरे साथ लस्सी पी लो। फिर काम पर चले जाना, क्या ख्याल है?

और गंगू तेली अपने पैसों की थैली और जिसमें तेल था। ये सारा सामान उसकी मेज पर रखकर हाथ धोने चला जाता है। कसाई ने गंगू तेली के पैसों की थैली पर हाथ लगाया, तो गंगू तेली ने कसाई को पैसों की थैली से हाथ लगाते हुये देख लिया।

गंगू तेली बोला कसाई से – अरे… क्या कर रहे हैं आप ? ये मेरे पैसे हैं।

कसाई बोला गंगू तेली का गलेबान पकड़कर – झूठे….ये मेरे पैसे हैं। तुम मुझ पर ये इल्जाम लगा रहे हो।

गंगू तेली बोला कसाई से – तुम्हारी ऐसी हिम्मत…! मैं तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगा।

गंगू तेली बोला बीरबल से –  और हमनें झगडा शुरु कर दिया। इसलिये हम यहाँ आये हैं। अब आप ही मेरे पैसे दिलवा सकते हैं।

बीरबल बोला कसाई से – तुम्हें क्या कहना है ? इस बारे में…..!

और कसाई अपने मन की बात बीरबल को बताने लगा।

कसाई बोला बीरबल से – जनाब….. ये आदमी एक झूठा और चोर है,

दरअसल बात कुछ ऐसी थी…….।  

गंगू तेली बोला कसाई से – जनाब….. जनाब…..! क्या आपको तेल चाहिये ?

कसाई बोला गंगू तेली से – नहीं….मुझे जरुरत नहीं।

गंगू तेली बोला कसाई से – जनाब…. आज मेरी बोहनी तक नहीं हुई। मुझसे एक नाप तेल ले लीजिये।

कसाई बोला गंगू तेली से – देखो मैंने कहा, मुझे आज जरुरत नहीं है, मेरे पास एक महीने का काफी तेल है।

गंगू तेली बोला कसाई से – जनाब……! मैं आपको छूट दे दूंगा। जनाब…..जनाब….एक नाप तेल ले लीजिये।

कसाई बोला गंगू तेली से – ठीक है…. ठीक है। मुझे एक माप तेल दे दो।

और गंगू तेली कसाई को तेल दे देता है।

 गंगू तेली बोला कसाई से – शुक्रिया जनाब…..! 2 रूपये हुये।

कसाई बोला गंगू से – ठीक है…और कसाई तेली को 2 रुपये दे देता है।

गंगू तेली बोला कसाई से – जनाब….. क्या मैं हाथ मुंह धो-सकता हूँ ? सारा दिन ये बोझा लटकाकर में थक गया हूँ। सिर्फ हाथ मुहं धोकर थोडा चुस्त होना चाहता हूँ।

कसाई बोला गंगू तेली से – ठीक है…..पर जल्दी करो। हाथ मुहं वहां धोलो।

और कसाई बीरबल को बताने लगा कि मेरी मेज पर पैसों की थैली रखी हुई थी। तो गंगू तेली को पैसों की थैली को पकड़ते मैंने देखा।

कसाई बोला गंगू तेली से – ऐ…. ये क्या कर रहे हो ? रुको…. चोर कहीं का… मेरे पैसे वापिस करो।

गंगू तेली बोला कसाई से – नहीं…. ये मेरे पैसे हैं। नहीं.. ये मेरा थैला है।

कसाई बोला गंगू तेली से – तुम्हारी जुर्रत कैसे हुई। मेरा पास भीख मांगने आये। मैने मदद की। तूने ये क्या किया…. ? मेरे पैसे चुराये।

गंगू तेली बोला कसाई से – तुम मुझे लूटना चाहते हो। ये मेरे पैसे हैं। मैं तुम्हेँ नहीं दूंगा।

कसाई बोला बीरबल से – लोग जमा हो गये और सलाह दी कि हुजूर…. हम आपके पास जायें। और बीरबल से बोला आप ही मेरी मदद करें। हुजूर…..

गंगू तेली बोला बीरबल से – नहीं जनाब….. ये मेरे पैसे हैं। और ये आदमी झूठ बोल रहा है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – ओह..हो…. बीरबल अब तुम ये समस्या कैसे सुलझाओगे ? कोई गवाह भी नहीं है, दोनों एक दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं, अब तुम इसका इंसाफ कैसे करोगे।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! इस समस्या का हल है, माफ़ कीजियेगा। हुजूर…. पर आप गलत थे, एक गवाह है। इस बात का…..!

गंगू तेली बोला बीरबल से – हुजूर…..! आपकी गलतफहमी है, तब इसने पैसे लेने चाहे, वहां कोई नहीं था।

बीरबल बोला गंगू तेली से – नहीं तुम गलत हो। एक गवाह मौजूद था। वो पैसों का थैला, वो ही गवाह है…..।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल….तुम ठीक तो हो। भला… ये पैसों का थैला का एक गवाह, एक थैला बात कैसे कह सकता है ?

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! बस थोड़ी देर इंतजार कीजिये। मुझे यकीन है, ये थैला जरुर बोलेगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – कमाल है…. ये तो काफी दिलचस्प होगा। जल्दी करो…..!

बीरबल बोले अपने सेवक से – एक बर्तन में पानी ले आओ।

बीरबल का सेवक एक वर्तन में पानी लेकर आया और बीरबल बोला- ‘अब ये पैसों का थैला मुझे दो।‘ कसाई ने पैसों का थैला बीरबल को दिया। बीरबल ने थैले के पैसे पानी के वर्तन में डाल दिए।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! सचाई सामने है। ये तेली सच बोल रहा था। ये पैसों का थैला उसी का है।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तुम ये कैसे कह सकते हो ? बीरबल…… तुम्हें यकीन है।

बीरबल बोला अकबर से – मुझे पूरा यकीन है। हुजूर…….! मैं ये साबित कर सकता हूँ।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – तो साबित करो…..।

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! अगर आप देखें तो पानी के ऊपर तेल की एक परत है, ये तेल की परत, इन सिक्का में से आई और ये तेल सिर्फ तेली के हाथो में से ही आ सकती है। जब वो थैले में सिक्के डालता था और निकलता था, सिक्कों पर तेल लगने का ओर कोई कारण हो ही नहीं सकता।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – शाबाश….. शाबाश……! हमें खुश कर दिया तुमने, बडे होशियार हो तुम….. बहुत खूब ….।

गंगू बोला बीरबल से – शुक्रिया जनाब…..! बहुत-बहुत शुक्रिया….!

कसाई बोला शहंशाह अकबर और बीरबल से – मुझे माफ़ कीजिये……! मुझे माफ़ कीजिये हुजूर…..! मैं शर्मिंदा हूँ।  मैं लालची हो गया था।

शहंशाह अकबर बोले कसाई से – नहीं….. नहीं तुम्हे माफ़ नहीं किया जायेगा। तुम्हे इस आदमी को पूरी रकम लौटानी होगी। तुमने चुराने की कोशिश की और इस जुर्म के लिए तुम्हें एक महीने की कैद की सजा मिलेगी।

गंगू तेली बोला अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल तुम्हारा कोई भी जबाब नही, शाबाश बीरबल……! शाबाश…..!

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया हुजूर……!

सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लालच एक बुरी बला है लालच में आकर मनुष्य गलत रस्ते पर जाता है और वो गलत रास्ता एक दिन उसका विनाश कर देता है