तुंगभद्रा नदी दक्षिण भारत की  प्रसिद्ध नदी हैं। यह नदी कर्नाटक राज्य से बहती हुई आन्ध्र प्रदेश राज्य में कृष्णा नदी में शामिल हो जाती है। तुंगभद्रा नदी को रामायण में ‘पंपा’ के नाम से जाना जाता था। तुंगभद्रा नदी का जन्म ‘तुंगा’ एवं ‘भद्रा’ नदियों के मिलन से हुआ है। इसका उद्गम का स्थल ‘गंगामूल’ कहलाता है, ये पश्चिमी घाट के पूर्वा ढाल से होकर बहती है। पश्चिमी घाट के गंगामूला नामक स्थान से (उडुपी के पास) समुद्र तल से 1198 मीटर की ऊँचाई से तुंग तथा भद्रा नदियों का जन्म होता है, जो शिमोगा के पास जाकर सम्मिलित होती हैं, जहाँ से इसे तुंगभद्रा कहते हैं।

उत्तर-पूर्व की ओर बहती हुई, आंध्र प्रदेश में महबूब नगर ज़िले में गोंडिमल्ला में जाकर ये कृष्णा नदी से मिल जाती है। इसके किनारों पर कई हिंदू धार्मिक स्थान हैं। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित शृंगेरी मठ तुंगा नदी के बांई तट पर बना है और इनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध है। 14 वीं सदी में स्थापित दक्कनी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी रही हंपी भी इसी के किनारे स्थित है।

तुंगभद्रा परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजना में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत तुंगभद्रा नदी पर तुंगभद्रा बांध बनाया गया है। तुंगभद्रा नदी कृष्णा नदी की सहायक नदी है। इस नदी पर बनाया गया बांध कर्नाटक में ‘होस्पेट’नामक स्थान पर है। इस बांध का निर्माण सन 1953 में पूरा हुआ था। यह बांध तुंगभद्रा नदी पर एक बहुत बड़ा जलाशय बनाता है और बांध से निकलने वाली नहरों से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के जिलों की सिंचाई होती है। हम्पी के निकट 8 मेगावाट के 9 बिजली सयंत्र लगाए गये हैं, जो कुल मिलाकर 72 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं।

प्राचीन काल में विजयनगर वंश के राजाओं ने सिंचाई के लिए कई नहरों और पानी के साधनों का निर्माण कर इस नदी का इस्तेमाल किया। जल संभरण व्यवस्था का एक कुशल तंत्र महल के मानव निर्मित पानी के पिंड़ों को भरने में मदद करता था। आज भी कुछ पुरानी नहरों के पानी का उपयोग आसपास के खेतों में स्थानीय व्यक्तियों द्वारा सिंचाई के लिए किया जाता है। यह हम्पी का एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है और प्रति वर्ष  अपने किनारों की ओर भारी भीड़ को आकर्षित करता है।

पहले तुंगभद्रा नदी पंपा के नाम से जानी जाती थी। एक आम धारणा के अनुसार, ब्रह्मा की पुत्री पंपा ने भगवान शिव को खुश करने के लिए तपस्या की। उसकी भक्ति से खुश होकर भगवान शिव ने उनसे पंपापति अर्थात् पंपा का पति के नाम से विवाह करने का निर्णय लिया। हम्पी का नाम पंपा की कहानियों में भी उत्पन्न होता है। तुंगभद्रा नदी को देखने आने वाले पर्यटक भगवान शिव की अनगिनत मूर्तियों को खोज सकते हैं।