मनी लाल एक सौदागर था, एक ईमानदार भरोसेमंद आदमी था। उसने काफी मेहनत करके बहुत धन कमाया था। वो अपनी मेहनत से कमाया हुआ धन एक थैले में ड़ालकर अपने बिस्तर के पास पड़े एक संदूक में बंद करके रखता था और उसकी चाबी अपने बिस्तर पर तकिये के नीचे रखकर सोता था।

एक दिन एक चोर आता है और उसके तकिये के नीचे से चाबी निकालकर संदूक का ताला खोल लिया और उसके सारे कमाये हुए धन को चोर ले जाता है। सौदागर सुबह जगा तो उसने देखा कि संदूक का ताला खुला हुआ था और ताला-चाभी बिखरे हुये थे। सौदागर मनी लाल देखकर अचंभित रह गया।

सौदागर मनी लाल बोला – ओह..हो…..! मैंने तो संदूक का ताला लगाया था, ताला कहाँ खुला रह गया। और संदूक खोलकर देखा तो बोला- ओये भगवान…..! और अपने सिपाई को आवाज लगाने लगा।

सौदागर मनी लाल का सिपाई बोला – जी …. हुजुर ! आपने मुझे बुलाया।

मनी लाल सौदागर बोला – मेरा सारा धन चोरी हो गया। और बोला- क्या तुमने कल रात किसी अजनबी को घर के आस–पास देखा था….?

मनी लाल सौदागर का सिपाई बोला – नहीं हुजुर…. मैंने किसी को नही देखा।

मनी लाल सौदागर बोला सिपाई से – मैं बर्बाद हो गया…! मेरा सब कुछ चला गया….! अब में क्या करूँगा…? मेरा धन मुझे कैसे वापस मिलेगा ?

सिपाई बोला सौदागर मनी लाल से – हुजुर…. क्यों ना आप शहंशाह अकबर के पास जाये, शायद वो आपकी मदद कर सकें।

सौदागर मनी लाल बोला – हाँ…..! अब मुझे ऐसा ही करना होगा।

और सौदागर मनी लाल शहंशाह अकबर के दरबार में गया। वहां आप-बीती बात को बताने लगा और सौदागर मनी लाल बोला- अब जहांपना….मुझे उम्मीद है, आप ही मेरी मदद कर सकेंगे।

शहंशाह अकबर बोले – बड़े दुःख की बात है, पर घबराओ मत…. हम इस मामले की तह तक जायेंगे।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! हम चाहते हैं कि तुम इसका हल निकालो।

बीरबल बोले अकबर से – बिल्कुल हुजुर….!

बीरबल बोला मनी लाल से – मनी लाल क्या तुम्हेँ किसी पर शक है ?…. जो यह काम करेगा ?…. मुझे लगता है कि ये किसी घरवाले का ही काम है क्योंकि कोई ग़ैर यह काम इतनी सफाई से नहीं कर पाता और चोर जानता था कि तुम चाबी कहा छुपाकर रखते थे।

मनी लाल बोला बीरबल से – जनाब….. मेरे सारे नौकर काफी सालों से मेरे साथ हैं और हमेशा ईमानदार और वफ़ादार रहे हैं, वैसे भी उन पर शक करने के लिए मेरे पास कोई सबूत नहीं हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल… क्या तुम इस समस्या को सुलझा पाओंगे… ? और वो भी बिना गवाह और सबूत के…… ?

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ…. हुजुर….. मैं बिलकुल सुलझा दुंगा, लेकिन् उससे पहले मुझे आधे घंटे के लिए कहीं बाहर जाना होगा।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – इजाजत है …..!

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया हुजूर…..!

बीरबल बोले मनी लाल से – इस दौरान…. मनी लाल में चाहता हूँ कि तुम अपने साथ सारे नौकर और सिपाहियों को दरबार में पेश करो।

मनी लाल बोला बीरबल से – जो हुकुम…. राजा बीरबल।

और बीरबल अपनी जादुई लकडि़यों को लेने चले जाते हैं और सौदागर मनी लाल अपने नौकरों और सिपाहियों को दरबार में पेश होने के लिए बुलाने गया।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल तुम ये लकड़ियाँ लेकर क्यों आये हो?

बीरबल बोला अकबर से – में थोड़ी देर में सब कुछ समझा दुंगा हुजुर …..!

बीरबल बोला नौकरों और सिपाहियों से – पहले मैं चाहता हूँ, तुम सब पहले एक-एक करके लकड़ी अपने पास रख लो।

बीरबल बोले अकबर से – हुजुर….. ये जादुई लकड़ियाँ हैं, यह मुझे एक महान साधू ने दी थी, जिसे वर्षों की तपस्या के बाद भगवान ने दिया था। ये सब एक ही लम्बाई की हैं और बहुत ही शक्ति है इनमें… । चोर के पास लकड़ी कल सुबहें तक लम्बी हो जाएगीं और जिसमें कि ये पता चल जायेगा चोर कौन है…?

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – क्या तुम्हेँ पूरा यकीन है कि ये जादुई लकड़ियाँ है ? बीरबल…..

बीरबल बोला अकबर से – जी हाँ…. हुजूर मैंने काफी बार इस्तेमाल किया है। हुजूर……

शहंशाह अकबर बोले – अगर ये बात है, तो हम चाहते हैं कल सुबह तुम सब दरबार में लकडि़यों के साथ हाजिर हो।

अगला दिन होता है और सुबह सभा में सारे लोग अपनी लकडि़यों के साथ हाजिर होते हैं।

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से –  बीरबल…..पता करो, इनमें से मुजरिम कौन है….?

बीरबल बोला अकबर से – अभी लीजिये हुजुर…..!

बीरबल बोला मनी लाल के नौकरों और सिपाहियों से – आप सब लकड़ियाँ दें, “ताकि में उनका माप ले सकूं”।

बीरबल नौकरों और सिपाहियों से एक-एक करके लकड़ी वापस लेने लगा और बीरबल ने देखा जो चोर था उसने अपनी लकड़ी एक नाप काटी हुई थी।

बीरबल बोला अकबर से – जहांपनाह….! इस सिपाही ने चोरी की है।
बीरबल और बोले- हुजुर….! इसकी लकड़ी एक नाप से छोटी है। बाकी सब लकडि़यों से….।

उसके बाद कहा- ये जादुई लकडियां नही हैं…. ये तो मामूली लकडियां हैं, जो एक ही लम्बाई में काटी हुई थी क्योंकि ये चोर था, इसने सोचा इसकी लकड़ी एक माप लम्बी हो जाएगी, लिहाज उसनें काट दिया और जो चोर था…. शहंशाह अकबर के सामने हाथ जोड़कर घुटने के बल खड़े होकर रोने लगा।

सिपाही चोर बोला अकबर से – मुझे माफ़ कर दीजिये हुजूर….! मैं शर्मिंदा हूँ, मैं कबुल करता हूँ। मैंने ही अपने मालिक के कमरे से पैसे चुराये थे और जब कल राजा बीरबल ने लकडि़यों के बारे में कहा, तो में डर गया था और सोचा में एक माप लकड़ी को छोटा कर दुंगा तो मैं बच जाऊंगा। मुझे पैसे की जरुरत थी पर में बहुत शर्मिंदा हूँ। और बोला मैंने उसमें से एक पैसा खर्च नहीं किया है और पूरी रकम तुरन्त वापस लौटा दुंगा।

सौदागर मनी लाल बोला शहंशाह अकबर से – जहांपनाह…..! आपने मेरे पैसे वापस दिलवाये…. मैं आपका हमेशा आभारी रहूँगा। शुक्रिया…. जहांपनाह……!

शहंशाह अकबर बोले मनी लाल से – नहीँ शुक्रिया… बीरबल का अदा करो। जिसकी मदद के बिना ये गुत्थी कभी नही सुलझती।

मनी लाल बोला बीरबल से – शुक्रिया…..! राजा बीरबल…. शुक्रिया…..!

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया…. शुक्रिया जहांपनाह…..!