परिचय

चिदंबरम सुब्रमण्यम एक भारतीय राजनेता और स्वाधीनता सेनानी थे। उन्होंने भारत सरकार में वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, खाद्य और कृषि मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में वे महाराष्ट्र राज्य के राज्यपाल भी रहे। भारत के खाद्य और कृषि मंत्री के रूप में उन्होंने एम.एस. स्वामीनाथन, बी. शिवरमन और नार्मन इ. बोरलॉग के साथ मिलकर भारत में ‘हरित क्रांति’ शुरू की और देश को खाद्यान उत्पादों में स्वावलंबी बनाया। इसीलिए उन्हें ‘हरित क्रान्ति का जनक’ भी कहा जाता है। 60 और 70 के दशक में देश भयंकर खाद्यान संकट से गुजरा था और इसकी भरपाई दूसरे देशों से आयात के द्वारा पूरी होती थी, लेकिन ‘हरित क्रांति’ ने भारत के कृषि की तस्वीर ही बदल दी। उन्होंने किसानों को नयी तकनीकी पर आधारित कृषि करने की सलाह दी, जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत कृषि उत्पादों में बहुत हद तक स्वावलंबी हो गया।

चिदंबरम सुब्रमण्यम का जन्म तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के सेनगुत्तमपलायम नामक स्थान पर 30 जनवरी 1910 को हुआ था। उनकी शुरूआती पढ़ाई पोल्लाची में हुई, जिसके बाद वे चेन्नई चले गए, जहाँ पर उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से भौतिक विज्ञान विषय में BSC किया। बाद में उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। उन्होंने कॉलेज के दिनों में अपने कुछ सहयोगियों जैसे- पेरियासामी थूरन, के.एस.रामास्वामी गौंदर, ओ. वी. अलगेसन और न्यायमूर्ति पलनिसामी के साथ मिलकर ‘वना मलार संगम’ की स्थापना की एवं गोबिचेत्तिपलायम (इरोड, तमिल नाडु) में ‘पिथनय’ नाम से एक पत्रिका भी शुरू की।

जब चिदंबरम सुब्रमण्यम कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, तब लगभग सारा देश स्वाधीनता आन्दोलन से प्रभावित था और वे भी अपने आप को इससे अलग नही रख पाए। सविनय अवज्ञा आन्दोलन में वे बहुत सक्रियता के साथ जुड़े रहे। सन 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जेल गए। बाद में उन्हें संविधान सभा का सदस्य चुना गया और उन्होंने भारत के संविधान रचना में भूमिका निभाई। सन 1952 से लेकर सन 1962 तक राजाजी और के. कामराज के नेतृत्व में वे मदरसा राज्य में शिक्षा, कानून और वित्त मंत्री रहे। इस दौरान वे मद्रास विधान सभा में सदन के नेता रहे। सन 1962 में वे लोक सभा के लिए चुने गए और केंद्र में इस्पात और खनन मंत्री बनाये गए। तत्पश्चात उन्हें केंद्र सरकार में खाद्य और कृषि मंत्री बनाया गया। 2 मई 1971 से लेकर 22 जुलाई सन 1972 तक उन्होंने योजना आयोग के उपाध्यक्ष का कार्यभार संभाला।

एम.एस. स्वामीनाथन, बी. शिवरमन और नार्मन इ. बोरलॉग के साथ चिदंबरम सुब्रमण्यम भी भारत में हरित क्रांति के मुख्य वास्तुकार थे। आधुनिक तकनीकी और पद्धति पर आधारित इस कार्यक्रम के कारण सन 1972 में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार हुई। खाद्य और कृषि मंत्री के तौर पर उन्होंने किसानों को उन्नत प्रजाति के बीज, रासायनिक उर्वरक और विज्ञानिक पद्धति पर आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रकार ‘हरित क्रान्ति’ से अनाज उत्पादन में वृद्धि हुई और भारत खाद्यानों में स्वावलंबी बन गया।

चिदंबरम सुब्रमण्यम ने ही कृषि वैज्ञानिक ‘एम.एस. स्वामीनाथन’ की नियुक्ति की जिन्होंने ‘हरित क्रांति’ में मुख्य भूमिका निभाई। जब भारत में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘श्वेत क्रान्ति’ की शुरुआत हुई तब उन्होंने वर्घिस कुरियन को ‘नेशनल डेरी डेवलपमेंट बोर्ड’ का अध्यक्ष बनाया। वर्घिस कुरियन के अनुसार ‘चिदंबरम सुब्रमण्यम ने श्वेत क्रांति में जो भूमिका निभाई उसका उल्लेख ज्यादा नहीं होता’। सुब्रमण्यम ने नेशनल एग्रो फ़ोन्दतिओन की भी स्थापना की।

सन 1969 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ तब चिदंबरम सुब्रमण्यम ने ‘इंदिरा गाँधी’ का साथ दिया और इंदिरा गाँधी के धड़े वाले कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये गए। बाद में उन्हें इंदिरा गाँधी सरकार में वित्त मंत्री बनाया गया। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने इंदिरा गाँधी को रुपये का अवमूल्यन करने की सलाह दी। वे आपातकाल के समय भी देश के मंत्री थे। आपातकाल के बाद वे इंदिरा गाँधी को छोड़कर कांग्रेस के दूसरे धड़े में शामिल हो गए।

चिदंबरम सुब्रमण्यम को सन 1979 में भारत का रक्षा मंत्री ‘चौधरी चरण सिंह’ की सरकार में बनाया गया। सन 1990 में उन्हें महाराष्ट्र राज्य का राज्यपाल चुना गया लेकिन ‘पी.वी. नरसिंह राव’ सरकार के काम करने के तरीके की आलोचना करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

पुरस्कार

  • वाई. वी. चौहान राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • सन 1988 में अनुव्रत पुरस्कार दिया गया।
  • सन 1996 में यू. थांट शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • सन 1996 में नार्मन इ. बोरलॉग पुरस्कार दिया गया।
  • उन्हें सन 1998 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
  • उनके सम्मान में भारत सरकार ने अगस्त 2010 में एक सिक्का जारी किया।

जीवन घटनाचक्र

  • चिदंबरम सुब्रमण्यम का जन्म 30 जनवरी 1910 को हुआ।
  • 1952-62 में मद्रास राज्य में शिक्षा, क़ानून तथा वित्त मंत्री के रूप में काम किया।
  • 1962 में लोक सभा के लिए चुने गए, जिसके बाद इस्पात और खनन मंत्री नियुक्त किए गये
  • 1965 में केंद्र सरकार में कृषि मंत्री बने, जिसके बाद ‘हरित क्रान्ति’ की शुरुआत हुई।
  • 1969 में कांग्रेस पार्टी में विभाजन के बाद इंदिरा गाँधी का समर्थन किया।
  • 1971-72 में योजना आयोग के उपध्यक्ष बनाये गए।
  • 1975 में आपातकाल के समय भारत के वित्त मंत्री रहे।
  • 1990 में महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाये गए।
  • 1998 में सरकार ने उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।
  • उनका निधन 7 नवम्बर 2000 को चेन्नई में हुआ।