परिचय

के. कामराज का पूरा नाम कुमारस्वामी कामराज था। वे दक्षिण भारत के राजनेता थे, जो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और ‘कांग्रेस पार्टी’ के अध्यक्ष बने। उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया।

प्रारंभिक जीवन

के. कामराज का जन्म 15 जुलाई, 1903 को तमिलनाडु के ‘विरुधुनगर’ में हुआ था। उनका मूल नाम ‘कामाक्षी कुमारस्वामी नादेर’ था, लेकिन बाद में वे के. कामराज के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनके पिता का नाम कुमारस्वामी नादेर था, जो पेशे से व्यापारी थे तथा माता का नाम शिवकामी अम्मियार था।

भारतीय राजनीति में के. कामराज ‘किंग मेकर’ के रूप में जाने जाते थे। ‘भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन’ में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए, मात्र 16 वर्ष की उम्र में ही कांग्रेस में शामिल हो गए। वे जवाहरलाल नेहरू के अत्यधिक निकट रहे।

राजनीतिक जीवन

के. कामराज ने मात्र 15 साल की उम्र में अपने गृह जनपद में कांग्रेस पार्टी के लिए धन एकत्र करने का अभियान चलाकर राजनीति में प्रवेश किया। 1937 में उन्हें ‘मद्रास विधानसभा’ के लिए चुन लिया गया और 1952 के आम चुनाव में उन्होंने लोकसभा की सीट जीती। 1954 से 1963 तक वे मद्रास के मुख्यमंत्री रहे और ‘कामराज योजना’ के अंतर्गत उन्होंने पद त्याग दिया।

इसके तुरंत बाद के. कामराज को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने 1964 में लाल बहादुर शास्त्री तथा 1966 में इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।

किंगमेकर की भूमिका

के. कामराज ‘कामराज योजना’ की वजह से ही केंद्र की राजनीति में इतने मजबूत हो गए कि जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने में उनकी भूमिका ‘किंगमेकर’ की रही।

के. कामराज 3 बार ‘कांग्रेस के अध्यक्ष’ भी रहे। दक्षिण भारत की राजनीति में वे एक ऐसे नेता थे, जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए पहचाना जाता है। ‘सत्यमूर्ति’ उनके राजनीतिक गुरु थे।

कामराज योजना

के. कामराज तमिलनाडु राज्य के 3 बार मुख्यमंत्री बने थे, उनको कांग्रेस में ‘किंगमेकर’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने साठ के दशक में महसूस किया कि कांग्रेस की पकड़ कमज़ोर होती जा रही है, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को एक योजना सुझाई, जिसे ‘कामराज योजना’ के नाम से जाना जाता है।

के. कामराज ने 2 अक्टूबर 1963 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनका मानना था कि पार्टी के बड़े नेता सरकार में अपने पदों से इस्तीफा दे दें और अपनी ऊर्जा कांग्रेस में नई जान फूंकने के लिए लगाएं। उनकी इस योजना में उन्होंने स्वयं भी त्यागपत्र दिया।

मुख्यमंत्री पद

भारत की आज़ादी के बाद 13 अप्रैल 1954 को के. कामराज ने बिना इच्छा के तमिलनाडु का मुख्यमंत्री पद स्वीकार किया। उनके नेतृत्व को चुनौती दे रहे सी. सुब्रह्मण्यम और एम. भक्तवात्सल्यम को कैबिनेट में शामिल कर के. कामराज ने सभी को चौंकाया था।

नेतृत्व क्षमता और योगदान

के. कामराज लगातार तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने प्रदेश की साक्षरता दर को 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 37 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। उन्होंने अपने राज्य के लगभग सभी गाँवों में जाकर व्यक्तिगत संपर्क करने के अपने दृढ़ विश्वास को कई बार रेखाकिंत किया।

के. कामराज ने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने निरक्षरता हटाने का निश्चय किया और कक्षा 11वीं तक नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा लागू कर दी। उन्होंने स्कूलों में ग़रीब बच्चों के लिए ‘मध्याह्न भोजन’ देने की योजना लागू की।

भारत रत्न

के. कामराज को 1964 में लालबहादुर शास्त्री तथा 1966 में इंदिरा गांधी के साथ काम करने का मौका मिला। उन्हें 1976 में मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से पुरस्कृत किया गया।

निधन

के. कामराज का निधन 2 अक्टूबर, 1975 को चेन्नई में हो गया।