उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में दो महाजन हुआ करते थे। उनमें से एक का नाम नेकीराम था। वो एक सीधा-साधा शरीफ आदमी था, जो कभी अपने ग्राहकों से बेईमानी नहीं करता था। न उनसे ज्यादा ब्याज लेता था और कभी किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटता था।  

दूसरे का नाम बजीराम था। वो एक लालची आदमी था, जो हर समय अपने ग्राहकों से बेईमानी ही करने की सोचता था। साथ ही ब्याज ही बहुत ज्यादा मांगता था। बजीराम के ज्यादातर ग्राहक अपनी सारी जिन्दगी छोटा सा उधार चुकाने में बिता देते थे। एक दिन नेकीराम का दोस्त कमल आया। नेकीराम के पास और बोला……!

नेकीराम का दोस्त कमल बोला नेकीराम से – नमस्ते मित्र….!

नेकीराम बोला अपने दोस्त कमल से – कमल, तुम्हें देखकर बहुत खुशी हुई। आओ बैठो….!

नेकीराम का दोस्त बोला नेकीराम से – मित्र मुझे पैसों की सख्त जरूरत है। मुझे अपने व्यापार में लगाने के लिए पांच सौ सोने की अशरफिया उधार में चाहिए। ये पैसे मैं 6 महीने में लौटा दूंगा।

नेकीराम बोला अपने दोस्त से – हूँ….! काश तुम्हारी मैं मदद कर सकता हूँ। क्या तुम शाम तक रुक सकते हो ? आज कुछ लोग मेरे पैसे वापस लौटाने वाले हैं।

नेकीराम का दोस्त बोला नेकीराम से – ठीक है, लेकिन जैसे मैंने कहा ? इन पैसों की मुझे आज ही जरूरत है।

नेकीराम का दोस्त नेकीराम के पास शाम के समय जाता है।

नेकीराम बोला अपने दोस्त से – मित्र, क्या तीन सौ सोने की अशरफियों से तुम्हारा काम बन जायेगा ? मैं सिर्फ इतना ही काम कर पाया। बाकी की रकम मैं तुम्हें अगले हफ्ते तक दे दुंगा।

नेकीराम का दोस्त बोला नेकीराम से – नेकीराम….! आज रात ही जयपुर के लिए रवाना होना है। और अगर पैसे न मिले तो, मैं बर्बाद हो जाऊंगा। मेरा सब कुछ दांव पर लगा है।

नेकीराम बोला अपने दोस्त से – हूँ… ठीक है। मैं कुछ सोच के बताता हूँ।

और नेकीराम सोच के बोला अपने दोस्त से…….!

नेकीराम बोला अपने दोस्त से – हाँ….! बजीराम बगल में है। मैं उसे काफी सालों से जानता हूँ। वो भी एक महाजन है। मैं तुम्हारे लिए उससे पैसे उधार ले आता हूँ।

नेकीराम बजीराम महाजन के पास गया। अपने मित्र के लिए उधार लेने तो बोला…..!

नेकीराम बोला बजीराम से – मेरा मित्र कमल जयपुर से आया है। मैं उसे बचपन से जानता हूँ। उसे पैसे की सख्त जरूरत है। मुझे दो सौ सोने की अशरफियां की जरुरत है। ये रकम में छ: महीने में वापस लौटा दुंगा।

बजीराम बोला नेकीराम से – ठीक है, नेकीराम मैं तुम्हें जानता हूँ। मैं तुम्हें ये उधार दुंगा, लेकिन मेरी दो शर्ते हैं- पहली इस रकम पर पचास हजार सोने की अशरफियां का ब्याज होगा। और दूसरी ये अगर तुम छ: महीने में मेरी पूरी रकम नहीं लोटा सकते, तो तुम मुझे अपने जिस्म का एक शेर मांस देना होगा।

नेकीराम बोला बजीराम से – ओ….! ठीक है, मेरे मित्र को इस वक्त सख्त जरुरत है। तो मैं तुम्हारी शर्त मंजूर करता हूँ, क्योंकि मुझे यकीन है कि मेरा मित्र मुझे धोखा नहीं देगा। मेरे पैसे जरुर लौटा देगा और मैं शर्त से बच पाऊँगा।

बजीराम बोला नेकीराम से – ठीक है, ये लो तुम्हारी दो सो सोने की अशरफियां, लेकिन याद रखना। अगर तुमने छ: महीने में मेरे पैसे नहीं लौटाये, तो तुम्हें मुझे अपने जिस्म का एक शेर मांस देना होगा।

और बजीराम से नेकीराम दो सौ सोने की अशरफियां लेकर आ गया।

नेकीराम बोला अपने दोस्त कमल से – कमल…..! अब मेरी जिन्दगी तुम्हारे हाथों में है। मित्र….! कैसे भी करके ये रकम छ: महीने में लौटा देना।

नेकीराम का दोस्त बोला – हे भगवान….! बड़ा जालिम आदमी है। घबराओ मत नेकीराम….! मैं पूरी रकम लेकर लौटूंगा और उस जालिम आदमी का कर्ज उतार दुंगा। तुम एक सच्चे मित्र हो। बहुत-बहुत धन्यवाद….! लेकिन, मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगा। अब मैं चलता हूँ मित्र….!

छ: महीने बीत जाते हैं। नेकीराम का मित्र जयपुर से लौटकर नहीं आया। नेकीराम घबराने लगा।

बजीराम बोला नेकीराम से – नेकीराम….! तुम्हारे छ: महीने पूरे हो गए हैं। कहां हैं ? मेरे पैसे….!

नेकीराम बोला बजीराम से – बजीराम….! मित्र मैं कमल का इंतजार कर रहा हूँ। वो अभी तक लौटा नहीं। लेकिन मुझे यकीन है कि मुझे निराश नहीं करेगा और शाम से पहले जरुर लौटेगा। मैं तुम्हारे पैसे तुम्हें सूरज ढलने से पहले लौटा दुंगा।

बजीराम बोला नेकीराम से – खैर, तुम्हारे पास शाम तक का समय है। अगर तब तक मुझे मेरे पैसे नहीं मिले। तो तुम्हें याद है न, तुम्हें मुझे अपने जिस्म का एक शेर मांस देना होगा।

नेकीराम बोला बजीराम से – बजीराम तुम्हें, तुम्हारे पैसे मिल जायेंगे। मेरा मित्र मुझे निराश नहीं करेगा।

और नेकीराम शाम के वक्त अपने मित्र कमल का इंतजार कर रहा था, तभी बजीराम तलवार लेके आया नेकीराम के घर और बाहर से आवाज देने लगा…….!

बजीराम आवाज देने लगा घर के बाहर से – नेकीराम कहा हो तुम…. ?

नेकीराम बोला बजीराम से – बजीराम…..! मैं अभी तुमसे मिलने आ रहा था। कमल अब तक लौटा नहीं, जरुर कुछ समस्या हो गयी होगी। वो एक दो दिन में जरुर लौटेगा, नहीं तो मैं खुद जयपुर जाकर उसका पता लगाऊँगा। मुझे कुछ दिनों की मौहलत और दे दो।

बजीराम बोला नेकीराम से – बिलकुल नहीं….! मैं अब तुम्हें और मोहलत नहीं दे सकता। या तो तुम मेरे पैसे वापस लोटाओ या फिर शर्त के मुताबिक अपने जिस्म का एक शेर मांस मुझे दो।

नेकीराम बोला बजीराम से – बजीराम…..! मुझ पर रहम करो। अगर तुम मेरे जिस्म का एक शेर मांस काटोगे, तो मैं मर जाऊंगा। मैं तुम्हारे पैसे लौटा दुंगा, मुझे सिर्फ थोड़ी सी मोहलत और दे दो।

बजीराम बोला नेकीराम से – अब कोई फायदा नहीं। या तो पैसे दो या फिर अपने जिस्म का एक शेर मांस।

तभी वहाँ बहुत सारी भीड़ इकटठी हो गई। शहंशाह अकबर के मंत्री और दूत घोड़े पर सवार होकर वहाँ घूम रहे थे। भीड़ को देखकर शहंशाह अकबर के मंत्री और दूत नेकीराम और बजीराम के पास आये। और बोले……!

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला – ये क्या हो रहा है ? यहाँ…! क्या समस्या है ?

बजीराम बोला शहंशाह अकबर के मंत्री से – मुझे इजाजत दीजिये, हुजूर…..! इस आदमी ने मुझसे उधार लिया है। न तो अब ये उधार लौटा रहा है। न ही शर्त के मुताबिक पैसे न लौटाने पर अपने जिस्म का एक शेर मांस मुझे दे रहा है।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला नेकीराम से – क्या ये सच बोल रहा है ?

नेकीराम बोला शहंशाह अकबर के मंत्री से – जी हुजूर…..! ये सच है। मैंने उधार लिया था, लेकिन मेरा मित्र जयपुर से अब तक लौटा नहीं। पर मुझे यकीन है वो जरुर आयेगा और जल्द ही। मुझे बस थोड़ी मोहलत और चाहिए।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला बजीराम से – तुम, इसे थोड़ी मोहलत क्यों नहीं देते ? इसे भी अपने ब्याज में जोड़ देना।

बजीराम बोला शहंशाह अकबर के मंत्री से – नहीं हुजूर…..! मैं और नहीं रुक सकता। या तो वो मुझे पैसे लोटाये या फिर मुझे अपने जिस्म का एक शेर मांस दे दे।

भीड़ में से एक आदमी बोला शहंशाह अकबर के मंत्री से – नहीं….! ये आदमी तो जालिम है। नेकीराम एक भला आदमी है और उसे थोडा समय तो और मिलना चाहिए।

शहंशाह अकबर का मंत्री बोला बजीराम से – खामोश…..! और बोला तुम दोनों मेरे साथ इसी वक्त दरबार चलो। कल सुबह शहंशाह अकबर दरबार में खुद इस का फैसला करेंगे।

अगले दिन शहंशाह अकबर के दरबार में बजीराम और नेकीराम को पेश किया जाता है। शहंशाह अकबर के मंत्री ने बजीराम और नेकीराम की बात शहंशाह अकबर को बताई और बोले…..!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! अब तुम ही ये मामला सुलझाओ।

तभी दरबार में नेकीराम का दोस्त कमल जयपुर से लौट आया। शहंशाह अकबर के दरबार में और बोला….!

नेकीराम का दोस्त कमल बोला अकबर से – हुजूर…..! मेरा नाम कमल है, नेकीराम का मित्र जिसकी वजह से ये समस्या खड़ी हुई है। मुझे शहर से लौटते हुए जरा देर हो गई, लेकिन मैं बजीराम के पूरे पैसे लाया हूँ।

शहंशाह अकबर बोले बजीराम से – बजीराम…! तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस मिल गए। तो मेरे ख्याल से ये मसला सुलझ गया है।

बजीराम बोला अकबर से – नहीं हुजूर….! अब मुझे पैसे नहीं चाहिए। और शर्त के मुताबिक वक्त पर पैसे न लौटने पर मुझे अब उसके जिस्म के मांस का एक शेर हिस्सा चाहिए।

शहंशाह अकबर बोले बजीराम से – तुम इतने ढीठ क्यों बन रहे हो ? पैसे लोटने में सिर्फ एक दिन की ही तो देरी हुई है।

बजीराम बोला अकबर से – हुजूर….! ये बात है, वादा करके उसे निभाने की। लेकिन, मैं आपके सामने खड़ा हूँ। इसलिए अगर ये अपना व्यापार बंद करके शहर छोड़ दे, तो मैं उसका एक शेर मांस नहीं लुंगा।

नेकीराम बोला अकबर से – हुजूर…..! ये शहर मेरा घर है। मैं ये शहर छोड़कर कहा जाऊंगा। ये मुझसे कैसे होगा।

नेकीराम का दोस्त कमल बोला नेकीराम से – मित्र, ये सब मेरी वजह से हुआ है। तुम मेरे साथ जयपुर चलो। मेरे घर में रहना।

शहंशाह अकबर बोले बजीराम से – ठहरो….! मुझे समझ में नहीं आता कि तुम इतने ढीठ क्यों हो ? अपने पैसे लो और ये मसला अभी और इसी वक्त ख़तम करो।

बजीराम बोला अकबर से – हुजूर….! आप शहंशाह हैं, आपका हुकुम तो मानना ही होगा, लेकिन इसका मतलब ये होगा कि व्यापार में किसी वादे की कोई कीमत नहीं है। अगर फिर भी आप यही चाहते हैं। तो…!

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..!

बीरबल बोला बजीराम से – तुम नेकीराम के जिस्म का एक शेर मॉस काट सकते हो। अगर यही तुम्हारी जिद है तो……!

बीरबल बोला सिपाही से – सिपाही, इन्हें अपनी तलवार दो।

और सिपाही अपनी तलवार लेकर आया। और बजीराम के हाथ में तलवार दे दी…..!

 बीरबल बोला बजीराम से – जाइये….! अपने शौक के मुताबिक अपने हक़ का एक शेर मांस काट लीजिये।

बजीराम तलवार तान के नेकीराम के पास गया। तभी बीरबल बोले…..!

 बीरबल बोला बजीराम से – रुको….! अपने वादे के मुताबिक तुमने सिर्फ एक मांस शेर की मांग की है। लेकिन अगर तुम एक बूंद भी खून बहाओगे, तो तुम्हें उसके बदले में हमें अपना खून देना होगा।

बजीराम बोला बीरबल से – खून, पर लेकिन ये कैसे हो सकता है ?

शहंशाह अकबर इस बात को सुनकर हँसने लगे…..!

 बीरबल बोला बजीराम से – ये कैसे करना है ? ये तुम्हारी समस्या है, वादे के मुताबिक तुम्हें एक शेर मांस ही काटना है, लेकिन खून नहीं बहा सकते। अगर आपसे बन सके तो, फिर आप आगे बढ़ो…..!

बजीराम बोला बीरबल से – मैं… अब….. नहीं होगा।

बजीराम ने तलवार नीचे गिरा दी और बीरबल बोले……!

बीरबल बोला अकबर से – हुजूर…..! ये आदमी अपने वादे के मुताबिक अपने हक को छोड़ रहा है।

शहंशाह अकबर बोले बजीराम से – तुम एक जालिम इंसान हो और तुम्हारे इरादे भी साफ़ नज़र आते हैं, तुम बस नेकीराम को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे। क्योंकि वो तुम्हारे ही व्यापार में है।

बजीराम बोला अकबर से – मैं माफ़ी चाहता हूँ। हुजूर…..! मुझे माफ़ कीजिये।

शहंशाह अकबर बोले बजीराम से – तुम्हें माफ़ी नहीं मिल सकती। मुझे ये भी पता चला है कि तुम काफी लोगों के साथ व्यापार में बेईमानी कर चुके हो। तुम्हें एक साल कि कैद की सजा सुनाई जाती है और नेकीराम को जो रकम तुमने उधार दी है। वो हम नेकीराम को उसकी परेशानी के अवश्य देते हैं।

शहंशाह अकबर बोले सिपाहियों – सिपाहियों, इसे काल कोठरी में डाल दो।

और दो सिपाही बजीराम को काल कोठरी में बंद कर देते हैं।

 नेकीराम बोला अकबर से – शुक्रिया जहाँपनाह…….! शुक्रिया बीरबल जी……!

शहंशाह अकबर बोले बीरबल से – बीरबल…..! फिर तुमने अपनी चतुराई से इन्साफ को जीत दिलाई। शाबाश बीरबल…..! शाबाश

बीरबल बोला अकबर से – शुक्रिया हुजूर……!

और सारे मंत्री दरबार में राजा बीरबल जिंदाबाद……! शहंशाह अकबर जिंदाबाद…..! राजा बीरबल जिंदाबाद……! के नारे लगाने लगे।