‘अशोक चक्र’ भारत का शांति के समय का दिया जाने वाला सबसे बड़ा सैन्य पुरस्कार है। यह पुरस्कार किसी सैनिक को उसकी वीरता, साहस या आत्म-बलिदान के लिए दिया जाता है। इसकी मान्यता ‘परमवीर चक्र’ जितनी है, मगर परमवीर चक्र युद्ध के समय वीरता दिखाने के लिए दिया जाता है और ‘अशोक चक्र’ शांति के समय, युद्ध के मैदान से दूर साहस दिखाने के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार आम नागरिक और सैनिक दोनों को दिया जा सकता है।

‘अशोक चक्र’ अमेरिकी सेना के शांति समय के सम्मान ‘मेडल ऑफ़ हॉनर’ और ब्रिटिश सेना के ‘जॉर्ज क्रॉस’ के बराबर है।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट ‘सुहास विश्वास’ भारतीय वायु सेना के पहले ऑफिसर थे, जिन्हें ‘अशोक चक्र’ दिया गया था। पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति को बहादुरी के अलग-अलग कार्यों के लिए ‘कीर्ति चक्र’ या ‘शौर्य चक्र’ से भी सम्मानित किया जा सकता है।

इतिहास

असल में ‘अशोक चक्र’ की स्थापना 4 जनवरी 1952 को क्लास 1 के शांति पुरस्कार के तौर पर की गई थी, अशोक चक्र, क्लास वाले 3 पुरस्कारों में पहला पुरस्कार था, जो शांति के समय में दिया जाता है। 1967 में इन क्लासों को हटा दिया गया और इन पुरस्कारों का नाम बदलकर अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र रख दिया गया। इसी तरह ‘पद्म विभूषण’ को भी 3 भागों में बांटा गया था।

1 फ़रवरी 1999 से भारतीय सरकार ने ‘अशोक चक्र’ के प्राप्तकर्ताओं को प्रतिमाह 1400 रूपये देना शुरू किया।

बनावट

यह पुरस्कार गोल आकार का होता है और इसका व्यास 1-3/8 इंच का होता है। इसके बीच में एक ‘अशोक चक्र’ बना होता है, जिसके चारों तरफ कमल के फूलों की माला बनी होती है। इस पदक के फीते पर बीच में 2 mm की केसर पट्टी होती है और बाकी 32 mm का हिस्सा गहरे  हरे रंग का होता है।