परिचय

अखिलेश यादव एक भारतीय राजनेता हैं, वे उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इससे पहले वे लगातार 3 बार सांसद भी रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘मुलायम सिंह यादव’ के पुत्र अखिलेश यादव ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया। उनकी पार्टी को राज्य में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद 15 मार्च 2012 को उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री पद की शपथ ग्रहण की। उन्होंने अपना मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल 20 मार्च 2017 तक संभाला।

जन्म एवं शिक्षा

अखिलेश यादव का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के इटावा जिले के सैफई गाँव में 1 जुलाई 1973 को हुआ था। उनके पिता का नाम ‘मुलायम सिंह यादव’ तथा उनकी माता का नाम ‘मालती देवी’ था। उन्होंने राजस्थान राज्य के धौलपुर शहर में सरस्वती विद्या मंदिर में स्कूली शिक्षा प्राप्त की, और अभियन्त्रिकी में स्नातक की उपाधि मैसूर के एस. जे. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ली, बाद में विदेश चले गये और सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण अभियन्त्रिकी में स्नातकोत्तर किया।

विवाह

अखिलेश यादव का विवाह 24 नवम्बर 1999 को ‘डिम्पल यादव’ से साथ हुआ। दम्पति जोड़े की 3 संतान है। उनकी पत्नी सांसद हैं और कनौज से निर्विरोध सांसद नियुक्त की गई थी।

राजनैतिक जीवन

अखिलेश यादव ने मई 2009 के लोकसभा उप-चुनाव में फिरोजाबाद सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रत्याशी सत्य प्रकाश सिंह बघेल को 67,301 वोटों से हराकर जीत हासिल की। इसके अलावा वे कन्नौज से भी जीते। बाद में उन्होंने फिरोजाबाद सीट से इस्तीफा दे दिया और कन्नौज सीट अपने पास रखी।

मार्च 2012 के विधान सभा चुनाव में 224 सीटें जीतकर केवल 38 साल की उम्र में ही वे उत्तर प्रदेश के 33वें मुख्यमन्त्री बन गये। जुलाई 2012 में जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उनके कार्य की आलोचना करते हुए व्यापक सुधार का सुझाव दिया तो जनता में यह सन्देश गया कि सरकार तो उनके पिता और दोनों चाचा चला रहे हैं, अखिलेश नहीं। उनकी सरकार को दूसरा झटका तब लगा जब एक IAS (Indian Administrative Service) ‘दुर्गा शक्ति नागपाल’ को बर्खास्त करने पर चारों तरफ उनकी आलोचना हुई। जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें दुर्गा शक्ति नागपाल को बहाल करना पड़ा। सन 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में 43 लोगों के मारे जाने और 93 लोगों के घायल होने पर कर्फ्यू लगाना पड़ा। मुस्लिम व हिन्दू जाटों के बीच हुए इस भयंकर दंगे से उनकी सरकार की बड़ी किरकिरी हुई।